लोक सभा चुनाव पर दिल्ली में पार्टी की सभा

23 जून, 2019 को दिल्ली में कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी ने एक सभा का आयोजन किया। इस सभा में देश में मौजूदा हालात और लोक सभा चुनाव अभियान के दौरान सभी साथियों के अनुभवों पर चर्चा की गयी। दिल्ली क्षेत्र में काम कर रहे साथियों ने इस सभा में हिस्सा लिया। इनमें अधिकांश नौजवान थे जिन्होंने चुनाव अभियान के दौरान काम किया था। पार्टी ने हिन्दोस्तान के नवनिर्माण के वैकल्पिक क्रांतिकारी कार्यक्रम को लोगों में ले जाने के लिये अपना उम्मीदवार खड़ा किया था। पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह ने चर्चा की शुरुआत की। सभी साथियों ने जोश के साथ हिस्सा लिया और अपने सवाल पेश किये। उन्होंने चुनाव के दौरान प्राप्त अनुभव के आधार पर सवाल और अपने विचार भी पेश किये।

चर्चा का केंद्र बिन्दु था – हमारे देश में मौजूदा जनतंत्र का चरित्र और उसके बारे में फैलाया जा रहा भ्रम। प्रस्तुति में बताया गया कि हम एक वर्ग-विभाजित समाज में जी रहे हैं। यहां एक तरफ सरमायदार है, जो तमाम उत्पादन के साधनों का मालिक है, और दूसरी ओर शोषित वर्ग है जिसके पास बेचने के किये केवल अपनी श्रम शक्ति है। इस व्यवस्था में सरमायदार वर्ग राज करता है। इस व्यवस्था में राजनीतिक प्रक्रिया और तमाम राजनीतिक संस्थान हुक्मरान वर्ग यानि सरमायदार वर्ग की सेवा करते हैं। पुलिस, कोर्ट और पूरी कानून व्यवस्था सरमायदार वर्ग के हितों की रक्षा करती है। राजनीतिक प्रक्रिया और संस्थाएं इस तरह से बनाये गए हैं जिससे वे सरमायदार वर्ग के राज को बरकरार रख पाएं और सभी मेहनतकश लोगों और देश के तमाम प्राकृतिक संसाधनों का शोषण करने में उनकी मदद करें, जिससे सरमायदार और भी अमीर हो पाए। इस व्यवस्था में मज़दूरों, किसानों, मेहनतकश लोगों, महिलाओं और नौजवानों को हर प्रकार के दमन और नाइंसाफी का सामना करना पड़ता है, लेकिन अपने इन हालातों को बदलने की ताक़त उनके पास नहीं है। यह केवल पूंजीपति वर्ग के लिए लोकतंत्र है – किसी और के पास कोई अधिकार नहीं है।

ज़बकि यह हक़ीक़त है, तो सरमायदारों ने यह भ्रम पैदा किया है कि पूंजीवादी लोकतंत्र सभी लोगों के हित में काम करता है। लगातार प्रचार के द्वारा, बार-बार झूठ फैलाकर एक भ्रम फैलाया गया है कि हमारे समाज में सभी को सफल होने के लिए बराबर का मौका दिया जाता है। हाल के वर्षों में सरमायदारों ने देश के लाखों करोड़ों नौजवानों के हाथों में स्मार्ट मोबाइल फोन उपलब्ध कराया है। ये स्मार्ट फोन नौजवानों को ताकत का एहसास देते हैं, क्योंकि इसके द्वारा वे दुनियाभर की जानकारी हासिल कर सकते हैं, दोस्तों से किसी भी समय बात कर सकते हैं, संगीत सुन सकते हैं और फिल्म देख सकते हैं। लेकिन नौजवान इस बात को नहीं जानते हैं कि सरमायदार इसका इस्तेमाल झूठ फैलाकर नौजवानों के दिमाग को गुमराह करने और पूंजीवादी व्यवस्था के बारे में भ्रमों को जिंदा रखने के लिए भी करते हैं। लोगों को यह बताया जाता है कि उन्होंने “अपनी सरकार” को चुना है, जो उनके लिए काम करेगी। नौजवानों को बताया जाता है कि उनको मन लगाकर पढ़ाई करनी चाहिए, जिससे उन्हें नौकरी मिलेगी और वे अमीर हो जायेंगे। लोगों को यह मानने के लिए मजबूर किया जाता है कि यह व्यवस्था उनके लिए काम करती है, जबकि उनका अनुभव ठीक इसके विपरीत है। उनको बताया जाता है कि यदि उनके हालात नहीं सुधरे हैं तो इसका मतलब है कि उन्होंने अपनी जिंदगी सुधारने के लिए पर्याप्त मेहनत नहीं किया है। अपने हाल के लिये लोगों को खुद को ही दोषी ठहराया जाता है!

चुनावों को “जनतंत्र” का सबसे बड़ा त्यौहार बताया जाता है। यह भ्रम पैदा किया जाता है कि चुनाव में सभी उम्मीदवारों को एक बराबर मौका मिलता है और यह समतल मैदान है, जहां सभी बराबर है। हिन्दोस्तानी सरमायदार और साम्राज्यवादी चुनाव का इस्तेमाल यह फैसला करने के लिए करते है कि उनकी सेवा करने के लिए कौन सी पार्टी सत्ता में आएगी। जिन पार्टियों ने सरमायदारों के प्रति अपनी वफादारी साबित की है, ऐसी चुनिंदा पार्टियों को सरमायदार ढेर सारा पैसा मुहैया कराते हैं। मज़दूर वर्ग के उम्मीदवार के पास लोगों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए बहुत कम पैसा और संसाधन होते हैं, जबकि सरमायदारी पार्टियों के पास करोड़ों रुपये होते हैं और मीडिया में भी उनकी पूरी पहुंच होती है। ऐसे हालातों में यह सोचना कि कोई निर्दलीय उम्मीदवार या मज़दूर वर्ग का उम्मीदवार अपनी राजनीति और काम के आधार पर चुनाव जीत जायेगा, तो इसका मतलब यह है कि हमने इस व्यवस्था को समझा ही नहीं है।

प्रस्तुति के बाद हुई चर्चा से सभी मौजूद साथियों में यह बात साफ हो गयी कि हमारी पार्टी को चुनावों के बारे में कोई भ्रम नहीं है। हम यह जानते हैं कि मौजूदा व्यवस्था में चुनाव न तो मुक्त है और न ही निष्पक्ष है, बल्कि इस पूरी प्रक्रिया पर धनबल और धोखेबाजी का दबदबा है। हम यह जानते हैं कि चुनाव से क्रांति नहीं आ सकती। लेकिन चुनाव हमें मौका देता है लोगों से मिलने के लिए, उनसे अलग-अलग मसलों पर चर्चा करने के लिए और लोगों के साथ अपने संपर्क को और अधिक गहरा और मजबूत करने के लिए। चुनावों में भाग लेना हमारे राजनीतिक कार्य का अहम हिस्सा है, जिससे हम लोगों की चेतना को आगे बढ़ा सकते हैं।

हुक्मरान वर्ग खुद मज़दूर वर्ग के हाथों में सत्ता देने वाला नहीं है। सरमायदार वर्ग से सत्ता छीनकर ही मज़दूर और किसान हुक्मरान बन सकते हैं। इस मकसद को हासिल करने के लिए हमें मज़दूर वर्ग और दबे-कुचले लोगों को लगातार संगठित करने का काम जारी रखना होगा। हमें क्रांति और समाजवाद के अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिये संघर्ष के हर मैदान में उतरना होगा। हमें मज़दूर वर्ग को संगठित करना होगा जिससे वह तमाम दबे-कुचले लोगों को हुक्मरान वर्ग से सत्ता छीनने में अगुवाई दे सके। हमें अपना क्रांतिकारी कार्य लगातार बिना किसी रूकावट के जारी रखना होगा।

सभा का समापन करते हुए कामरेड लाल सिंह ने क्रांति के लक्ष्य को अपनाकर उस दिशा में अथक काम कर रहे सभी साथियों को सलाम किया। उन्होंने इस बात पर अपना पूरा विश्वास जताया कि क्रांतिकारी लाइन पर सभी कम्युनिस्ट एकजुट होंगे और वह दिन जरूर आयेगा जब लाल किले पर लाल झंडा लहराएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *