उत्तर प्रदेश शासन के राजकीय आतंक की कड़ी निंदा करें!

12 दिसम्बर, 2019 को जब से केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम को पारित किया है पूरे उत्तर प्रदेश में इसके खि़लाफ़ लोगों का आक्रोश फूट पड़ा है। लोग सड़कों पर उतरकर इसका शांतिपूर्वक विरोध करने लगे हैं और सरकार से मांग करने लगे हैं कि इस सरासर प्रतिगामी, सांप्रदायिक और विभाजनकारी अधिनियम को तुरंत वापस लिया जाये। लेकिन लोगों की आवाज़ को सुनने की बजाय राज्य ने उनपर आतंक का अभियान छेड़ दिया है।

UPएक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि “हम उनके कपड़ों से ही समझ सकते हैं कि सी.ए.ए. का कौन विरोध कर रहे हैं!” यह सीधे तौर से एक समुदाय – मुसलमान लोगों की ओर इशारा था। इसके बावजूद अधिनियम के खि़लाफ़ विरोध बढ़ता ही गया है और न केवल मुसलमान लोग बल्कि तमाम समुदायों के लोगों ने इस अधिनियम का ज़ोरदार विरोध करना शुरू कर दिया है और उत्तर प्रदेश के सभी छोटे-बड़े शहरों और कस्बों में फैल गया है।

उत्तर प्रदेश शासन ने विरोध को कुचलने के लिए पूरे ज़ोर से राजकीय आतंक छेड़ दिया है। राज्य के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने पुलिस को आदेश दिए हैं कि हर क़ीमत पर इस विरोध की कुचला जाये, चाहे उसके लिए कोई भी तरीके क्यों न इस्तेमाल करने पड़ें। 15 दिसंबर को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों पर राज्य ने बर्बर हमला किया और कई छात्रों को गिरफ़्तार किया। सैकड़ों राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और लोगों को विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए गिरफ़्तार किया गया है, कई जाने-माने लोगों को गैरकानूनी तरीके से अपने ही घरों में कैद कर दिया गया है, गोलीबार में कई लोगों की मौत हो गयी है, लोगों के घरों में घुसकर तोड़फोड़ और हिंसा की गयी है और यहां तक कि बच्चों को जेल में डालकर सताया गया है। राज्य के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने विरोध के दौरान “सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान” का “बदला” लेने की धमकी दी है और उसकी भरपाई विरोध प्रदर्शन करने वालों से करने के भी आदेश दिए हैं। कई लोगों को भरपाई के नोटिस जारी किये गए हैं। यह आतंक न केवल विरोध प्रदर्शन करने वालों तक सीमित है, बल्कि वे सभी लोग उसके शिकार बन गए हैं, जिनका इन विरोध प्रदर्शनों से कोई वास्ता नहीं, जो अपनी रोजमर्रा के काम में व्यस्त हैं।

मुख्यमंत्री ने राज्य की इन तमाम करतूतों और राजकीय आतंक की तारीफ करते हुए ऐलान किया कि “यह विरोध प्रदर्शन को कुचलने का सबसे बढ़िया तरीका है। इस तरीके से सभी की जुबान बंद कर दी गयी है”।

सूत्रों से पता चला है कि राज्य के प्रशासन और पुलिस अधिकारियों – जिला कलेक्टर, और पुलिस अधीक्षकों को आदेश दिये गए हैं कि यदि उनके जनपदों में विरोध प्रदर्शन हुए तो उनकी नौकरी ख़तरे में पड़ जाएगी।

जिस किसी राज्य में भाजपा का शासन है – असम, कर्नाटक (मंगलूर), वहां सी.ए.ए. और एन.आर.सी. के खि़लाफ़ विरोध को कुचलने के लिए पूरी ताक़त के साथ राजकीय आतंक का इस्तेमाल किया जा रहा है।

कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अधिनियम के विरोध को राजकीय आतंक के ज़रिये कुचलने की कड़ी निंदा करती है और मांग करती है कि इस कानून को तुरंत वापस लिया जाये और गिरफ़्तार किये गए लोगों को तुरंत रिहा किया जाये। लोगों के शांतिपूर्ण विरोध का जवाब राजकीय आतंक से दिया जाये, इसे कभी भी मंजूर नहीं किया जा सकता।

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