मिड-डे मील के मज़दूरों का संघर्ष

22 जुलाई को आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा जिले के हजारों मिड-डे मील के मज़दूरों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने 8000 रुपये प्रतिमाह वेतन और बकाया वेतन के जल्दी भुगतान किए जाने की मांग की। इन मज़दूरों में ज्यादातर महिलाएं हैं जिन्हें वेतन का भुगतान होने में देरी के कारण, व्यक्तिगत कर्ज़ पर किराने का समान खरीदने, क्रेडिट कार्ड के भुगतान में देरी के कारण नुकसान उठाना पड़ा है।

इसके अलावा अन्य मांगों में अक्षय पात्र फाउंडेशन के साथ मिड-डे मील के अनुबंध को रद्द करना, प्रत्येक बच्चे के भोजन पर सरकारी खर्च में बढ़ोतरी करना और स्वयं सहायता समूह के रुके हुए बिलों का भुगतान करना शामिल है। अक्षय पात्र फाउंडेशन, इंटरनेशन सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉनशसनेस (इस्कान) ट्रस्ट द्वारा चलाई जाती है और जगमोहन रेड्डी सरकार ने इस गैर-सरकारी संस्थान को 100 करोड़ रुपये केंद्रीकृत रसोई के निर्माण के लिए और भोजन योजना के लिए भोजन की आपूर्ति के लिए आवंटित किए।

प्रदर्षन करने वाले मिड-डे मील के मज़दूरों को इस तरह के केंद्रीकृत रसोई के कारण अपना रोज़गार खो जाने का डर है। उन्होंने भोजन के ताजा न होने पर भी चिंता जताई है क्योंकि रसोई स्कूल से दूर है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के लिए रोज़गार का एक मुख्य स्रोत है।

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