आईएल एंड एफएस घोटाला कांड और आडिटरों की भूमिका

कानून के अनुसार, हर कंपनी को अपने खातों की आडिट हर साल कराने की आवश्यकता होती है। किसी भी अवैध गतिविधि का पता लगाना और कंपनी के खातों में दिखाया गया लाभ या हानि सही है, इस बात की जांच करना आडिट करने का उद्देश्य होता है। यदि किसी कंपनी का प्रबंधन घाटे को छिपाने के लिए खातों में हेरफेर करता है या लाभ के झूठे आंकड़े पेश करता है, तो आडिटर को ऐसी सभी धोखाधड़ी वाली गतिविधियों का पता लगाना चाहिए। और इसे लिखकर कंपनी के शेयर धारकों को अपनी ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत भी करनी चाहिए।

यह सामने आया है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (आईएल एंड एफएस) कंपनियों के समूह के आडिटरों ने इस कर्तव्य को पूरा नहीं किया है। इसके विपरीत, आडिटरों ने वरिष्ठ प्रबंधन को झूठी और फरेबी गतिविधियों को अंजाम देने में मदद की है।

आईएल एंड एफएस का मुख्य काम है बड़ी-बड़ी ढांचागत परियोजनाओं के लिए धन देना। इस धन को जुटाने के लिए वह तरह-तरह के स्रोतों से पैसा इकट्ठा करता है। आईएल एंड एफएस निजी-सार्वजनिक सांझेदारी वाली परियोजनाओं के लिए धन का एक प्रमुख दाता है। इस तरह, वह देश के ढांचागत क्षेत्र के निजीकरण में एक प्रमुख खिलाड़ी है।

आईएल एंड एफएस की समस्या जुलाई 2018 में सामने आयी, जब वह कर्ज़ों को चुकाने और ब्याज का भुगतान करने में असमर्थ हो गई। उस समय यह सोचा गया था कि यह एक और वैत्तिक संस्थान है जो न चुकाए गए कर्ज़ों का शिकार है। बाद में जब जांच की गयी तो पता चला कि आईएल एंड एफएस के उच्चतम अधिकारियों ने बीते कई सालों से, बड़े सुनियोजित तरीके से, विस्तृत पैमाने पर धोखा-धड़ी की है।

डेलोइट हस्किन्स एंड सेल्स, के.पी.एम.जी. और अन्स्र्ट एंड यंग से जुड़े आडिटर, 2016-18 के दौरान आईएल एंड एफएस समूह की तीन कंपनियों के आडिटर थे। ये सभी कंपनियां प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय आडिटिंग कंपनियों के रूप में जानी जाती हैं। इनका मुख्यालय अमरीका में है। इनमें से किसी ने भी इस सच का खुलासा नहीं किया कि आईएल एंड एफएस ने अपने कर्ज़ को कम बताते हुए खातों में हेरा-फेरी की है। ये सारा कर्ज़ दरअसल आईएल एंड एफएस द्वारा भारतीय रिज़र्व बैंक के मानदंडों का उल्लंघन करके उनकी सट्टा गतिविधियों का परिणाम है।

डेलोइट में वरिष्ठ प्रबंधन टीम के एक सदस्य ने हिन्दोस्तान की सरकार को एक गुमनाम पत्र में यह बताया था कि डेलोइट सभी अनियमितताओं से पूरी तरह अवगत थी। आडिट और परामर्श फीस के रूप में डेलोइट को प्रति वर्ष 20 करोड़ रुपए दिए जाते थे। बदले में, डेलोइट ने आईएल एंड एफएस प्रबंधन के साथ समझौता करके कंपनी के खातों में साल-दर-साल हेरा-फेरी करने में मदद की। डेलोइट ने एक वरिष्ठ कर सलाहकार को आईएल एंड एफएस को करों से बचाने के लिए एक जटिल प्रणाली बनाने के काम में लगाया था।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि किसी आडिट कंपनी को एक पूंजीवादी कंपनी के खातों में हेरा-फेरी में मदद करते हुए पाया गया हो। जनवरी 2009 में, प्राइस-वॉटरहाउस कूपर्स (पी.डब्ल्यू.सी.) को पूंजीपति बी. रामालिंगा राजू की मदद करने का दोषी पाया गया था। उन्होंने सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज के खातों में 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की आय का हेरफेर दिखाया था।

आडिटिंग व्यवसाय में चार बहुराष्ट्रीय इजारेदार कंपनियों का वर्चस्व है, जिन्हें ’बिग फोर’ के नाम से जाना जाता है – अर्थात, अन्स्र्ट एंड यंग, डेलोइट, के.पी.एम.जी. और पी.डब्ल्यू.सी.। इनका प्रभुत्व इतना अधिक है कि ये जिन कंपनियों का आडिट करती हैं उनका बाज़ार मूल्य भारतीय शेयर बाज़ार में पंजीकृत सभी कंपनियों के कुल मूल्य के दो-तिहाई से अधिक है। वे इतने बड़े हैं कि हिन्दोस्तान की सरकार के आधिकारिक निकाय भी उनके खि़लाफ़ कोई कार्रवाई करने में संकोच करते हैं। इसीलिए सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड इंडिया (एस.ई.बी.आई.) ने पी.डब्ल्यू.सी. को सत्यम कंप्यूटर के मामले में अपनी भूमिका के लिए जांच पूरी करने और पी.डब्ल्यू.सी. को दंडित करने में नौ साल लगा दिए।

हिन्दोस्तान के बड़े पूंजीपति इन आडिट कंपनियों में से किसी पर प्रतिबंध लगाने के खि़लाफ़ सरकार को चेतावनी दे रहे हैं। वे यह तर्क दे रहे हैं कि इससे विदेशी निवेश पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा क्योंकि बहुराष्ट्रीय कंपनियां बिग फोर में से एक को अपने आडिटर के रूप में शामिल करना पसंद करती हैं। उनका कहना है कि ये बिग फोर कंपनियां, पूंजीवादी कंपनियों को कम से कम कर भरने और ज्यादा से ज्यादा मुनाफ़ा कमाने की सलाह देने में उत्तम हैं।

जब ज्यादा से ज्यादा मुनाफ़ा कमाना ही इस पूंजीवादी व्यवस्था की प्रेरक शक्ति है, तब धोखाधड़ी और हेरा-फेरी करने से पूंजीपतियों को रोका नहीं जा सकता है। पूंजीवादी कंपनियों द्वारा की गई अधिकांश धोखाधड़ी सामने नहीं आती है। जब कोई धोखाधड़ी सामने आती है, तो दोष कुछेक व्यक्तियों पर डाल दिया जाता है। सच्चाई यह है कि अर्थव्यवस्था की पूंजीवाद परस्त दिशा ही इसके लिये दोषी है।

आईएल एंड एफएस के इस घोटाले की तरह के तमाम घोटालों के काण्ड देश में स्थापित वर्तमान पूंजीवादी व्यवस्था के अनिवार्य हम सफर हैं।

विशालकाय वित्तीय कंपनियों द्वारा सार्वजनिक धन और लोगों की बचत की लूट को रोकने का एकमात्र तरीका है, अर्थव्यवस्था को लोगों की ज़रूरतों को पूरा करने की दिशा में चलाना, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने की दिशा में।

आईएल एंड एफएस घोटाले की मुख्य विशेषताएं

आईएल एंड एफएस ने 347 सहायक कंपनियों का एक वेब बनाया, जिसमें से अधिकांश अपनी धोखाधड़ी को छिपाने के लिए विदेशों में स्थित हैं।

वे इस सबमें शामिल हुए :

  • में हेरफेर,
  • की चोरी,
  • धन को वैध बनाना,
  • -बूझकर बुरा ऋण देना,
  • को ऋण,
  • में उधार देना,
  • के बिना ऋण, और
  • द्वारा निधियों का विशाल निस्तारण

बाद की जांच में पाया गया :

  • की कंपनियों के उच्च अधिकारियों की जानकारी में, 13,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के अनियमित लेनदेन के कई उदाहरण हैं।
  • उदाहरण जहां कर्ज़दारों को दिए गए ऋण का उपयोग स्पष्ट रूप से समूह सहायक कंपनियों द्वारा मौजूदा ऋण को चुकाने के लिए किया गया था।
  • 6 उदाहरण जिनमें आईएल एंड एफएस के प्रवर्तकों या निदेशकों को धन हस्तांतरित करने के लिए ऋण का उपयोग किया गया था।
  • 107 उदाहरण एवर एंड ग्रीन कर्ज़ के, पर्याप्त सुरक्षा के बिना और आईएल एंड एफएस के साथ प्रबंधन लिंक न होने के बावजूद कंपनियों को ऋण देना।

डेलाइट के बारे में तथ्य

  • वैश्विक आय 31 मई, 2018 के साल के लिए 43.2 अरब अमरीकी डालर।
  • से अधिक देशों में काम करता है।
  • कर्मचारी काम करते हैं।
  • के पांच क्षेत्र – ऑडिटिंग, परामर्श, वित्तीय सलाह, जोखिम सलाह, कर और कानूनी।

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