लोगों की एकता ने निजीकरण मुहिम को रोका!

महोदय, आपने पिछले अंकों में ठाणे जिले के कलवा, मुम्ब्रा तथा दीवा इलाकों में बिजली वितरण के निजीकरण के कड़े विरोध की कई रिपोर्ट प्रकाशित कीं। महाराष्ट्र सरकार ने टौरेंट पॉवर को जनवरी 2019 में बिजली वितरण सौंपने की घोषणा की थी। मुझे आपको यह सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि हम अभी तक महाराष्ट्र सरकार के निजीकरण को रोकने में सफल हुए हैं।

महोदय,

आपने पिछले अंकों में ठाणे जिले के कलवा, मुम्ब्रा तथा दीवा इलाकों में बिजली वितरण के निजीकरण के कड़े विरोध की कई रिपोर्ट प्रकाशित कीं। महाराष्ट्र सरकार ने टौरेंट पॉवर को जनवरी 2019 में बिजली वितरण सौंपने की घोषणा की थी। मुझे आपको यह सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि हम अभी तक महाराष्ट्र सरकार के निजीकरण को रोकने में सफल हुए हैं।

इस पत्र के माध्यम से मैं इस संघर्ष की कुछ विशेषताओं की ओर ध्यान दिलाना चाहूंगा। इन स्थानों पर, महाराष्ट्र राज्य बिजली वितरण कंपनी के मज़दूर ही नहीं बल्कि हजारों उपभोक्ता भी निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। सरकार की योजना की जैसे ही सूचना मिली, लोक राज संगठन, टौरेंट हटाओ कृति समिति, आग्री समाज प्रतिष्ठान, आग्री युवक संगठन जैसे अनेक संगठनों के साथ-साथ बिजली मज़दूरों की यूनियनों ने तुरंत विरोध अभियान आरंभ कर दिया। हजारों पर्चे वितरित किये गए तथा दर्जनों नागरिक सभाएं की गयीं। निजीकरण को उचित सिद्ध करने के लिए सरकार के झूठे प्रचार का अच्छी तरह से पर्दाफाश किया गया। नागरिकों को बिजली मज़दूरों के खिलाफ़ उकसाने के सरकार के प्रयासों को हराया गया। जन चेतना अभियान के फलस्वरूप बिजली मज़दूरों तथा नागरिकों ने हाथ मिलाए। अनेक प्रदर्शन आयोजित किये गए। शील फाटा के अनेक युवक 6 दिनों के लिए भूख हड़ताल पर बैठे। जब टौरेंट के अधिकारियों ने अपने ऑफिस के लिए स्थान किराये पर लेने की कोशिश की तो उन्हें लोगों का क्रोध देखकर भागना पड़ा। इन सभी गतिविधियों ने विभिन्न पार्टियों से जुड़े विधायकों तथा सांसदों पर बहुत दबाव डाला। सम्बंधित राज्य मंत्री को यह ऐलान करने के लिए मजबूर होना पड़ा कि कोई भी अगला कदम उठाने से पहले सरकार नागरिकों के साथ विचार विमर्श करेगी।

नागरिकों तथा मज़दूरों की एकता ने निजीकरण को 8 महिनों तक रोके रखा। हमें मालुम है कि हमारा संघर्ष सरल नहीं है और हमें सचेत रहना होगा। अब तक की हमारी सफलता ने निजीकरण का विरोध करने वाले सभी लोगों को एक बहुत महत्वपूर्ण सबक सिखाया है। सार्वजनिक सेवाओं के उपभोक्ता तथा सार्वजनिक क्षेत्र की इकाईओं के मज़दूर अगर एकजुट हो जाते हैं तो वे निजीकरण को रोक सकते हैं।

सादर,

राजू गाडगिल, कलवा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *