कार्ल मार्क्स के जन्मदिन के अवसर पर : एक ऐसे क्रांतिकारी को लाल सलाम, जिनका नाम और काम सदा के लिए अमर है!

कार्ल मार्क्स, जिन्होंने पूंजीवादी समाज के विकास के आर्थिक नियम को खोज निकाला था, जिनका जन्म 5 मई, 1818 को हुआ था। 1948 में उन्होंने अपने साथी कामरेड फ्रेडरिक एंगेल्स के साथ मिलकर कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणा पत्र प्रकाशित किया था। इस घोषणा पत्र में उन्होंने कम्युनिस्टों के कार्यों की व्याख्या करते हुआ लिखा कि कम्युनिस्टों का काम है मज़दूर वर्ग को वह चेतना प्रदान करना जिससे वह समाज का सत्ताधारी वर्ग बन सके और उत्पादन के साधनों की मालिकी में बदलाव लाते हुए उसे निजी संपत्ति से सामाजिक संपत्ति में परिवर्तित कर सके।

Karl_Marx18वीं सदी और 19वीं सदी की शुरुआत में दुनिया के सबसे महान सूझवान व्यक्तियों ने दर्शनशास्त्र, राजनीतिक-अर्थशास्त्र और समाजवाद के क्षेत्र में ढेर सारा वैज्ञानिक कार्य संपन्न किया था। जर्मन दर्शनशास्त्र और खास तौर से हेगेल के द्वंद्ववाद की उपलब्धियों से सीखकर कार्ल माक्र्स ने भौतिकवादी दर्शनशास्त्र को उच्चतर स्तर तक विकसित किया। मार्क्स की समाधी पर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए अपने भाषण में एंगेल्स ने भौतिकवादी दर्शनशास्त्र के निचोड़ को इस प्रकार पेश किया – “जिस तरह से डार्विन ने जैविक प्रकृति के विकास के नियम को खोज निकाला था, उसी तरह से मार्क्स ने मानव इतिहास के विकास के नियम को खोज निकाला था; एक सरल सच्चाई, जिसे अभी तक विचारधारा के खरपतवारों के बीच छुपा कर रखा गया था कि इंसान को सबसे पहले खाने, पीने, रहने और पहनने की ज़रूरत है, इससे पहले कि वह राजनीति, विज्ञान, कला, धर्म इत्यादि में रुचि ले सके; कि इसलिए जीवन के लिए ज़रूरी भौतिक वस्तुओं का उत्पादन और उसका नतीजा किसी एक दौर में लोगों द्वारा हासिल किया गया आर्थिक विकास यह सब कुछ बुनियाद है जिसपर उन लोगों के राज्य की संस्थाएं, कानून की संकल्पना, कला और यहां तक कि धर्म की संकल्पना का विकास होता है और उनकी व्याख्या इसी आधार पर की जा सकती है, और न कि इसके विपरीत, जैसे कि आज तक किया जाता रहा है।”

माक्र्स ने जिस किसी विषय पर शोधकार्य किया – और उन्होंने कई सारे विषयों पर गहन शोधकार्य किया था – उन्होंने स्वतंत्र खोज की। वह एक महान वैज्ञानिक थे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि, मार्क्स के लिए विज्ञान एक क्रांतिकारी ताक़त थी। वैसे तो वह किसी भी सैद्धांतिक विज्ञान के क्षेत्र में हुई नयी खोज का बड़ी खुशी के साथ स्वागत करते थे, जिसके व्यवहारिक उपयोग के बारे में अभी कल्पना करना भी असंभव था, लेकिन उनको उन खोजों से बेहद खुशी मिलती थी जिसके उपयोग से उद्योग जगत में तुरंत क्रांतिकारी परिवर्तन होंगे और ऐतिहासिक विकास में जिनका बड़ा योगदान होगा।

मार्क्सवाद का दर्शनशास्त्र द्वंद्वात्मक भौतिकवाद है। द्वंद्वात्मक विधि यह मानती है कि विकास की प्रक्रिया घटनाओं का सीधी रेखा में एक के बाद एक प्रकट होना नहीं है, बल्कि यह उस वस्तु में निहित अंतर्विरोधों का, उस वस्तु में निहित परस्पर विरोधी रुझानों के बीच संघर्ष का नतीजा होती है, जो इन अंतर्विरोधों के आधार पर चलता है। विकास एक सीधी रेखा में एक बराबर नहीं चलता है, बल्कि बेहद छोटे मात्रात्मक विकासपरक परिवर्तन के ज़रिये वह एक ऐसे क्रांतिकारी बिंदू पर पहुंचता है जहां गुणात्मक क्रांतिकारी परिवर्तन होता है।

मार्क्स और एंगेल्स ने ऐतिहासिक भौतिकवाद को विस्तार रूप से समझाया। मानवीय समाज और उसके विकास का अध्ययन करने के लिए द्वंद्वात्मक भौतिकवाद के सिद्धांत का उपयोग करने को ही ऐतिहासिक भौतिकवाद कहते हैं। आदिम सामुदायिक पड़ाव से लेकर आज तक के मानवीय समाज के विकास का अध्ययन करते हुए उन्होंने दिखाया कि पूंजीवाद में निहित अंतर्विरोध अपरिहार्य तौर पर समाज को एक गुणात्मक परिवर्तन यानी, पूंजीवाद से समाजवाद की ओर ले जायेंगे।

मार्क्स ने समाज को वर्ग-विभाजन और शोषण के पड़ाव से आगे बढ़ाने के लिए एक व्यापक सिद्धांत और कार्यनीति विकसित की। आखिर वह एक क्रांतिकारी थे, जिनकी ज्ञान-पिपासा सामाजिक परिवर्तन की ज़रूरत से प्रेरित थी। उनके अपने शब्दों में कहा जाये तो “दार्शनिकों ने केवल दुनिया को अलग-अलग तरह से समझा है। लेकिन असली मसला तो, दुनिया को बदलना है”।

आज दुनिया के स्तर पर उभर रहे अंतर्विरोध ये दिखाते हैं कि पूंजीवाद पूरी तरह से एक काल-भ्रमित और मरणासन्न व्यवस्था बन गया है। हर समय सबसे अधिकतम मुनाफ़ों की दर हासिल करने का इजारेदार वित्त पूंजी का लालच पूरे सामाजिक उत्पादन प्रक्रिया को एक संकट से दूसरे संकट की ओर धकेल रहा है। शोषण और ग़रीबी को तीव्र किये बगैर, एक संकट के बाद दूसरे गहरे संकट में गिरे बगैर, विशाल पैमाने पर लोगों पर हिंसा, आतंक और बर्बादी बरसाए बगैर पूंजीवाद एक भी दिन ज़िंदा नहीं रह सकता।

आज की समस्या का केवल एक ही समाधान है जो कि कार्ल माक्र्स ने सुझाया था – वह समाधान है, श्रमजीवी क्रांति, जो कि पूंजीवाद की कब्र खोदेगी और समाजवाद और एक वर्ग-विहिन कम्युनिस्ट समाज का रास्ता खोल देगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *