हिन्दोस्तान और अमरीका के बीच रणनैतिक गठबंधन का विरोध करें

अमरीका के राष्ट्रपति, डोनल्ड ट्रम्प ने 24-25 फरवरी, 2020 को हिन्दोस्तान का दौरा किया।

यह दौरा दिखाता है कि हिन्दोस्तानी इजारेदार पूंजीपति और अमरीकी इजारेदार पूंजीपति हिन्द-अमरीकी संबंधों को मजबूत करना कितना महत्वपूर्ण समझते हैं।

इस दौरे में दोनों देशों ने अपने बीच सैनिक रणनैतिक गठबंधन को मजबूत करने पर मुख्य ज़ोर दिया।

Poster against american war mongeringअमरीकी राष्ट्रपति ने विजयी अंदाज़ में घोषणा की कि हिन्दोस्तान तीन अरब डॉलर के अमरीका में बने हुये बहुत परिष्कृत हैलीकॉप्टर खरीद रहा है। ट्रम्प ने ज़ोर दिया कि अमरीका के पास दुनिया के सबसे शक्तिशाली सशस्त्र बल हैं और हिन्दोस्तान के लिये अच्छा होगा कि वह अपने सारे सैनिक उपकरण अमरीका से खरीदे।

राष्ट्रपति ट्रम्प और प्रधानमंत्री मोदी ने एक दूसरे से वादा किया कि वे जल, थल और वायु सैनिक सहयोग को और भी मजबूत करेंगे। अमरीका का सैन्य औद्योगिक कॉम्प्लेक्स और हिन्दोस्तान के इजारेदार पूंजीपति सबसे नये रक्षा पुर्जों और उपकरणों के उत्पादन में सहयोग करेंगे। हिन्दोस्तान ने माना कि वह जल्द ही बेसिक एक्सचेंज एण्ड कॉओपरेशन एग्रीमेंट (बी.इ.सी.ए.) समझौते पर दस्तख़त करेगा। पहले ही लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एल.इ.एम.ओ.ए.) और कम्युनिकेशन्स कम्पेटिबिलिटी एण्ड सिक्योरिटी एग्रीमेंट (सी.ओ.एम.सी.ए.एस.ए.) समझौते किये जा चुके हैं। सी.ओ.एम.सी.ए.एस.ए. यह सुनिश्चित करता है कि हिन्दोस्तानी सशस्त्र बलों का संचार नेटवर्क अमरीका के संचार नेटवर्क से जुड़ा हो। एल.ई.एम.ओ.ए. हिन्दोस्तानी सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल अमरीकी सैनिकों को उपलब्ध कराता है। एक बार दोनों देश बी.ई.सी.ए. पर दस्तख़त कर देते हैं तो वे एक दूसरे से सैन्य जानकारी सांझा कर सकते हैं। इससे दोनों देशों के क्रूज़ व प्रक्षेपक मिसाइल और ड्रोन जैसी स्वचलित प्रणालियों व हथियारों का अधिक सूक्ष्मता से प्रयोग करना संभव हो जायेगा। अमरीका मांग कर रहा है कि हिन्दोस्तान बी.ई.सी.ए. पर दस्तख़त करे। इसके बाद ही वह अमरीका से सबसे परिष्कृत हथियार व संचार उपकरण खरीद सकेगा।

एशिया और पूरे विश्व पर अपना वर्चस्व जमाने में अमरीका चीन को सबसे बड़ी बाधा समझता है। अपने खुद के बाज़ार और प्रभाव क्षेत्र को पूरे एशिया और दुनिया में फैलाने की ख्वाइश पूरी करने के लिये हिन्दोस्तानी शासक वर्ग भी चीन को अपने मुख्य प्रतिस्पर्धी बतौर देखता है। अमरीकी साम्राज्यवादी और हिन्दोस्तानी इजारेदार पूंजीपति, दोनों का सांझा लक्ष्य चीन की घेराबंदी है, ताकि चीन को आगे बढ़ने से रोका जा सके। अमरीका व हिन्दोस्तान के बीच बढ़ते रणनैतिक गठबंधन का यह एक महत्वपूर्ण कारक है।

अपने संयुक्त बयान में दोनों देशों ने हिन्द महासागर और प्रशांत महासागर क्षेत्र में वर्चस्व जमाने के लिये, जापान के साथ त्रिपक्षीय और जापान व ऑस्ट्रेलिया के साथ चतुर्भुजी (क्यू.यू.ए.डी.) संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दिखाई।

दौरे से यह तथ्य साफ नज़र आया कि अमरीकी साम्राज्यवादी दुनियाभर में मुसलमानों व मुसलमान देशों के खि़लाफ़ अभियान में हिन्दोस्तान को एक भरोसेमंद मित्र के जैसे देखते हैं। यह सभी को पता है कि अपने रणनैतिक हितों को आगे करने के लिये, अमरीकी साम्राज्यवाद ने पाकिस्तान व अन्य देशों में अनेक आतंकवादी गुट स्थापित किये हैं। “इस्लामिक आतंकवाद के खि़लाफ़ जंग” के नाम पर अमरीकी साम्राज्यवादियों ने उन देशों पर हमले किये हैं जो अमरीकी आधिपत्य के सामने घुटने टेकने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कई देशों को बरबाद करने का काम किया है। ट्रम्प ने बार-बार यह झूठ बोला है कि “रूढ़ीवादी इस्लामिक आतंकवाद” ही मानवता का दुश्मन है।

इस दौरे ने दिखा दिया है कि दोनों देशों के सरमायदारों के बीच मतभेद अवश्य हैं, लेकिन दोनों इन्हें परे रखकर रणनैतिक सहमति को मजबूत करने के इच्छुक हैं। अमरीका और हिन्दोस्तान, दोनों ने आयात शुल्कों पर मतभेदों को सुलझाने पर सहमति जताई ताकि आने वाले दिनों में एक समग्र व्यापार समझौता किया जा सके।

एक समझौते पर हस्ताक्षर किये गये हैं जिसके तहत राज्य की मालिकी वाला इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन अमरीकी एक्स्सोन मोबिल कंपनी से शेल से निकाला तेल खरीदेगा। जो देश ईरान से तेल खरीदते हैं, उन पर अमरीका द्वारा प्रतिबंध लगाये जाने के बाद हिन्दोस्तान ने ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया है। दूसरी तरफ, अमरीका ने हिन्दोस्तान को इज़ाज़त दे दी है कि वह ईरान में चाबहार बंदरगाह के निर्माण के लिये काम कर सकता है।

अमरीका व हिन्दोस्तान के बीच बढ़ता सैन्य गठबंधन अपने देश के लोगों के हित में नहीं है और न ही यह एशिया के लोगों के हित में है। अमरीका हिन्दोस्तान को और हिन्दोस्तानी लोगों का इस्तेमाल दूसरे लोगों पर आधिपत्य जमाने के लिये अपनी नाजायज़ जंगों में करना चाहता है। अमरीका हिन्दोस्तान का इस्तेमाल चीन, पाकिस्तान व सभी इस्लामिक देशों के खि़लाफ़ करना चाहता है। हिन्दोस्तानी शासक वर्ग अमरीका के साथ गठबंधन बनाकर अपने लिये दूसरे बाज़ारों व प्रभाव क्षेत्रों को बढ़ाने की संभावनाओं से खुश हो रहे हैं। वे बहुत ही ख़तरनाक रास्ते पर चल रहे हैं। अपने देश के मज़दूर वर्ग व लोगों को, उन सभी को जो इस क्षेत्र में शांति चाहते हैं, हम सबको हिन्द-अमरीकी रणनैतिक सैन्य गठबंधन का विरोध करना चाहिये। यह हिन्दोस्तान के हित में नहीं है।

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