ईरान का तेल वेनेज़ुएला पहुंचा :

अमरीकी साम्राज्यवाद के दबाव और ब्लैकमेल के प्रतिरोध का महत्वपूर्ण उदाहरण

24 मई को वेनेज़ुएला के नौसैनिक जहाज के संरक्षण में ईरान का एक तेल वाहक जहाज वेनेज़ुएला के तट पर पंहुचा। इस जहाज में वेनेज़ुएला की तेल रिफाइनरी के लिए 15 लाख बैरल कच्चा तेल लाया गया था। अगले कुछ ही दिनों में इस तरह के 4 और तेल वाहक जहाज ईरान से वेनेज़ुएला को आने वाले हैं।

पूरी दुनिया का चक्कर लगाते हुए ईरान से वेनेज़ुएला के तट पर इन जहाजों का पहुंचना अमरीकी साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ एक अत्यंत महत्वपूर्ण क़दम है। ईरान और वेनेज़ुएला दुनिया में दो ऐसे देश हैं जिन्हें अमरीकी साम्राज्यवादियों ने खासतौर से निशाना बनाया है, क्योंकि ये दोनों देश दुनियाभर में अमरीकी साम्राज्यवादियों की आक्रमक कार्यवाहियों का लगातार विरोध करते आये हैं। ये दोनों ही देश अमरीका द्वारा थोपे गए प्रतिबंधों के शिकार रहे हैं। अमरीका द्वारा लगाये गए प्रतिबंधों ने न केवल उनके देश के लोगों को भयानक आर्थिक कठिनाइयों में डाल दिया है, बल्कि कोरोना वायरस की महामारी के समय संक्रमित लोगों के इलाज और उनकी तकलीफों को दूर करने के लिए बेहद ज़रूरी चिकित्सीय उपकरण और सामग्री हासिल करने में भी रुकावटें खड़ी कर दी हैं।

अमरीका द्वारा लगाए गये प्रतिबंधों के कारण वेनेज़ुएला को, जो कि खुद एक तेल का उत्पादन करने वाला प्रमुख देश है, उसको ईरान से तेल आयात करना पड़ रहा है। इन प्रतिबंधों की वजह से वेनेज़ुएला, जो कि राजस्व के लिए तेल से होने वाली आमदनी पर निर्भर है अपनी तेल रिफाइनरी को चलाये रखने, उनका रखरखाव और मरम्मत के लिए ज़रूरी उपकरण और सामग्री हासिल नहीं कर पा रहा है। अमरीका ने अन्य देशों को वेनेजुअला और ईरान से तेल खरीदने या बेचने और किसी भी तरह के व्यापारिक संबंध रखने पर रोक लगा रखी है और धमकी दी है कि यदि कोई देश ऐसा करता है तो उसके ख़िलाफ़ सख़्त कार्यवाही की जाएगी।

इस बात को सभी जानते हैं कि अमरीकी नौसेना ईरान के जहाजों को खास तौर से परेशान करती है और यहां तक कि ईरान के अपने इलाके, फारस की खाड़ी में भी अमरीकी नौसेना ऐसा करने से बाज नहीं आती। इस वजह से ईरान द्वारा तेल से लदे अपने पांच जहाजों को सुएज समुद्री नहर से होते हुए भूमध्यसागर और अटलांटिक महासागर के रास्ते कैरिबियन सागर से वेनेज़ुएला को भेजने का फैसला बहादुरी और साम्राज्यवाद-विरोधी एकजुटता की एक मिसाल है। ईरान की यह कार्यवाही और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि, संयुक्त राज्य अमरीका ने 1823 में जब से अपनी “मोनरो डॉक्ट्रिन” जारी की है उस समय से लेकर आज तक वह कैरिबियन और लातिन अमरीका को अपने “घर के पीछे के अहाते” की तरह समझता आया है, और अपनी चौधराहट चलाता आया है।

फ़ौजी ताक़त में दुनियाभर का सबसे ताक़तवर देश होने के नाते अमरीका दुनिया का दरोगा बना फिरता है और दूसरे देशों से अपने फैसले मनवाने के लिए चौधराहट चलाता आया है। वह बड़ी बेशर्मी से दूसरे देशों की संप्रभुता पर हमले करता रहा है। सभी छोटे-बड़े देशों से अपनी बात मनवाने के लिए वह अपने विशाल फ़ौजी ज़ख़ीरों पर निर्भर है। इस संदर्भ में ईरान और वेनेज़ुएला के बीच सहयोग की यह मिसाल अमरीकी साम्राज्यवादियों के गाल पर एक करारा तमाचा है। आज के जमाने में लोगों की आज़ादी और संप्रभुता की कद्र करने वाले हर व्यक्ति को इस दिलेर कार्यवाही की तारीफ़ करनी चाहिए।

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