रक्षा क्षेत्र में निजीकरण के खिलाफ़ आयुध फैक्ट्रियों के मज़दूरों ने देशव्यापी हड़ताल की

23 से 25 जनवरी के बीच देशभर के 4 लाख डिफेंस सिविल कर्मचारियों ने देशव्यापी हड़ताल की। इस तीन दिवसीय हड़ताल के दौरान देशभर की 41 आयुध निर्माण फैक्ट्रियों, 52 डी.आर.डी.. प्रयोगशालाओं, एम..एस, सी..डी., आर्मी बेस वर्कशॉप, थल सेना, नौसेना, वायु सेना के विभिन्न विभागों में काम ठप्प रहा। इस दौरान देश के तमाम सुरक्षा उत्पादन संस्थान पूरी तरह से बंद रहे। कर्मचारी यूनियनों के श्रमिक नेताओं ने आरपार की लड़ाई का आह्वान किया।Pune

उल्लेखनीय है कि केवल जबलपुर में ही ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया, गन कैरिज फैक्ट्री, वहीकल फैक्ट्री, ग्रे आयरन फाउंड्री, सेंट्रल ऑर्डनेंस डिपो, 506 आर्मी बेस वर्कशॉप और एम..एस. के 15 हजार के करीब कर्मचारियों ने काम बंद रखा।

मुम्बई में 20,000 डिफेंस सिविल कर्मचारियों समेत महाराष्ट्र के 40,000 कर्मचारियों ने हड़ताल में भाग लिया। मुम्बई में स्थित अंबरनाथ ऑर्डनेंस फैक्ट्री, कांदीविली स्थित संेट्रल डिफेंस डिपो, नेवल डाॅक यार्ड, एम..एस., आदि सभी बंद रहे।

इस हड़ताल का असर यह हुआ कि सभी उत्पादन इकाइयों में सेना के लिए तैयार होने वाले वाहन, तोप, बम, गोलाबारूद सभी निर्माण पूरी तरह से थम गये।

Kolkataइस देशव्यापी हड़ताल को सुरक्षा संस्थानों के तीनों प्रमुख महासंघों ऑल इंडिया डिफेंस एम्पलाइज फेडरेशन, भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ और इंडियन नेशनल डिफेंस वर्कर्स फेडरेशन के आह्वान पर किया गया था। सीटू ने हड़ताल को समर्थन दिया।

देश के सबसे बड़े कर्मचारी संगठन ऑल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन ने भी इन कर्मियों की हड़ताल का समर्थन किया है।

हड़ताली मज़दूर संगठनों ने आरोप लगाया है कि केन्द्र सरकार ने रणनैतिक महत्व वाले रक्षा संस्थानों में निजी कंपनियों को प्रवेश देने के लिये 100 प्रतिशत एफ.डी.आई. लाने का फैसला मेक इन इंडिया के नाम पर किया है। इसके तहत 41 ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों में बनाये जा रहे 275 डिफेंस उत्पादों को नॉन कोरघोषित करके निजी क्षेत्र की कंपनियों को बनाने के लिये दिया है। इसके कारण लगभग 25,000 आयुध निर्माणी कामगार तथा सैकड़ों लघु उद्योग प्रभावित हुये हैं या बंद हो चुके हैं। इस क़दम के ज़रिये देश की सुरक्षा को भी खतरे में डाला जा रहा है।

सरकार ने एम..एस., स्टेशन वर्कशॉप, आर्मी बेस वर्कशॉप, इत्यादि को ठेकेदारों को चलाने के लिये सौंप दिया है। लगभग 30 हजार कर्मचारियों को अतिशेष घोषित कर दिया गया है तथा मूल स्थान से दूरस्थ स्थानों पर नौकरी करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत थलसेना, नौसेना और वायु सेना के लगभग 70 प्रतिशत वर्दीधारी कर्मचारियों को नेशनल पेंशन सिस्टम से बाहर रखा गया है, जबकि उसी रक्षा मंत्रालय के 30 प्रतिशत सिविल रक्षा कर्मचारियों को इसमें जबरदस्ती धकेला गया है। संगठनों ने मांग की है कि पुरानी पेंशन योजना को वापस लागू किया जाये।

इस दौरान देशभर में अनेक जगहों पर धरनेप्रदर्शन किये गये और जुलूस निकाले गये। कई जगहों पर गेट मीटिंगें भी की गईं।

त्रिची में रक्षा क्षेत्र के कर्मियों का विरोध

तमिलनाडु के त्रिची में ऑर्डनेन्स फैक्ट्री के 1500 कर्मियों और हैवी एलाय पेनेत्रटर प्रोजेक्ट के 500 कर्मियों ने मिलकर, 23 जनवरी से तीनदिवसीय विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने यह आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार सेना की कार्यशालाओं को बंद करवाकर और रक्षा उत्पादन का निजीकरण करके, राजकीय रक्षा उद्योग को ख़त्म कर रही है।

आल इंडिया डिफेन्स एम्प्लाइज फेडरेशन (.आई.डी..एफ.) के महासचिव, सी. श्रीकुमार का यह कहना है कि रक्षा मंत्रालय ने 275 रक्षा उत्पादों को नॉनकोरघोषित करके, उनके उत्पादन को ऑर्डनेन्स फैक्टरियों से हटाने के प्रस्ताव को सहमति दे दी है। फेडरेशन का यह मानना है कि केंद्र सरकार ने रक्षा उत्पादन को, जो अब तक मुख्यतः ऑर्डनेन्स फैक्टरियों में होता रहा है, निजी क्षेत्र को सौंपने का नीतिगत फैसला लिया है।

.आई.डी..एफ. ने सार्वजनिक रक्षा उत्पादन क्षेत्र की फैक्टरियों को कमजोर करने की रक्षा मंत्रालय की सुनियोजित योजना का भी जमकर विरोध किया है। तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में रक्षाऔद्योगिक गलियारों के ज़रिये देशी रक्षा उत्पादन व्यवस्थाबनाने के नाम पर, रक्षा उत्पादन तो अधिक से अधिक हद तक निजी इजारेदार पूंजीपतियों को सौंपा जा रहा है। फेडरेशन ने इस बात पर गुस्सा जाहिर किया है कि केंद्र सरकार राजकीय ऑर्डनेन्स फैक्टरियों से काम को छीनकर, औद्योगिक गलियारे को बनाने के काम को तेज़ी से आगे बढ़ा रही है।

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