पंजाब में तमाम क्षेत्रों के मज़दूरों की नौकरियों को नियमित करने की मांग

अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में मज़दूरों को ठेक पर काम पर रखने की मज़दूर-विरोधी प्रथा साल दर साल बढ़ती ही जा रही है। हर क्षेत्र के मज़दूर यह मांग कर रहे हैं कि उनकी नौकरियों को नियमित किया जाये और उनकी स्थायी मज़दूर के तौर पर नियुक्ति की जाये। ठेका मज़दूरों को, स्थायी मज़दूर को मिलने वाली सभी सुविधाओं से वंचित किया जाता है। इस नाइंसाफी-भरी प्रथा के खि़लाफ़ मज़दूरों का आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है। मज़दूर एकता लहर इस अंक में पंजाब में चल रहे संघर्षों पर रिपोर्ट प्रकाशित कर रही है।

सफाई मज़दूरों की स्थायी नौकरी की मांग

11 फरवरी, 2019 को पंजाब की सिवरेज़ वर्कर्स यूनियन के सदस्यों ने बठिंडा के म्युनिसिपल कारपोरेशन के दफ्तर के बाहर धरना प्रदर्शन आयोजित किया।

नारे लगाते हुए उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि सालों से चली आ रही हमारी मांगों को सरकार पूरा नहीं कर रही है। यह हक़ीक़त है कि जनरल हाउस मीटिंग ने उनकी मांगों को पूरा करने के फैसले लिए हैं लेकिन ज़मीनी तौर पर कुछ भी नहीं किया गया है। मज़दूर यूनियन ने म्युनिसिपल कारपोरेशन पर मज़दूरों की मांगों को नज़रंदाज़ करने का आरोप लगाया है।

मज़दूर यूनियन ने मांग की है कि 48 सफाई कर्मचारियों की नौकरी को नियमित किया जाये, उनके लिए पुरानी पेंशन योजना लागू की जाये, उनके लिए पदोन्नति की व्यवस्था की जाये, जिन मज़दूरों की मौत हो गयी है उनके परिजनों को नौकरी दी जाये और उनको पूरा वेतन दिया जाये। इन सभी मांगों को तुरंत पूरा किया जाये।

सफाई मज़दूरों ने बताया कि शहर के विस्तार के साथ-साथ सफाई व्यवस्था का भी विस्तार हुआ है और अभी जितने सफाई कर्मचारी नियुक्त किये गए हैं वे इस काम को करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इस कमी को पूरा करने के लिए कम से कम 200 और अधिक सफाई मज़दूरों की नियुक्ति की जाये।

सफाई मज़दूर यूनियन ने अपनी हड़ताल के बारे में म्युनिसिपल कारपोरेशन को नोटिस दिया था, लेकिन उनसे कोई जवाब नहीं मिलने पर मज़दूरों के पास और कोई विकल्प नहीं रहा और वे 11 फरवरी को म्युनिसिपल कारपोरेशन के दफ़्तर के बाहर धरना प्रदर्शन करने को मजबूर हो गए।

सफाई मज़दूरों ने म्युनिसिपल कारपोरेशन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की जाती हैं तो वे अपना आंदोलन और अधिक तेज़ कर देंगे।

इससे पहले यूनियन ने वित्त मंत्री, डिप्टी कमिश्नर, म्युनिसिपल कारपोरेशन के कमिश्नर, मेयर और सफाई बोर्ड के प्रमुख अभियंता को मांग पत्र दिया था।

eachers in Patiala facing police lathichargeस्कूल शिक्षक

​सर्व शिक्षा अभियान और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत पंजाब के सरकारी स्कूलों में ठेके पर भर्ती किये गए शिक्षक, राज्य सरकार द्वारा 8,000 स्कूल शिक्षकों को नियमित न करने की नीतियों के खि़लाफ़ धरना प्रदर्श पर रहे हैं। धरना प्रदर्शन के दौरान जब पुलिस ने उनपर लाठी चार्ज किया और उन पर वाटर कैनन से हमला किया तब उन्होंने “पंजाब सरकार की पढ़ो पंजाब, पढ़ाओ पंजाब” परियोजना का बहिष्कार करने का फैसला लिया। उन्होंने अपना यह बहिष्कार तब तक चलाने का फैसला लिया जब तक सरकार शिक्षकों को नियमित करने की शर्तों में बदलाव नहीं करती है।

पंजाब के शिक्षक नियमित करने के मसले पर उनपर थोपी जा रही शर्तों का विरोध कर रहे हैं। उनमें से एक शर्त यह है कि जिन शिक्षकों को 45,000 रुपये प्रतिमाह का वेतन मिल रहा है, वह तीन साल के लिए 15,000 रुपये बेसिक वेतन पर काम करें तभी उनको नियमित किया जायेगा।

PNA struggleनर्सों का संघर्ष

​पंजाब के पटियाला में राजिंदर सरकारी अस्पताल में ठेके पर काम करने वाली नर्सों और चैथी श्रेणी के मज़दूरों ने 11 फरवरी को अपनी नौकरियों को नियमित करने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन आयोजित किया।

जब सरकार ने उनकी मांगों को पूरा करने से इंकार कर दिया तब नर्सों और मज़दूरों ने ओपीडी और जनरल ऑपरेशन डिपार्टमेंट को बंद कर दिया। कुछ नर्सें मेडिकल अधिकारी के दफ्तर के ऊपर जाकर धरना करने लगीं और अन्य नर्सों और मज़दूरों ने बिल्डिंग के सामने भूख हड़ताल जारी रखी।

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