अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने के लिए दिल्ली में जोशपूर्ण रैली

8 मार्च, 2020 को करीब 20 संगठनों की महिला कार्यकर्ताओं के साथ अन्य कार्यकर्ताओं, स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों, सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं, वकीलों, नर्सों, शिक्षकों, गृहिणियों और विभिन्न व्यवसायों से महिलाओं ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की एक जोशपूर्ण रैली में हिस्सा लिया। सी.ए.ए, एन.आर.सी. और एन.पी.आर. के नाम पर राज्य द्वारा “वजूद से बेदख़ली” के ख़िलाफ़ महिलाओं का विरोध, इस रैली का मुख्य विषय था।

रैली के स्थान पर हर दीवार, हर खम्बा रंगीन बैनरों से सज़ा हुआ था। सभी बैनरों पर राज्य द्वारा सब-तरफा हमलांे के ख़िलाफ़ महिलाओं के एकजुट विरोध का ऐलान किया गया था। बैनरों पर, “एन.आर.सी., सी.ए.ए. और एन.पी.आर. नहीं चलेगा!”, “धर्म नागरिकता का आधार नहीं हो सकता है!”, “फूट डालो और राज करो की राजनीति नहीं चलेगी!”, “शोषण और उत्पीड़न के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए एकजुट हों!”, “निजीकरण, उदारीकरण और भूमंडलीकरण – महिलाओं पर क्रूर हमला है!”, ”राज्य द्वारा आयोजित सांप्रदायिक हिंसा और आतंक नहीं चलेगा!”, “महिला मुक्ति का संघर्ष, अमर रहे!”, “शासन सत्ता अपने हाथ, ज़ुल्म अन्याय करें समाप्त!”, आदि नारे लिखे हुए थे।

रैली में एन.एफ.आई.डब्ल्यू., पुरोगामी महिला संगठन, स्वास्तिक महिला समिति, ए.आई.डी.डब्ल्यू.ए., प्रगतिशील महिला समिति सहित अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों ने महिलाओं को संबोधित किया। उन्होंने हमारे देश की संघर्षशील महिलाओं को सलाम किया जो बड़ी संख्या में दिल्ली और कई अन्य शहरों में सी.ए.ए., एन.आर.सी. और एन.पी.आर. के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरी हैं। इन कानूनों का इस्तेमाल करके हमारे शासक लोगों को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश कर रहे हैं। सभी वक्ताओं ने महिलाओं, युवाओं और विश्वविद्यालयों में प्रदर्शनकारी छात्रों के ख़िलाफ़ राज्य के हमलों की और उनको भड़़काने की कोशिशों की निंदा की। उन्होंने सत्ताधारी पार्टी के राजनेताओं के क्रूर सांप्रदायिक और जहरीले प्रचार, कॉर्पोरेट मीडिया द्वारा फैलाए गए झूठ और राज्य द्वारा उत्तर पूर्व दिल्ली के कई इलाकों में मुसलमान समुदाय के ख़िलाफ़ सांप्रदायिक हिंसा और राजकीय आतंक फैलाने की कड़ी निंदा की। सभी वक्ताओं ने पुलिस द्वारा हमलावर गुटों की सहायता करने और हिंसा में मारे गए और घायल लोगों को अस्पताल ले जाने से रोकने में पुलिस और अधिकारियों की भूमिका की निंदा की। सभी समुदायों के लोगों द्वारा दिखाई गयी एकजुटता और बंधुत्व, बहादुरी से पीड़ितों को हमलावरों से बचाने और उनको पनाह और राहत देने की कोशिश, यह हमारे लोगों की असली भावना को दर्शाती है। इस बात का सभी वक्ताओं ने जिक्र किया।

अपने भाषणों में सभी वक्ताओं ने महिलाओं और सभी मेहनतकश लोगों पर हो रहे सब-तरफा हमलांे, न्यूनतम मज़दूरी से वंचित रखते हुए मज़दूरों के अधिकारों पर हमले, हायर एंड फायर नीति, ठेका मज़दूरी, श्रम कानूनों में मज़दूर-विरोधी बदलाव, कामकाजी महिलाओं के लिए शिशु-गृह की सुविधा का अभाव, महिलाओं के साथ भेदभाव और उन पर लैंगिक हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने राज्य की किसान-विरोधी और दलित-विरोधी नीतियों की निंदा की। उन्होंने सार्वजनिक संपत्ति, बैंकिंग और बीमा, परिवहन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण को समाप्त करने की मांग की। वक्ताओं ने मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था और प्रक्रिया की भी आलोचना की, जो राजनीतिक दलों को लोगों के ख़िलाफ़ सबसे भीषण गुनाहों को अंजाम देने की इजाज़त देती है और गुनहगारों को सज़ा नहीं मिलती है। उन्होंने महिलाओं और पुरुषों को अपने संघर्ष को एक नई राजनीतिक व्यवस्था और प्रक्रिया के गठन की दिशा में मजबूत करने का आह्वान किया, जहां फैसला लेने का अधिकार लोगों के हाथों में होगा और जहां अर्थव्यवस्था इजारेदार पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने के लिए नहीं बल्कि लोगों की ज़रूरतों को पूरा करने की दिशा में काम करेगी।

जागोरी, जे.डब्ल्यू.पी., पिंजरा तोड़ और स्त्री मुक्ति संगठन की महिला कार्यकर्ताओं ने महिलाओं के संघर्षों पर प्रकाश डालते हुए गीत गाये। जामिया नगर के एक युवा समूह ने एक नाटक पेश किया, जिसमें उन्होंने घरों के भीतर और बाहर, जीवन के हर क्षेत्र में महिलाओं के साथ हो रहे उत्पीड़न और भेदभाव को दर्शाया गया।

एन.पी.डी.डब्ल्यू. के तहत एकत्रित घरेलू कामगारों और सेवा के तहत स्वरोज़गार करने वाली महिलाओं ने अपनी समस्याओं और अपने अधिकारों के लिए संगठित होने और संघर्ष करने के अपने प्रयासों की बात की। दिल्ली में अतिथि शिक्षकों के अधिकारों के लिए बहादुरी से संघर्ष कर रही एक लड़ाकू महिला शिक्षिका ने रैली को संबोधित किया और नियमित शिक्षक का पद पाने के अपने संघर्ष के बारे में बताया। नर्सों ने अपने कठिन काम की परिस्थितियों के खि़लाफ़ संघर्ष की बात पेश की। ट्रांसजेंडर समुदाय के कार्यकर्ताओं ने अपने साथ हो रहे भेदभाव और हमलों के ख़िलाफ़ संगठित होने के अपने प्रयासों का जिक्र किया और बताया कि किस तरह से राज्य उनका कभी समर्थन नहीं करता है। एक युवा महिला वकील ने महिलाओं और लड़कियों का बचाव करने के अपने अनुभवों का वर्णन किया जो घरेलू हिंसा, बाल शोषण, यौन उत्पीड़न और बलात्कार का शिकार हैं।

महिलाओं ने दिल्ली में राज्य द्वारा आयोजित सांप्रदायिक हिंसा और आतंक फैलाने की निंदा करते हुए नारे लगाए। उन्होंने सरकार की मज़दूर-विरोधी, देश-विरोधी और समाज-विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ नारे लगाए। उन्होंने शासकों द्वारा हमारी एकता को तोड़ने के प्रयासों को विफल करने का संकल्प लिया। उन्होंने महिलाओं की मुक्ति के संघर्ष को आगे बढ़ाने के अपने दृढ़ संकल्प को फिर से दोहराया। शोषण और उत्पीड़न से मुक्त एक नए समाज के लिए लड़ने का संकल्प व्यक्त करते हुए कार्यक्रम संपन्न हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *