जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय

छात्रों ने हॉस्टल फीस की वृद्धि का विरोध किया

नयी दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जे.एन.यू.) के छात्र 28 अक्तूबर, 2019 से हड़ताल पर हैं। हाल में विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने हॉस्टल फीस में भारी वृद्धि तथा छात्रों पर कई और पाबंदियों को लागू करने का प्रस्ताव किया है, जिसका छात्र विरोध कर रहे हैं।

JNU Students protest against fee hike28 अक्तूबर को जे.एन.यू. के 18 होस्टलों का प्रबंधन करने वाले इंटर हॉस्टल प्रशासन ने एक सभा बुलाकर, एक नया हॉस्टल मैन्युअल पेश किया, जिसमें हॉस्टल नियमों में कई तब्दीलियां की गयी हैं और हॉस्टल फीस को भी बहुत बढ़ा दिया गया है। जे.एन.यू. छात्र संघ को उस सभा में नहीं बुलाया गया था, न ही मैन्युअल को पेश करने से पहले छात्रों के प्रतिनिधियों से कोई सलाह की गयी थी।

नए हॉस्टल मैन्युअल के अनुसार, छात्रों को प्रति माह 1,700 रुपये सर्विस चार्ज देने होंगे, जो पहले नहीं देने होते थे। सिंगल रूम का किराया प्रति माह 20 रुपयें से बढ़ाकर 600 रुपये कर दिया गया है, जबकि डबल रूम का किराया प्रति माह 10 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये कर दिया गया है। मेस सिक्यूरिटी फीस, जो रिफंडेबल है को 5,500 रुपये से बढ़ाकर 12,000 रुपये कर दिया गया है। मैन्युअल में हॉस्टल में रहने वाले छात्रों पर कई और पाबंदियां लगाई गयी हैं, जिनका उल्लंघन करने पर 10,000 रुपये का जुर्माना होगा।

छात्र यह मांग कर रहे हैं कि अधिकारी इन नए नियमों को वापस लें। वे अनुरोध कर रहे हैं कि नए नियमों को बनाने से पहले छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ सलाह की जाये ताकि छात्रों की समस्याओं को ध्यान में रखा जा सके। आंदोलित छात्र 28 अक्तूबर से कैंपस में जगह-जगह पर प्रदर्शन कर रहे हैं। वे इस बात पर ज़ोर डाल रहे हैं कि जे.एन.यू. में देश के दूर-दराज के इलाकों व ग्रामीण क्षेत्रों से बहुत से छात्र, बेहद ग़रीबी तथा जाति व लिंग पर आधारित भेदभाव से जूझते हुए, कड़ी मेहनत करके, दाखिला पाते हैं, इस उम्मीद के साथ कि आगे चलकर, अपने व अपने परिजनों के लिए बेहतर ज़िंदगी बना सकेंगे। हॉस्टल फीस की वृद्धि से उनके सपने चूर-चूर हो जायेंगे। जे.एन.यू. छात्र संघ, जो संघर्ष को अगुवाई दे रहा है, ने उप कुलपति जगदीश कुमार के साथ बातचीत करने के लिए एक बैठक की मांग की है, परन्तु उप कुलपति ने बार-बार छात्र संघ से मिलने से इनकार कर दिया है।

11 नवम्बर को सैकड़ों छात्रों ने जे.एन.यू. के तीसरे कन्वोकेशन के सभागृह, ए.आई.सी.टी.ई. कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया। उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू और केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल वहां मुख्य अतिथि थे। पुलिस ने छात्रों के प्रदर्शन को तितर-बितर करने के लिए, लाठी चार्ज किया और पानी की बौछारें मारीं। अनेक छात्रों को गिरफ़्तार किया गया। सभागृह के अन्दर से कई छात्र, अपनी डिग्रियां प्राप्त करने के बाद, बाहर आकर छात्रों का समर्थन करते हुए, प्रदर्शन में शामिल हो गए। अंत में मानव संसाधन विकास मंत्री को आंदोलित छात्रों से मुलाकात करने को मजबूर होना पड़ा और यह कहना पड़ा कि उनकी मांगों पर “ध्यान दिया जायेगा”।

आंदोलित छात्रों ने 11 नवम्बर को एक बयान जारी किया, जिसमें निहत्थे छात्रों पर बेरहम पुलिस हमले की कड़ी निंदा की गयी। छात्रों से मिलने से इनकार करने के लिए उप कुलपति की निंदा की गयी। छात्रों की मांगों को पूरा न करने व हॉस्टल फीस की वृद्धि तथा नए नियमों को वापस न लेने के लिए जे.एन.यू. प्रशासन की निंदा की गयी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय और जे.एन.यू. प्रशासन से छात्रों के साथ फौरन बातचीत करने की मांग की गयी। यह बताया गया कि समाज के वंचित तबकों से आये तमाम छात्रों के उच्च शिक्षा पाने के सपने अधूरे रह जायेंगे, अगर हॉस्टल फीस में यह वृद्धि की जाती है। इतने सारे छात्र कन्वोकेशन में डिग्री प्राप्त करके, बाहर आकर आन्दोलन में शामिल हो गए – इससे दिखता है कि इस विश्वविद्यालय में जहां बड़ी संख्या में ग़रीब तबकों के छात्र आते हैं, आन्दोलन को अधिकतम छात्रों का समर्थन प्राप्त है।

जे.एन.यू. छात्र संघ ने घोषणा की है कि 13 नवंबर को जब इन नए नियमों को आधिकारिक तौर पर जारी करने के लिए प्रशासन की कार्यकारिणी परिषद (ई.सी.) की बैठक होगी, तब वहां भी विरोध प्रदर्शन करेंगे।

देशभर के अनेक विश्वविद्यालयों के छात्रों ने इस आन्दोलन का समर्थन किया है। एफ.टी.आई.आई. पुणे और बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के छात्रों ने जे.एन.यू. के समर्थन में अपनी तरफ से विरोध प्रदर्शन किये। दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर के छात्रों ने आंदोलित छात्रों पर पुलिस हमले की निंदा करते हुए एक बयान जारी किया। आंबेडकर विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी जे.एन.यू. के छात्रों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन किये।

जे.एन.यू. के छात्रों का संघर्ष पूरी तरह जायज़ है। हिन्दोस्तानी राज्य हमारे अधिकतम नौजवानों को कम दाम पर अच्छी शिक्षा मुहैया कराने की अपनी ज़िम्मेदारी से पीछे हटता जा रहा है, जिसके खि़लाफ़ देशभर के छात्र और नौजवान संघर्ष कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *