पायलटों ने बोंइंग पर मुकदमा दायर किया : सुरक्षा के प्रति अपराधिक उदासीनता

अमरीका में 400 से अधिक पायलटों ने बोइंग कंपनी के ख़िलाफ़ 737 “मैक्स” विमान के “डिजाईन में मौजूद नुक्स को जानते हुए” उसे ढकने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया है।

Boeing crash“मैक्स” विमान पिछले एक साल के दौरान हुई दो घातक दुर्घटनाओं में शामिल था। पहली घटना अक्टूबर 2018 में इंडोनेशिया के तट पर हुई जिसमें 189 यात्री और चालक दल के सभी सदस्य मारे गए। दूसरी घटना इथोपिया में मार्च 2019 को हुई जिसमें 157 यात्री और चालक दल के सदस्य मारे गए। इन दुर्घटनाओं के बाद, दुनिया भर में एयरलाइन कंपनियों ने मैक्स विमान को चलाना बंद कर दिया था। इस मुकदमे के तहत, कंपनी को दुर्घटना के लिए जिम्मेदार बताया गया है, क्योंकि कंपनी ने जानबूझकर “डिजाईन में मौजूद नुक्स” पर पर्दा डाला था।

बोइंग कंपनी ने यह विशालकाय विमान 2017 में बाज़ार में उतारा था। इस विमान में एक नया सॉफ्टवेर (एम.कास-एम.सी.ए.एस.) लगाया था, जिसका काम विमान दुर्घटना को रोकना था। लेकिन इस विमान को बाज़ार में उतारकर उसे बेचने की जल्दबाज़ी में बोइंग कंपनी ने अपने ग्राहक हवाई सेवा कंपनियों को इस सॉफ्टवेर के बारे में आगाह नहीं किया, और न ही अतिरिक्त ट्रेनिंग की ज़रूरत के बारे में बताया। बोइंग कंपनी जानती थी कि ऐसा करने से विमान को बाज़ार में उतारने में देरी होगी। जब इंडोनेशिया एयरलाइन के दुर्घटनाग्रस्त विमान से मिले डाटा का विश्लेषण किया गया तो साफ तौर पर पता चला कि एम-कास सिस्टम ने बार-बार यह संदेश भेजा कि विमान समुंदर की ओर तेजी से गिर रहा है। लेकिन यदि यह यंत्र गलत सिग्नल दे रहा है तो इस यंत्र को बंद करने की ट्रेनिंग विमान चालकों को नहीं दी गयी थी।

इससे पहले भी कई बार ऐसे उदाहरण सामने आये हैं, जब बोइंग कंपनी ने सुरक्षा निर्देशों को नज़रंदाज़ किया था और उनका उल्लंघन किया था। 2014 में बोइंग कंपनी ने ओबामा प्रशासन पर दबाव डालकर इस बात की इज़ाज़त हासिल कर ली कि सुरक्षा प्रमाणित करने की प्रक्रिया को फ़ेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन की बजाय, कंपनी के प्रतिनिधि खुद चलाएंगे। फ़ेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन एक सरकारी संस्थान है, जो विमान सुरक्षा प्रक्रिया की ऑडिट के लिए ज़िम्मेदार है। सुरक्षा नियमों को सुनिश्चित करने की प्रक्रिया में इस बदलाव के चलते बोइंग कंपनी ने अपने एम-कास सॉफ्टवेर को खुद ही सुरक्षित प्रमाणित किया।

साफ़ तौर से बोइंग कंपनी इस भयानक अपराध के लिये दोषी है। एक हवाई जहाज सैकड़ों यात्रियों को ले जाता है। उसकी सुरक्षा ठोस डिजाईन, अनुभवी और कुशल पायलटों और तमाम एहतियाती सुरक्षा प्रोटोकॉल पर निर्भर करती है, जिन्हे अभूतपूर्व आपातकालीन परिस्थितियों में लागू किया जाना चाहिए। यदि पायलटों को विमान की इंजीनियरिंग की पूरी जानकारी नहीं है और उस विमान के मॉडल की विशेषताओं के बारे में ट्रेनिंग नहीं दी गयी हो तो सैंकड़ों लोगों को जान का ख़तरा हो सकता है। परन्तु बोइंग कपंनी में इन बातों को नज़रअंदाज किया ताकि इस विमान को जल्द से जल्द बाज़ार में उतारा जा सके। जिन पायलटों ने यह मुक़दमा दायर किया है उन्होंने इस बात को उजागर किया कि बोइंग और हवाई जहाज का उत्पादन करने वाली अन्य कंपनियों के लिए उनके मुनाफे सबसे अधिक महत्वपूर्ण होते है और पायलटों, चालक दल और आम लोगों की जान की उनको कोई फिक्र नहीं होती है।

सुरक्षा विनियमन और तकनीकी प्रगति के चलते हवाई यात्रा बहुत सुरक्षित हो सकती है। लेकिन मुनाफ़ा बनाने की होड़ से सुरक्षा ख़तरे में आ रही है।

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