तूतूकुड़ी हिंसा : पुलिस की भूमिका का सबूत देने वाला कार्यकर्ता लापता

Thoothukudi firing
2018 में तूतूकुड़ी की पुलिस फायरिंग (फाइल फोटो)

तमिलनाडु पर्यावरण संरक्षण आंदोलन के संयोजक मुगिलन, 15 फरवरी की रात को चेन्नई के एग्मोर रेलवे स्टेशन से मदुरई जाते समय लापता हो गए। 15 फरवरी की सुबह उन्होंने एक प्रेस वार्ता की जहां उन्होंने दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये पुलिस अधिकारी उन उपद्रवियों के साथ मिले हुए थे जिन्होंने मई 2018 को तूतूकुड़ी में सरकारी वाहनों को आग लगा दी थी और सीसीटीवी कैमरों को नष्ट किया था। यह घटना उस समय हुई जब लोग स्टरलाइट कॉपर के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। पुलिस द्वारा की गई गोलीबारी में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गयी।

कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और संगठनों ने चेन्नई पुलिस आयुक्त से अपील की है कि वे मुगिलन का पता लगाने के लिए फ़ौरन क़दम उठाएं।

प्रेस वार्ता के दौरान, मुगिलन ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें यह नज़र आता है कि प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और उसके बाद हुई गोलीबारी को पुलिस ने स्टरलाइट कॉपर के प्रबंधन के साथ मिलीभगत में आयोजित किया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरी हिंसा में पुलिस महानिदेशक और उपमहानिदेशक स्तर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल थे।

मुगिलन ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसवालों ने खुद अपने वाहनों को आग लगायी और बाद में इसका दोश स्टरलाइट विरोधी प्रदर्शनकारियों पर लगाया। 22 मई, 2018 को तूतूकुड़ी में हुई गोलीबारी के बारे में उन्होंने एक वीडियो जारी किया जिसका शीर्षक है – “स्टरलाइट हिडन ट्रूथ” (स्टरलाइट का छुपा सच)

इससे पहले मुगिलन ने अपने एक सहयोगी से फ़ोन पर बात करते हुए, अपने ख़िलाफ़ पुलिस द्वारा कार्रवाई की आशंका जताई थी, क्योंकि उन्होंने मीडिया के सामने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ नामजद आरोप लगाए थे।

इससे पहले मुगिलन को कुडनकुलम परमाणु संयंत्र के ख़िलाफ़ संघर्ष के संबंध में राजद्रोह अधिनियम 2017 के तहत मुकदमा दर्ज़ किया गया था। उन्होंने तमिलनाडु में रेत खनन माफिया के ख़िलाफ़ भी विरोध प्रदर्शन आयोजित किये थे।

राजकीय आतंक का पर्दाफाश करने और उसकी निंदा करने के लिए मुगिलन का अपहरण किया जाना और बाद में उनको ढूंढ़ने में नाकामयाबी, एक बार फिर यह दिखाती है कि किस तरह से हिन्दोस्तानी राज्य, मानव अधिकारों और विचारों की आज़ादी के अधिकारों पर हमला करता है। मुगिलन का अपहरण प्रेस वार्ता में पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ सबूत पेश करने के तुरंत बाद किया गया। इससे राजकीय आतंक की हक़ीक़त का पर्दाफ़ाश होता है, जहां पुलिस, सरकार और प्रशासन का विरोध या आलोचना करने वालों को निशाना बनाया जाता है। मुगिलन द्वारा किया गया पर्दाफ़ाश यह भी दिखाता है कि किस तरह से यह राज्य लोगों के संघर्षों के ख़िलाफ़ झूठा प्रचार फैलाता है और हिटलर के तौरतरीकों का इस्तेमाल करते हुए अपने ख़ुफ़िया एजेंटों और भड़काऊ ताक़तों का इस्तेमाल करके हिंसा भड़काता है और फिर उसका दोश अधिकारों के लिए लड़ रहे लोगों के सिर पर मढ़ता है।

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