रेल के निजीकरण के ख़िलाफ़ दिल्ली में प्रदर्शन

10 जुलाई, 2019 को दिल्ली के विभिन्न इलाकों से आये मज़दूरों और रेलवे कर्मचारियों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर मोदी सरकार के ‘रेल निजीकरण’ के फैसले के खि़लाफ़ विरोध प्रदर्शन किया।

अपना दूसरा कार्यकाल शुरू करते ही मोदी सरकार ने देश की संपत्ति – भारतीय रेल को बेचने का ऐलान कर दिया है। सरकार ने ‘सौ दिन के एक्शन प्लान’ के साथ रेल के निजीकरण को पूरी ताक़त से लागू करने की शुरुआत कर दी है।

रेलवे में रिक्त पदों पर भर्ती, रेलवे अपरेंटिस की समस्याओं को हल करने, सातवें वेतन आयोग की अनियमितताओं को दूर करने, इत्यादि की मांगों को लेकर रेल कर्मचारी लंबे समय से अपना संघर्ष चलाते आये हैं। परंतु कर्मचारियों की मांगों को सुनने की जगह मोदी सरकार भारतीय रेल को बेचने की राह पर चल पड़ी है।

सरकार ने रेलवे की महत्वपूर्ण ट्रेनों का परिचालन भी निजी हाथों में देने का फैसला कर लिया है। इसके तहत, तेजस एक्सप्रेस का संचालन निजी हाथों में सौंपने का फैसला किया गया है।

धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि रेलवे का निजीकरण केवल रेल कर्मचारियों का नहीं बल्कि देश की सौ करोड़ जनता का मुद्दा है। रेल जनता की संपत्ति है और इसको निजी हाथों में नहीं बेचा जा सकता है। रेलवे की उत्पादन इकाइयों का पहले निगमीकरण और फिर निजीकरण करने की योजना सरकार तैयार कर चुकी है।

कोच फैक्टरियों का निगमीकरण कर, उन्हें बेचने की साजिश रेल कर्मचारियों को बिल्कुल मंजूर नहीं।

वक्ताओं ने एक आवाज़ से कहा कि हम निजीकरण के ख़िलाफ़ अपने संघर्ष को लगातार जारी रखेंगे।

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