उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय

छात्रों ने फीस की वृद्धि का विरोध किया

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के साथ जुड़े हुए 16 मेडिकल कालेजों के छात्र अक्तूबर की शुरुआत से उत्तराखंड राज्य की राजधानी, देहरादून में धरने पर बैठे हैं। वे विश्वविद्यालय के अधिकारियों द्वारा उन पर थोपी गयी फीस की भारी वृद्धि को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

Uttarakhand students protestआंदोलित छात्रों का कहना है कि 2014-15 तक फीस प्रति वर्ष 80,000 रु. हुआ करती थी, परन्तु 2015-16 में फीस बढ़ा कर 2.15 लाख रु. कर दी गयी। यह सरकार द्वारा नियुक्त फीस निर्धारण करने वाली कमेटी के नियमों का सरासर उल्लंघन था। उसके ऊपर, कालेजों ने और खर्च जोड़ दिए, जैसे कि डेवलपमेंट चार्ज, लाइब्रेरी फीस, इत्यादि, जिसके कारण कुल फीस लगभग 3 लाख रु. हो गयी। छात्रों ने यह शिकायत की है कि “कई निजी आयुर्वेद कालेजों के मालिक राज्य सरकार में मंत्री हैं। राज्य सरकार और इन कालेजों के प्रशासनों के बीच पूरी मिलीभगत है। इन कालेजों ने उपस्नातक पाठ्यक्रमों की फीस 3-4 गुना बढ़ा दी है”।

फीस वृद्धि को वापस लेने की मांग को लेकर सैकड़ों छात्र उच्च अदालत पहुंचे। 9 अक्तूबर, 2018 को उत्तराखंड उच्च अदालत ने सभी निजी आयुर्वेद मेडिकल कालेजों को आदेश जारी किया कि छात्रों से ली गयी अतिरिक्त फीस उन्हें वापस कर दी जाये। परन्तु आज तक कालेजों ने उस आदेश का पालन नहीं किया है। इसीलिये छात्रों को अपनी पढ़ाई छोड़कर, धरने पर बैठने के लिये मजबूर होना पड़ा है।

इस बीच, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के उप कुलपति ने इन 16 दोषी मेडिकल कालेजों को धमकी दी है कि अगर वे फौरन उच्च अदालत के आदेश का पालन नहीं करते तो विश्वविद्यालय के साथ उनका संबंध काट दिया जायेगा। यह सुनकर, छात्रों की, अपने भविष्य के बारे में चिंता और ज्यादा बढ़ गयी है।

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