लोको पायलटों ने रेलवे के निजीकरण का विरोध किया

ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसियेशन की सेंट्रल वर्किंग कमेटी ने 23 जून, 2019 को गाज़ियाबाद में हुई एक सभा में रेल के निजीकरण के लिये उठाये जा रहे कदमों का विरोध किया।

इस अवसर पर जारी एक प्रेस नोट में संगठन के महासचिव एम.एन. प्रसाद ने रेल मंत्रालय के प्रस्तावित 11 सूत्री एक्शन प्लान की सच्चाई का पर्दाफाश किया। रेल मंत्रालय इस एक्शन प्लान को 100 दिनों के अंदर लागू करने का प्रस्ताव पेश कर रहा है। यह साफ है कि इस एक्शन प्लान का असली मकसद भारतीय रेल को टुकड़े-टुकड़े करके, अलग-अलग सेवाओं का निजीकरण करना है।

एक्शन प्लान के अनुसार, सवारी गाड़ियों को निजी कपंनियों को चलाने के लिये दिया जायेगा। 100 दिनों के अंदर दो सवारी गाड़ियों को लीज़ पर आई.आर.सी.टी.सी. (रेलवे बोर्ड के तहत टिकटिंग और यात्री सेवाओं के लिये स्थापित कंपनी) को दिया जायेगा। ये रेल गाड़ियां स्वर्णिम चतुर्भुज और मुख्य शहरों को जोड़ने वाले रूट पर चलायी जायेंगी। इसके लिये राजधानी, शताब्दी, आदि जैसी गाड़ियों को प्रस्तावित किया गया है जो मुनाफेदार रूट पर चलती हैं। यह एक पहला कदम मात्र है, जिसके बाद सवारी गाड़ियों को एक-एक करके, मुनाफेदार रूट पर चलाने के लिये निजी कंपनियों को सौंपा जायेगा। ये कंपनियां अपने अधिक से अधिक मुनाफों के लिये लोगों को खूब लूटेंगी। प्रस्तावित दो रेलगाड़ी रूटों के सुधार के लिये 13,490 करोड़ रुपये लगाये जायेंगे। यह ऐसे समय पर किया जा रहा है जब रेलवे प्रबंधन यह दावा करता है कि उसे भारी नुकसान भुगतने पड़ रहे हैं और उसके पास मौजूदा रेलवे सेवाओं, ढांचागत देखरेख, आदि के लिये कोई धन नहीं है।

एक दूसरा प्रस्ताव है रेल भाड़ों को बढ़ाना तथा उन सब्सीडाइज़्ड भाड़ों को घटाना जो इस समय रेलवे वरिष्ठ नागरिकों, छात्रों, दिव्यांग जनों, पूर्व सेनानियों आदि को देता है। भारतीय रेल अख़बार, टी.वी. और सोशल मीडिया के ज़रिये “सब्सीडी छोड़ो” प्रचार अभियान चलायेगा। इस तरह सरकार जनता को सस्ते दाम पर सुरक्षित रेल यात्रा की सेवा दिलाने की अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रही है। इससे मेहनतकश समुदाय की कठिनाइयां बहुत बढ़ जायेंगी और इन ट्रेनों को चलाने वाली निजी कपंनियों के मुनाफ़े भी।

एक्शन प्लान में एक और प्रस्ताव है कि भारतीय रेल और उससे संबंधित वर्कशॉप्स का निगमीकरण। इन्हें भारतीय रेल से अलग करके, ‘इंडियन रेलवे रोलिंग स्टॉक कपंनी’ के साथ जोड़ देने का प्रस्ताव है। यह रेलवे के उत्पादन को निजी कंपनियों को आउटसोर्स करने का प्रयास है। इस तरह भारतीय रेल के कीमती संसाधनों को निजी पूंजीवादी घरानों को अधिकतम मुनाफ़े बनाने के लिये सौंप दिया जायेगा। इससे मेहनतकशों की लूट खूब बढ़ जायेगी और रेलवे की उत्पादक क्षमता और आत्मनिर्भरता को भारी चोट पहुंचेगी।

प्रेस नोट में यह भी बताया गया है कि सभी केन्द्रीय ट्रेड यूनियन लगातार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के निजीकरण का विरोध करते आये हैं। पर इस विरोध को नज़रअंदाज़ करते हुये, सरकार ने 46 सार्वजनिक क्षेत्र कंपनियों के निजीकरण की घोषणा कर दी है। रेल यात्रा की सुरक्षा को बढ़ाने के लिये रेल कर्मचारियों ने जो-जो प्रस्ताव रखे थे, उनको सरकार ने बार-बार नज़रअंदाज़ किया है।

वर्किंग कमेटी की बैठक में रेल मंत्रालय के इस एक्शन प्लान की कड़ी निंदा की गई। सभी ज़ोनल कमेटियों को आह्वान किया गया कि सरकार की इस योजना के खिलाफ़ सभी रेल मज़दूरों को लामबंध करके धरने-प्रदर्शन और तरह-तरह के विरोध कार्यक्रम करें।

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