दिल्ली जल बोर्ड की अपराधिक लापरवाही के चलते मज़दूर की मौत

28 जून, 2019 को जब तीन मज़दूर दिल्ली में ख्याला इलाके में जमीन से 30 फीट नीचे नाली को साफ कर रहे थे, तो अचानक जल बोर्ड द्वारा पानी की सप्लाई शुरू करने की वजह से वे पानी में डूब गए। उनको बचाने के लिए बचाव दल को बुलाया गया लेकिन इस बीच एक मज़दूर की मौत हो गयी और अन्य दो मज़दूर बेहद नाजुक हालत में है। दिल्ली जल बोर्ड ने नालियों को साफ करने के लिए निजी कंपनियों को कॉन्ट्रैक्ट दे रखा है। यह घटना साफ तौर से दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों की अपराधिक लापरवाही का सबूत है कि उस समय पानी की सप्लाई शुरू करके मज़दूरों को डूबा दिया गया जब वह नालियों को साफ करने का काम कर रहे थे।

sewers worker death

हिन्दोस्तान की सरकार और उसका प्रशासन मज़दूरों और मेहनतकशों की जिन्दगी के बारें में कितना लापरवाह है यह इस बात से पता चलता है कि देश में हर साल सैकड़ों सफाई मज़दूरों की मौत हो जाती है। हर सप्ताह किसी न किसी शहर से ख़बर आती है कि नालियों/गटर की सफाई करते समय जहरीली गैस की वजह से मज़दूरों की मौत हो गयी है। सफाई कर्मचारियों पर राष्ट्रीय आयोग का अनुमान है कि हर पांचवे दिन एक सफाई मज़दूर की नालियों की या सेप्टिक टैंक की सफाई करते हुए मौत हो जाती है। पिछले एक वर्ष 2017-18 में केवल दिल्ली में 14 मज़दूरों की मौत हुई है।

सफाई मज़दूरों के लिए सुरक्षित काम की परिस्थितियों पर तमाम विशेष कानूनों के बावजूद, सफाई मज़दूरों की मौत हो रही है। सिर पर मैला ढोने वाले रोजगार पर प्रतिबंध और उनका पुनर्वास कानून, 2013 (प्रोहिबिशन ऑफ एम्प्लॉयमेंट एस मैन्युअल स्कावेंजर एंड देयर रिहैबिलिटेशन एक्ट 2013) के अनुसार टॉयलेट, सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए बिना सुरक्षा उपकरण और मशीन के काम कराने पर पाबंदी है। लेकिन इनमें से कोई भी कानून लागू नहीं किया जाता है। आज तक किसी भी अधिकारी को गुनाहगारी लापरवाही के लिए सज़ा नहीं दी गयी है। आम तौर पर प्रशासन कांट्रेक्टर पर दोष लगाता है और मुआवज़े की घोषणा कर देता है।

मज़दूर एकता लहर केंद्र और राज्य सरकार की इस गुनाहगारी लापरवाही की कड़ी निंदा करती है।