नोएडा के मोबाइल कारखाने में श्रम कानूनों का उल्लंघन

एक चीनी मोबाइल कारखाने के बारे में एक तथ्य खोजी रिपोर्ट में यह सामने आया है कि यहां गैरकानूनी तरीके से बड़ी संख्या में संविदा मज़दूरों को काम से निकाला गया है। इसने इस सरकार द्वारा 2015 में शुरू की गई ‘मेक इन इंडिया’ नीति को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

इस रिपोर्ट को पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स ने प्रकाशित किया है।

नोएडा में स्थित, ऑप्पो और ज़िओमी फोन बनाने वाली चीनी कंपनी हाइपैड टेक्नालॉजी इंडिया प्रा. लि. ने 29 नवम्बर, 2018 को बिना किसी पूर्व सूचना के, करीब 180 मज़दूरों को काम से निकाल दिया था। हाइपैड को अगस्त 2018 में स्थापित किया गया था।

आई.टी.आई. तथा पॉलीटेक्निक से प्रशिक्षित मज़दूरों को यहां 11 महीनों तक, बिना किसी सुनिश्चित अवधि की गारंटी के साथ, ठेके पर काम दिया जाता है। बहुत बार उन्हें 11 महीनों के पहले ही काम से निकाल दिया जाता रहा है जैसा कि 29 नवम्बर, 2018 को भी किया गया था। हालांकि वेतन दर 12,000 रु प्रति माह बताया जाता है परन्तु किसी को भी 9,200 रु प्रति माह से अधिक नहीं मिलता है। 8 प्रतिशत के हिसाब से भविष्य निधि कटौती सिर्फ 960 रु होनी चाहिये पर 1,840 रु क्यों काट दिये जाते हैं, यह कहीं नहीं समझाया गया है। काम की अवधि प्रति दिन 9 घंटे होती है। दिवाली तक कंपनी ने 3 घंटे ओवरटाइम (ओ.टी.) करना अनिवार्य बना दिया था। आम तौर पर दिवाली बोनस एक महीने की आय के बराबर होता है पर इस साल मज़दूरों को बहुत ही कम, 400 से 500 रुपये ही बोनस दिया गया था।

इस साल की शुरुवात में, मज़दूरों ने वेतन देने में देरी और बिना किसी कारण कटौती का विरोध किया। 17 अप्रैल से वेतन में देरी के विरोध में मज़दूरों ने हड़ताल की। दिवाली के बाद, नवम्बर की शुरुवात में कम मांग की वजह से उत्पादन कम हो गया और प्रबंधन ने मज़दूरों की छटनी शुरू कर दी। नवम्बर के पहले तीन सप्ताहों में 50 से भी अधिक मज़दूरों को काम से निकाला गया।

29 नवम्बर को कंपनी ने बड़ी संख्या में मज़दूरों को काम से निकाला। नतीजन मज़दूरों ने विरोध प्रदर्शन किया और पुलिस ने उनके खिलाफ कार्यवाई की।

मज़दूरों को कारखाने में अंदर आने से रोक दिया गया और उन्हें झूठे आश्वासन दिये गये कि उन्हें दूसरे एक कारखाने में काम दिया जायेगा और अभी के लिये उन्हें अस्थायी तौर पर छुट्टी पर चले जाना चाहिये। परन्तु यह सभी को मालूम है कि ठेके के काम में किसी छुट्टी का प्रावधान नहीं होता और काम पर नहीं रहने का मतलब काम से बाहर निकाला जाना होता है। करीब 180 मज़दूरों को काम से निकाला गया और करीब 1200 मज़दूर प्रबंधन पर दबाव डालने के लिये जमा हो गये। जब प्रबंधन टस से मस न हुआ तब कुछ पथराव की घटनाएं हुईं जिनमें किसी को चोट नहीं आई थी।

दो मौकों पर दर्जनों मज़दूरों के खिलाफ जानलेवा हथियारों के साथ दंगा फसाद करने, जिसमें लोग घायल हुए और दूसरों की जान को ख़तरा आया, आदि, के आरोप में भारतीय दंड संहिता के तहत एफ.आई.आर. दर्ज किये गये हैं। पुलिस की कार्यवाई के कारण यहां एक कानून और व्यवस्था का मामला खड़ा हो गया है और मज़दूरों को अपने अधिकारों के उल्लंघन का प्रतिरोध करने के लिये सज़ा दी जा रही है। कंपनी के इर्द-गिर्द एक तनाव और आतंक से भरा माहौल बना दिया गया है तथा हाइपैड के मज़दूरों से बात करना भी मुश्किल कर दिया गया है।

दुनिया के सबसे बड़े फोन उत्पादक देशों में, चीन के बाद आज हिन्दोस्तान दूसरे नंबर पर आ गया है। उत्पादन के लिये हिन्दोस्तान इसीलिये आकर्षक है क्योंकि यहां श्रम शक्ति सस्ती है और मोबाइलों के लिये यहां बहुत बड़ा घरेलू बाज़ार है।

हाइपैड के मज़दूर उनकी गैर-कानूनी बर्खास्तगी के खिलाफ लड़ने के साथ-साथ उनके खिलाफ दायर किये गये एफ.आई.आर को वापिस लेने के लिये भी लड़ रहे हैं। जो मज़दूर काम पर हैं, वे मांग कर रहे हैं कि उनकी नियुक्ति लिखित संविदा के साथ होनी चाहिये जिसमें कंपनी को मज़दूरों का प्रमुख मालिक माना जाना चाहिये तथा वेतनों को न्यायसंगत तरीके से संशोधित किया जाना चाहिये।

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