गाड़ियों के कलपुर्जे बनाने वाली कंपनियों को “सार्वजनिक सेवा” का दर्ज़ा

हाल के महीनों में ऑटो स्पेयर पाट्र्स सप्लायर्स, जैसे कि प्रिकोल, असाहि, चैल, एम.एस.आई. और डोंगसन में मजदूरों ने बार-बार अपने अधिकारों के लिये विरोध प्रदर्शन और हड़तालें कीं। इन प्रदर्शनों और हड़तालों के मद्देनज़र तमिलनाडु सरकार ने ऑटो के कलपुर्जें बनाने वाली कंपनियों को ‘सार्वजनिक सेवा’ का दर्ज़ा देने वाली अधिसूचना जारी की। औद्योगिक विवाद अधिनियम में इस संशोधन के चलते, तमिलनाडु में ऑटो स्पेयर पाट्र्स के सप्लायरों को वही दर्जा हासिल हो गया है जो पानी, बिजली और सार्वजनिक परिवहन, इत्यादि जैसी मूलभूत सेवाओं पर लागू होता है।

इस अधिसूचना के लागू होने से, इन कंपनियों के मज़दूर लंबी अवधि के नोटिस के बिना हड़ताल नहीं कर पाएंगे। मज़दूरों को औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत सुलह प्रक्रिया को अनिवार्य रूप से स्वीकार करना होगा, जिसके बिना हड़ताल को गैरकानूनी माना जायेगा।

इससे पहले हुंडई, रीनॉल्ट, निसान, फोर्ड और अन्य गाड़ी निर्माताओं को इसी तरह का दर्ज़ा दिया गया था। विशेष आर्थिक क्षेत्र (एस.ई.जेड.) में स्थित कारखानों को भी इस तरह का दर्ज़ा हासिल है।

इस प्रतिगामी कदम का उन सभी लोगों को विरोध करना चाहिए जो मज़दूरों के हड़ताल करने के अधिकार को उनका बुनियादी अधिकार मानते हैं और उसका समर्थन करते हैं।

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