संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों पर अमरीका का वीटो :

अमरीका ने एक बार फिर अपनी प्रतिक्रियावादी जंगखोर प्रकृति को प्रकट किया है

वेनेजुएला पर आक्रमण करने और मई की शुरुआत में, वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को या तो कैद करने या उनका क़त्ल करने में असफल अमरीकी साम्राज्यवादी साज़िश के बाद, 20 मई को वेनेजुएला की संप्रभुता पर इस जबरदस्त हमले पर चर्चा करने के लिए, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यू.एन.एस.सी.) की एक विशेष बैठक बुलाई गई थी। संयुक्त राष्ट्र में वेनेजुएला के स्थायी प्रतिनिधि ने विधानसभा के सामने स्पष्ट तथ्य और तर्क़ रखे और यह दिखाया कि अमरीका की यह नाकाम साज़िश, यू.एन.एस.सी. के कई प्रस्तावों का अपमान थी और इस तरह की कोशिशों की दुनिया के सभी लोगों को सख़्त निदा करनी चाहिए। रूसी संघ के प्रतिनिधि ने यू.एन.एस.सी. के समक्ष एक प्रस्ताव रखा जिसमें किसी देश के खि़लाफ़ सभी तरह के “बल के उपयोग … आतंकवाद और भाड़े के सैनिकों के प्रयोग की निंदा की।” भले ही अमरीका ने वेनेजुएला में तख़्तापलट के प्रयास में शामिल होने से इनकार कर दिया और भले ही यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राज्यों के ख़िलाफ़ आक्रमणों की एक सामान्य निंदा तक ही सीमित था, तब भी इस प्रस्ताव को अमरीका ने अपनी वीटो शक्ति का उपयोग करके खारिज़ कर दिया।

और विडम्बना तो यह है कि सफेद झूठ बोलने की भी हद तब पार हो गयी, जब अमरीका प्रतिनिधि ने कहा कि रूस और क्यूबा जिन्होंने निकोलस मादुरो के नेतृत्व वाली निर्वाचित वेनेजुएला की सरकार के साथ सैन्य सहयोग के समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं, वे वेनेजुएला की संप्रभुता का उल्लंघन कर रहे हैं! बैठक में भाग लेने वाले अन्य सदस्यों, जिनमें वियतनाम, इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका के प्रतिनिधि शामिल हैं, सभी ने संप्रभु राज्यों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के विरोध में आवाज़ उठाई।

इससे पहले, 10 मई को अमरीकी शासन ने सुरक्षा परिषद में एक और प्रस्ताव को वीटो कर दिया था, जिसने इस समय कोरोनावायरस महामारी के रूप में मानवता के सामने संकट के दौरान “वैश्विक युद्धविराम” का आह्वान किया था। इस प्रस्ताव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि इस समय, सशस्त्र संघर्ष में उलझे हुए क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आवश्यक चिकित्सा उपकरणों और दवाओं को पहुंचाने का मौका मिले।

यह क़दम कई शरणार्थी-शिविरों में उत्पन्न अत्यंत गंभीर स्थिति का हल निकालने में भी मदद करेगा जहां युद्ध से विस्थापित हुए लोगों को उनके स्वास्थ्य और जीवन के लिए बहुत जोखिम भरी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। युद्धविराम ऐसे संघर्षों में शामिल सभी पक्षों पर समान रूप से लागू होना था। यदि इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिलती और ये उन क्षेत्रों में लागू किया जाता तो लाखों लोगों को भारी राहत मिलती। लेकिन सुरक्षा परिषद में अमरीकी प्रतिनिधियों द्वारा इसे वोट देने से पहले ही समाप्त कर दिया गया।

अमरीकी साम्राज्यवादियों ने संयुक्त राष्ट्र संघ और उससे संबंधित अंतर्राष्ट्रीय निकायों जैसे कि विश्व स्वास्थ्य संगठन और परमाणु युद्ध या वैश्विक पर्यावरण के ख़तरों को कम करने के उद्देश्य से बनी संधियों के प्रति पूर्ण तिरस्कार दिखाया है। उनको इन सब मुद्दों में कोई दिलचस्पी नहीं है। समझने वाली बात यह है कि ये सब क़दम केवल एक आदमी ट्रम्प की मनमानी कार्रवाई नहीं है, बल्कि अमरीकी साम्राज्यवाद की दुनिया के लोगों के प्रति अपमान और तिरस्कार भरी प्रवृत्ती और उसकी पूरी तरह से प्रतिक्रियावादी और जंगखोर प्रवृत्ति है। आज अमरीकी साम्राज्यवाद को दुनियाभर में कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है, दुनिया में हमलावार युद्धों को समाप्त करने, राष्ट्रों की संप्रभुता के उल्लंघन के ख़िलाफ़ और दुनिया में शांति और राष्ट्रों की समानता स्थापित करने का आह्वान किया जा रहा है। इस स्थिति में अमरीकी साम्राज्यवादी और भी आक्रामक रुख़ अपना रहे हैं, वैश्विक संकट की इस भयानक स्थिति में भी वे अपनी आक्रमकता को कम करने से इनकार कर रहे हैं और अपने सभी विरोधियों पर और भी क़ातिलाना हमले करने पर उतारू हैं। दुनिया में सरकारों और लोगों का, शांति और न्याय के लिए निरंतर और एकजुट प्रयास और अमरीकी साम्राज्यवादियों का युद्धख़ोर प्रचार और साज़िशों का कड़ा विरोध ही, इन हमलावरों को दुनिया में तबाही मचाने से रोक सकता है।

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