दिल्ली में राज्य द्वारा आयोजित हिंसा की मुहिम की कड़ी निंदा करें!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 26 फरवरी, 2020

24 फरवरी से पूर्वी दिल्ली में पेट्रोल बमों, पिस्तौलें, लाठियों, पत्थरों, तलवारों आदि से लैस गुंडे खुलेआम घूम रहे हैं और भयानक हिंसा व अराजकता फैला रहे हैं।

उन्होंने मस्जिदों और कब्रिस्तानों पर हमला किया है और तोड़-फोड़ किया है। उन्होंने घरों, दुकानों और कारोबारों को निशाना बनाकर, बड़े पैमाने पर आगजनी और लूट-पाट की है।

जो मंजर सामने आ रहा है, वह साफ-साफ राज्य द्वारा आयोजित, लोगों पर चलायी गयी आतंक की मुहिम है। सालों-सालों से अपने अधिकारों के लिए मिलकर संघर्ष करने के दौरान हम सभी अलग-अलग मजहबों के लोगों ने जो आपसी एकता बनाई है, इस एकता को चकनाचूर करना ही राज्य का मक़सद है। सी.ए.ए., एन.आर.सी. और एन.पी.आर. के खि़लाफ़ सभी समुदायों की महिलाओं और पुरुषों के इस एकजुट संघर्ष को तोड़ना ही राज्य का इरादा है।

Against delhi violenceजाफराबाद मेट्रो स्टेशन के निकट पर जहां लोग सी.ए.ए., एन.आर.सी. और एन.पी.आर. के खि़लाफ़ शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन कर रहे थे, वहां 23 फरवरी को ऐसा हमला आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों, जिनमें अधिकतम महिलाएं थीं,  पर गुंडों ने पत्थरबाजी की और कई लोग घायल हो गए। उसी दिन एक जाने-माने भाजपा नेता ने और हिंसा फैलाने की धमकी देते हुए एक भड़काऊ बयान दिया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। बयान में उन्होंने दिल्ली पुलिस को सी.ए.ए. के खि़लाफ़ धरना-प्रदर्शन करने वालों को फौरन बलपूर्वक हटाने का आदेश दिया।

उसके अगले दिन, मुसलमान समुदाय के लोगों को निशाना बनाते हुए, बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा शुरू की गयी। प्रभावित बस्तियों के लोगों ने बताया है कि कातिलाना गुंडे बाहर से आये हुए लोग थे जो सांप्रदायिक नारेबाजी कर रहे थे और खुलेआम लूट-पाट व आगजनी कर रहे थे। हिंसा की ख़बर लेने गए हुए पत्रकारों पर बेरहमी से हमले किये गए। पुलिस ऐसे मूक दर्शक बनी रही, जैसे कि मानो उन्हें ऊपर से आदेश मिला हुआ हो कि गुंडों पर कोई कार्यवाही न करें और पीड़ितों की कोई मदद न करें। इस भयानक हालत में, जब लोगों के परिजनों, घरों और कारोबारों को निशाना बनाया जा रहा था, तो लोग खुद अपनी हिफाज़त करने के लिए संगठित होने लगे। कई घटनाएं सामने आयी हैं जिनमें लोग मजहब की परवाह किये बिना, एक-दूसरे की हिफ़ाज़त करने के लिए एक साथ खड़े हुए हैं। कई जगहों पर लोगों ने अपराधी और सांप्रदायिक कातिलाना गुंडों को रोकने के लिए एक साथ लड़ाई की है। गुरुद्वारों ने हिंसा पीड़ितों के लिए अपने दरवाज़े खोल दिए हैं। डाक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी जान को हथेली पर रखकर, पीड़ितों को मदद पहुंचाई और उनकी सेवा की है व कर रहे हैं।

सूचनाओं के अनुसार, इस हिंसा में अब तक कम से कम 27 लोग मारे गए हैं और सैकड़ों लोग बुरी तरह घायल हुए हैं। कई जगहों पर बुरी तरह घायल लोगों को उनके घरों या पड़ोस के छोटे-मोटे अस्पतालों में इंतज़ार करना पड़ रहा है, क्योंकि उनके परिजन कातिलाना गुंडों के हमलों के डर से, उन्हें सरकारी अस्पतालों तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं।

दिल्ली में जो हो रहा है, यह वहशी राजकीय आतंकवाद के अलावा कुछ और नहीं है, जिसका निशाना लोग, और खास तौर पर मुसलमान समुदाय के लोग हैं।

राज्य, इजारेदार पूंजीवादी मीडिया के ज़रिये, यह झूठा प्रचार फैला रहा है कि ये दो मजहबों के समुदायों के बीच “सांप्रदायिक दंगे” हैं। हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी इस झूठे प्रचार का खंडन करती है।

ये दो समुदायों के बीच सांप्रदायिक दंगे नहीं हैं! हिन्दू और मुसलमान लोग आपस में नहीं लड़ रहे हैं। बल्कि, सभी मजहबों के लोग एकजुट होकर यह मांग कर रहे हैं कि राज्य लोगों को मजहब के आधार पर बांटना बंद करे। इन खौफ की घड़ियों में, सभी मजहबों के लोग एक साथ डटकर खड़े हैं।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी सभी दिल्ली वासियों को आह्वान करती है कि मजहब के आधार पर हमें बांटने और हमारे अधिकारों के संघर्ष को ख़त्म करने की राज्य की इन नापाक कोशिशों का मुंहतोड़ जवाब दें।

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