हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 9वीं परिपूर्ण सभा की विज्ञप्ति

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 9वीं परिपूर्ण सभा की बैठक 1-2 जून, 2019 को हुयी। परिपूर्ण सभा में 17वीं लोक सभा चुनावों के परिणामों का विश्लेषण किया गया और चुनावों में हमारी भागीदारी समेत, हाल के महीनों में पार्टी के काम की समीक्षा की गयी।

परिपूर्ण सभा में यह चर्चा हुयी कि इन चुनावों में बहुत ज्यादा धन खर्च किया गया। इसे दुनिया का सबसे महंगा चुनाव बताया जा रहा है। इस धन का सबसे बड़ा हिस्सा भाजपा ने अपने चुनाव अभियान पर खर्च किया। लोगों के बीच झूठा प्रचार फैलाने के लिए, आधुनिक तकनीकों – टी.वी. और सोशल मीडिया – का अप्रत्याशित हद तक इस्तेमाल किया गया। पूरे चुनाव अभियान के दौरान, राजनीतिक वाद-विवाद का स्तर निम्नतम रहा। नफ़रत फैलाने वाले भाषण, पाकिस्तान के खिलाफ़ उग्र जंगफरोशी, खुलेआम सांप्रदायिक और लोगों को बांटने वाले प्रचार, एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप और प्रत्यारोप, यही सब राजनीतिक चर्चा पर हावी रहे। कश्मीर में बेमिसाल राजकीय आतंक फैलाकर और पुलवामा के आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान पर बम गिराकर, नरेन्द्र मोदी को देश के दुश्मनों को कुचलने के काबिल शक्तिशाली पुरुष के रूप में पेश किया गया।

परिपूर्ण सभा में इन चुनावों में बर्तानवी-अमरीकी एजेंसियों की खास और अहम भूमिका पर चर्चा हुयी। बहुराष्ट्रीय कंपनी फेसबुक और उसकी मालिकी में व्हाट्सएप ने मोदी के अभियान के साथ बहुत ही नजदीकी से काम किया और अनगिनत लोगों की निजी सूचनाओं को उपलब्ध करवाकर, उन लोगों तक पहुंचने में मोदी के अभियान की पूरी मदद की। हर रोज़, करोड़ों लोगों को मोबाइल फोन पर मेसेज भेजे जाते रहे। धर्म, जाति, व्हाट्सएप मेसेजों के बीते रिकॉर्ड, इन्टरनेट प्रयोग के बीते इतिहास, आदि के आधार पर, खास समुदायों को लक्ष्य बनाकर, बने-बनाए मेसेज फैलाए गए।

परिपूर्ण सभा में इस बात पर ध्यान दिया गया कि सोवियत संघ के विघटन के बाद, दुनिया और हिन्दोस्तान में बहुत बड़े-बड़े परिवर्तन हुये हैं।

भूमंडलीकरण, निजीकरण और उदारीकरण के कार्यक्रम को लागू करते हुए, हिन्दोस्तान के इजारेदार पूंजीवादी घराने पूंजी के बहुत बड़े निर्यातक बन गए हैं। उनके आर्थिक हित आज दुनिया के सारे महाद्वीपों में फैले हुए हैं। वे बड़ी सक्रियता के साथ अपने साम्राज्यवादी मंसूबों को पूरा करने में लगे हुए हैं। इसकी वजह से, हिन्दोस्तानी सरमायदारों के आपस बीच के अंतर्विरोध और विदेशों में उनके प्रतिस्पर्धियों के साथ अंतर्विरोध बहुत तीखे हो गए हैं।

हालांकि हिन्दोस्तान 1947 में आज़ाद हो गया था, परन्तु वह साम्राज्यवादी व्यवस्था के साथ जुड़ा रहा। हिन्दोस्तान के सरमायदारों के बरतानवी-अमरीकी साम्राज्यवादियों के साथ निकट सम्बन्ध रहे, और हिन्दोस्तानी राज्य पर बरतानवी-अमरीकी साम्राज्यवादियों का बहुत प्रभाव रहा। शीत युद्ध के दौरान, हिन्दोस्तान के सरमायदार दोनों महाशक्तियों के बीच दांवपेच करके अपने लिए सबसे बेहतर सौदा हासिल कर पाये। परन्तु वर्तमान अवधि में हिन्दोस्तान के सरमायदारों के लिए अमरीकी साम्राज्यवादी दबाव का मुकाबला करना ज्यादा कठिन हो गया है।  हिन्दोस्तान में अमरीका का हस्तक्षेप और हिन्दोस्तानी राज्य पर अमरीका का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

अमरीका अपनी हुक्मशाही के तले एक-ध्रुवीय दुनिया बनाने की कोशिश कर रहा है। वह चीन और रूस, दोनों को अपने रास्ते में संभावित बड़ी रुकावटें मानता है। अमरीका चाहता है कि हिन्द-प्रशांत महासागर क्षेत्र में हिन्दोस्तान उसका वफादार मित्र बन जाए, जिसके सहारे चीन को आगे बढ़ने से रोका जा सकेगा, रूस को कमजोर किया जा सकेगा और ईरान को अलग-थलग किया जा सकेगा। मोदी की अगुवाई में भाजपा की बहुमत वाली सरकार जो एक बार फिर सत्ता में आयी है, उस पर अमरीका यह भरोसा कर रहा है कि वह हिन्दोस्तान को उसी रास्ते पर ले जायेगी, जिस पर अमरीका चाहता है।

उपरोक्त विश्लेषण के आधार पर, परिपूर्ण सभा इस निष्कर्ष पर पहुंची कि 2019 के लोक सभा चुनावों में भाजपा की बहुमत वाली जीत को अंजाम देने में वाशिंगटन का हाथ स्पष्ट नज़र आता है। बरतानवी-अमरीकी साम्राज्यवादियों और उनकी एजेंसियों की अहम भूमिका की वजह से, हिन्दोस्तानी सरमायदारों के आपस बीच के अंतर्विरोध इस समय के लिये, उसी तरह हल किये गए हैं जो अमरीका के हितों के अनुसार हो।

परिपूर्ण सभा का यह स्पष्ट विश्लेषण था कि लोगों ने भाजपा को नहीं जिताया है। हिन्दोस्तान के सबसे प्रभावशाली इजारेदार पूंजीपतियों ने बरतानवी-अमरीकी साम्राज्यवादियों के साथ मिलकर, भाजपा को जिताया है।

परिपूर्ण सभा में इस सच्चाई को दोहराया गया कि वर्तमान व्यवस्था में चुनाव देशी-विदेशी इजारेदार पूंजीपतियों का एक हथकंडा है। चुनाव लोगों को बुद्धू बनाने और इजारेदार पूंजीपतियों की एक या दूसरी वफादार पार्टी के लिए तथाकथित बहुमत पैदा करने का एक साधन है। चुनाव पूंजीपतियों के आपसी अंतर्विरोधों को हल करने का काम भी करते हैं।

हिन्दोस्तान को एक बेहद ख़तरनाक रास्ते पर घसीट कर ले जाया जा रहा है। इसका मकसद है खुदगर्ज़ इजारेदार पूंजीपतियों के हितों को पूरा करना और मेहनतकश बहुसंख्या के हक़ों को नकारना। अमरीकी साम्राज्यवादियों के साथ नजदीकी से जुड़ने की वजह से, हिन्दोस्तान के नाजायज़ साम्राज्यवादी जंग में फंसने का ख़तरा बढ़ जायेगा। इससे हिन्दोस्तानी संघ के टुकड़े-टुकड़े हो जाने का ख़तरा भी बढ़ जायेगा।

हमारे हुक्मरानों को अपनी वैश्विक आकांक्षाओं के बारे में ज्यादा फिक्र है, न कि देश के लोगों की खुशहाली, देश की आज़ादी या इस इलाके में शांति के बारे में। देश की संप्रभुता या एशिया में शांति की रक्षा करने के लिए इस हुक्मरान वर्ग पर भरोसा नहीं किया जा सकता। इन हालतों में, ज्यादा से ज्यादा लोगों को एकजुट होकर, इस ख़तरनाक रास्ते का विरोध करना चाहिए, जिस पर देश को घसीट कर ले जाया जा रहा है।

हाल के चुनावों में हमारी पार्टी के काम का परिपूर्ण सभा में सकारात्मक मूल्यांकन किया गया। ऐसे समय पर, जब लोगों पर यही प्रचार बरसाया जा रहा था कि एक तरफ भाजपा और दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी की अगुवाई में विपक्ष गठबंधन, इन्हीं दोनों के बीच में चुनना है, तो हमारी पार्टी ने क्रांतिकारी विकल्प पर ज़ोर देते हुए एक जुझारू अभियान चलाया। हमने हिन्दोस्तान के नव-निर्माण के कार्यक्रम को प्रस्तुत किया और जन-जन में उसका प्रचार किया। पूंजीपतियों की हुकूमत के चलते, कम्युनिस्टों को चुनाव में कैसे भाग लेना चाहिए, इसका हम एक मिसाल बने।

केन्द्रीय समिति की पिछली परिपूर्ण सभा के बाद, हाल के महीनों में पार्टी के सभी संगठनों के काम की इस परिपूर्ण सभा में सराहना की गयी। इन कामयाबियों को और आगे ले जाने के लिए, पार्टी के सभी संगठनों के लोकतान्त्रिक-केन्द्रीयवादी काम के तरीकों को मजबूत करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया।

दुनिया की सबसे हमलावर और जंगफरोश ताक़त, अमरीकी साम्राज्यवाद का वफादार मित्र बनना हिन्दोस्तान के लिए ख़तरों से भरा हुआ रास्ता है। इन ख़तरों का पर्दाफाश करने की कोशिशों को और तेज़ करने की ज़रूरत पर परिपूर्ण सभा में जोर दिया गया। हमें संसदीय लोकतंत्र की वर्तमान व्यवस्था का लगातार पर्दाफाश करते रहना होगा, उदारीकरण और निजीकरण के कार्यक्रम का विरोध करते रहना होगा और मानव अधिकारों व जनवादी अधिकारों की हिफाज़त में, राजकीय आतंकवाद और राज्य द्वारा आयोजित सांप्रदायिक हिंसा के खि़लाफ़ राजनीतिक एकता बनानी होगी।

अंत में, परिपूर्ण सभा में इस बात को दोहराया गया कि लोगों के दैनिक संघर्षों में हमें लगातार भाग लेना होगा, ताकि मज़दूरों और किसानों को अपने हाथ में राज्य सत्ता लेने और हिन्दोस्तान का नव-निर्माण करने के लिए तैयार किया जा सके। नव-निर्माण का मतलब है राजनीतिक व्यवस्था का पुनर्गठन करना ताकि संप्रभुता लोगों के हाथ में हो, अर्थव्यवस्था को नयी दिशा दिलाना ताकि लोगों की ज़रूरतें पूरी की जायें न कि पूंजीपतियों की लालच, और विदेश नीति की नयी परिभाषा देना ताकि अपने पड़ोसी देशों के साथ हमारी साम्राज्यवाद-विरोधी एकता मजबूत हो।

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