वेतन न दिये जाने के ख़िलाफ़ जेट एयरवेज के पायलटों का विरोध

जेट एयरवेज देश की प्रमुख निजी एयरलाइंस कंपनियों में से एक है। जेट एयरवेज के पायलटों ने वेतन और अन्य बकायों का भुगतान न किये जाने के विरोध में दिसम्बर की शुरुआत में बड़े पैमाने पर “बीमारी” की छुट्टी ली। नतीजतन जेट एयरवेज को 3 दिसंबर को कम से कम 14 उड़ानों को रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

समाचार रिपोर्टों के मुताबिक, जेट एयरवेज ने अपने पायलटों और इंजिनीयरों को अगस्त के महीने से वेतन का भुगतान नहीं किया है। हालांकि, जेट एयरवेज ने सितंबर में आंशिक रूप से कुछ मज़दूरों को भुगतान करने का दावा किया है, लेकिन अक्तूबर और नवंबर के महीनों के लिए मज़दूरों के पूर्ण वेतन का भुगतान नहीं किया गया है।

1,000 से अधिक पायलटों का प्रतिनिधित्व करने वाले जेट एयरवेज के घरेलू पायलटों के संगठन, राष्ट्रीय एविएटर गिल्ड के माध्यम से पायलट अपने वेतन और देय राषि का भुगतान करने के लिए प्रबंधन पर दबाव डालने की कोशिश कर रहे हैं।

जेट एयरवेज गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है, जिसके कुछ कारण हैं, बढ़ती ईंधन लागत, रुपए का अवमूल्यन और अन्य घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय एयरलाइंस से प्रतिस्पर्धा। और तो और, जेट ऐयरवेज लीज़ पर लिए गए विमानों के लिए भुगतान देने में भारी रूप से चूक रहा है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने इस साल की शुरुआत में घोषणा की थी कि जेट एयरवेज कर्ज़ा न चुकाने वाली कंपनियों की उनकी सूची में थी। कंपनी ने कई विमानों की उड़ानें रोक दी हैं और कई मार्गों पर उड़ान संचालन को निलंबित कर दिया है।

जिस प्रकार से सभी पूंजीवादी कंपनियां मज़दूरों की पीठ पर संकट के बोझ को डालती हैं, ठीक उसी तरह जेट एयरवेज के प्रबंधन ने सैकड़ों पायलटों और इंजिनीयरिंग मज़दूरों के वेतन और अन्य बकाया भुगतान को रोक दिया है और ऐसी खबरें आयी हैं कि यह मज़दूरों की बड़े पैमाने पर छंटनी भी कर रही है। प्रबंधकीय और इंजिनीयरिंग स्तर पर कई मज़दूरों को हाल के महीनों में नौकरी से निकाल दिया गया है।

जेट एयरवेज के पायलटों द्वारा विरोध प्रदर्शन उनके रोज़गार और अधिकारों पर बढ़ते हमले का प्रतिरोध है।

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