विश्वविद्यालय के छात्रों के ख़िलाफ़ बर्बर पुलिस हमले की निंदा करें!

सांप्रदायिक और विभाजनकारी नागरिकता संशोधन अधिनियम को निरस्त करने की मांग करें!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी का बयान, 17 दिसंबर 2019

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय (दिल्ली), अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और देशभर के अन्य विश्वविद्यालय कैंपस के छात्रों पर पुलिस द्वारा किये गए बर्बर हमले की कड़ी निंदा करती है। यह छात्र नागरिकता संशोधन अधिनियम के ख़िलाफ़ शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे हैं, जिसे नरेंद्र मोदी सरकार ने 11 दिसंबर को देशभर में लोगों के व्यापक विरोध के बावजूद पारित किया है।

15 दिसंबर को जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्र जब अपने कैंपस के गेट पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, उस समय पुलिस विश्वविद्यालय प्रशासन की इजाज़त के बगैर जबरदस्ती से कैंपस में घुस गयी। पुलिस ने छात्रों पर आंसू गैस गोलों से हमला किया। वह छात्रों के हॉस्टल के अन्दर घुस गए और छात्रों पर लाठियों से बर्बर हमला किया और विश्वविद्यालय की संपत्ति की तोड़-फोड़ की। पुलिस ने महिला छात्रों पर भी हमला किया, उनका शारीरिक उत्पीड़न किया, और उन्हें आतंकित और अपमानित किया। कई छात्रों को गंभीर चोटें आई और उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। कई छात्रों को पुलिस ने गिरफ्तार किया और उन्हें पुलिस लॉक-अप में भेज दिया। विश्वविद्यालय स्टाफ ने जब छात्रों की सहायता करने की कोशिश की तो उनको भी बेरहमी के साथ लाठियों से मारा गया। जिन छात्रों ने कैंपस के अन्दर मस्जिद में पनाह ली, उनपर भी हमला किया गया और मस्जिद में भी तोड़-फोड़ की गयी। यहाँ तक कि मस्जिद के इमाम को भी नहीं बक्शा गया।

जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के उप-कुलपति और मुख्य प्रॉक्टर ने पुलिस हमले की निंदा की है।

केंद्र सरकार और पुलिस झूठा प्रचार फैला रहे है कि सडकों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने हिंसा शुरू की। इस बात के कई सबूत है कि पुलिस ने बसों में आग लगाने के लिए गूंडों को संगठित किया, जिससे छात्रों के जायज़ विरोध को बदनाम किया जा सके और उनके खिलाफ हिंसा को सही करार दिया जा सके।

छात्रों पर बर्बर हमला करके और उनके संघर्ष को बदनाम करके, केंद्र सरकार नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ तमाम प्रतिरोध को बर्बर ताकत के बल पर कुचलने की कोशिश कर रही है।

हिंसा के शिकार छात्रों की सहायता करने के लिए समाज के सभी तबकों और समुदायों के लोग आगे आये, उनको अपने घरों में पनाह दी, प्रथम चकित्सा (फर्स्ट ऐड) की, ज़ख्मी छात्रों को अस्पताल ले गए, और गिरफ्तार छात्रों को पुलिस की हिरासत से छुडाने के लिए कानूनी सहायता दी। दिल्ली विश्वविद्यालय, आई.आई.टी. दिल्ली और जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के छात्र जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्रों के समर्थन में खुलकर सामने आये। 15 दिसंबर की रात को दिल्ली और आस-पास के विश्वविद्यालयों के हजारों छात्रों सहित विभिन्न राजनितिक पार्टियों और जन-संगठनों के कार्यकर्ता पुलिस द्वारा छात्रों पर की गई बर्बरता की निंदा करने के लिए पुलिस मुख्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन में इकठ्ठा हो गए। इसके अलावा आई.आई.टी. मुंबई, हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के छात्रों ने अपने कैंपस में विरोध प्रदर्शन आयोजित किये। कानून की तालीम देने वाली देश भर की सभी लॉ युनिवेर्सिटियों के छात्रों ने पुलिस द्वारा किये गए बर्बर हमलों की निंदा की।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्रों और उन सभी लोगों के समर्थन में खड़ी है जिनपर इस सरासर सांप्रदायिक और विभाजनकारी नागरिकता संशोधन अधिनियम को तुरंत निरस्त करने की मांग करने की वजह से हमला किया गया है।

नागरिकता संशोधन अधिनियम हमारे लोगों की एकता और एकजुटता पर एक वहशी हमला है। यह कानून पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से हिन्दोस्तान में 31 दिसंबर 2014 से पहले आये हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी, और ईसाई लोगों को हिन्दोस्तान की नागरिकता का अधिकार देने का वादा करता है। लेकिन मुसलमान लोगों को इस अधिकार से वंचित करता है। यह कानून नागरिकता देने के मसले पर मुसलमान और गैर-मुसलमान लोगों के बीच सरेआम भेदभाव करता है। यह हमारे देश के सभी लोगों पर हमला है।

नागरिकता संशोधन अधिनियम के साथ नागरिकों की राष्ट्रीय पंजी (एन.आर.सी.) जिसे पूरे देश लागू किया जाना है, इसका मकसद मुसलमान समुदाय को निशाना बनाना और लोगों की एकता को चकनाचूर करना है। एन.आर.सी. का मकसद “घुसपैठियों” की पहचान करना है – यानि ऐसे लोग जिनके पास खुद को हिन्दोस्तान का नागरिक साबित करने के लिए दस्तावेज नहीं है। यह एक हकीकत है कि बहुत बड़े पैमाने पर देश में गरीब लोगों के पास ऐसे दस्तावेज नहीं है। खबरों के अनुसार मुंबई, अलीगढ़, लखनऊ, बंगलुरु, यवतमाल, कोच्ची, औरंगाबाद, गोवा, मुज़फरनगर, कानपूर, अमरावती, मल्लापुरम, सूरत, देओबंद, कोज्हिकोड़े, आज़मगढ़, गुलबर्गा, भोपाल, सोलापुर, नागपुर, हैदराबाद, अररिया, प्रतापगढ़, जौनपुर, सहित देश के कई अन्य शहरों में नागरिकता संशोधन अधिनियम के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन आयोजित किये गए है।

हिन्दोस्तान हमेशा से ही उन सभी लोगों का देश रहा है जो यहाँ आकर बस गए है, और इसे अपना घर बना लिया है। वह भले ही किसी भी धर्म में आस्था रखते हो, और चाहे कोई भी भाषा बोलते हो। यह उन सभी लोगों का घर है, जो इस उप-महाद्वीप के निवासी है।

इस बात को कभी भी स्वीकार नहीं किया जा सकता कि जो लोग पीढ़ियों से हिन्दोस्तान में बसे हुए है, उन्हें अचानक गैर-नागरिक घोषित कर दिया जाये, उनको गुनाहगार घोषित कर दिया जाये, उनके मानव अधिकार छीन लिए जाए, उनके साथ ऐसे बर्ताव किया जाये जैसे कि उनका कोई देश ही न हो, और बंदीगृहों में जीने के लिए मजबूर कर दिया जाये, जैसे की सरकार कर रही है। इस बात को हरगिज़ स्वीकार नहीं किया जा सकता कि लोगों को धर्म के आधार पर नागरिकता का अधिकार दिया जाये या फिर उनसे उन्हें इससे वंचित किया जाये।

नागरिकता संशोधन अधिनियम और प्रस्तावित नागरिकों की राष्ट्रीय पंजी (एन.आर.सी.) दोनों ही पूरी तरह से प्रतिगामी, सांप्रदायिक और विभाजनकारी है, और इसका मकसद लोगों की एकता को चकनाचूर करना है।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी हिन्दोस्तान के सभी लोगों को, वह चाहे किसी भी धर्म में आस्था रखते हो, यह आहवान करती है कि वह सरकार से नागरिकता संशोधन अधिनियम को तुरंत निरस्त करने की मांग करें।

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