अधिकारों के लिये संघर्ष

मज़दूर-विरोधी नीतियों व कानूनों के खि़लाफ़ प्रदर्शन

Ambika Pur

4 जून को छत्तीसगढ़ के जिला अंबिकापुर में अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर ‘छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग राज्य कर्मचारी संघ’ ने केंद्र एवं राज्य सरकार की कर्मचारी-विरोधी नीतियों तथा पास किये जा रहे मज़दूर-विरोधी कानूनों के खि़लाफ़ प्रदर्शन किया। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर संभाग में और प्रांत के सभी जिला मुख्यालयों पर तथा सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, जशपुर में व्यापक पैमाने पर प्रदर्शन हुये। कर्मचारियों ने अपने कार्यालयों, घरों, स्कूलों आदि में उपस्थित रहते हुए मांगों से संबंधित पोस्टर लेकर विरोध प्रदर्शन किये। इन विरोध प्रदर्शनों में सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया।

एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम पांच सूत्रीय ज्ञापन कलेक्टर सरगुजा अंबिकापुर को सौंपा।

कर्मचारियों ने घोषणा की है कि यदि छत्तीसगढ़ सरकार कर्मचारी हितों के विरुद्ध जारी आदेश को वापस नहीं लेती तो राज्य के कर्मचारी आगामी 10 जून को काली पट्टी लगाकर अपना विरोध प्रकट करेंगे। इसके बाद भी मांगों पर विचार नहीं किया जाता है तो 1 जुलाई को काला दिवस के रूप में मनाया जाएगा।

कर्मचारी संघों की मांग है कि – श्रम कानून में कारपोरेट परस्त नीतियों को लागू करना बंद किया जाये, नई नियुक्तियों पर लगी रोक को तुरंत ख़त्म किया जाये, एन.पी.एस. को समाप्त करके पुरानी पेंशन प्रणाली को लागू किया जाये, कर्मचारियों का महंगाई भत्ता न रोका जाये, वैश्विक महामारी में कार्यरत एवं सेवार्थ कर्मचारियों की पूर्णरूपेण सुरक्षा व यथोचित सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराये जायें, कर्मचारियों के वार्षिक वेतन वृद्धि के रोके जाने पर समस्त प्रकार के एरियर्स का भुगतान किया जाये, आदि।

शारीरिक प्रशिक्षण अध्यापक संघर्ष के रास्ते पर

PTI

4 जून को पंचकुला में सरकार द्वारा 1983 शारीरिक प्रशिक्षण अध्यापकों (पीटीआई) की सेवाएं समाप्त करने के खि़लाफ़ सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के बैनर तले अध्यापकों और कर्मचारियों ने उपायुक्त कार्यालय पर धरना देकर प्रतिरोध दिवस मनाया। उन्होंने तहसीलदार को मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के नाम मांगों का ज्ञापन सौंपा।

इस धरने में स्वास्थ्य विभाग के ठेका कर्मी भी शामिल हुए, जिन्हें सरकार हटाने की तैयारी कर रही है। भूतपूर्व हुड्डा सरकार के कार्यकाल में जिन शिक्षकों को पी.टी.आई. के पदों पर भर्ती की गई थी, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी भर्ती को कुछ महीने पहले रद्द कर दिया था। कोर्ट के आदेशों के अनुसार, हरियाणा सरकार ने तीन दिन में 1983 पी.टी.आई. को नौकरी से हटाने के आदेश जारी किये हैं। ये पी.टी.आई. बीते 10 साल से शारीरिक शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं। इसके खि़लाफ़ हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ ने 29 मई को भी राज्य में जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी कार्यालयों पर काला दिवस मनाया था और सरकार से मांग की थी कि 1983 पी.टी.आई. को निकालने का आदेश वापस लिया जाए।

एम्स नर्स यूनियन का मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी

Nurs

1 जून से, नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में कार्यरत नर्स पी.पी.ई. किट से हो रहे इंफेक्शन और रेशेज, ड्यूटी के घंटे कम करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। यह प्रदर्शन एम्स नर्सेस यूनियन की अगुवाई में चल रहा है।

एम्स में अब तक 47 नर्सों समेत 329 से ज्यादा कर्मचारी कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जा चुके हैं। यूनियन की मांग है कि पी.पी.ई. किट के साथ, काम के घंटों को चार घंटे तक सीमित किया जाए। लंबे समय तक पी.पी.ई. किट पहनकर रखने से उन्हें कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो रही हैं।

एम्स के निदेशक को लिखे पत्र में नर्स यूनियन ने अस्पताल के कोविड-19 क्षेत्रों में पी.पी.ई. के साथ चार घंटे की समान पाली, कोविड-19 और गैर कोविड-19 क्षेत्रों के बीच समान रोटेशन नीति लागू करने समेत कई मांगें रखी हैं। एम्स नर्स यूनियन ने यह विरोध तब तक जारी रखने का फैसला किया है जब तक कि प्रशासन उनकी मांगों पर ध्यान न दे।

राशन के लिए प्रदर्शन

Food Suplay

5 जून को पंजाब के अमृतसर स्थित जंडियाला गुरु के सराय रोड वाल्मीकि चौक पर देहाती मज़दूर सभा की अगुवाई में, करीब 6 महीने से सरकारी राशन न मिलने पर, सरकार, प्रशासन और फूड सप्लाई विभाग के खि़लाफ़ प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने अपना विरोध प्रकट करने के लिये अपने कपड़े उतारकर प्रदर्शन किया।

विरोध सभा के सदस्यों ने बताया कि ढाई महीने से देशभर में चल रहे लॉकडाउन के कारण कई करोबार-फैक्टरियां बंद हो गई हैं, जिससे भारी संख्या में मज़दूर बेरोज़गार हो गये हैं। मज़दूर दो जून की रोटी के लिए दर-दर ठोकरें खाने को मजबूर हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि राशन लिस्ट से काटे गये ज़रूरतमंद परिवारों के नाम दोबारा डाले जाएं और उन सबको जल्द राशन दिया जाए, अन्यथा बेमियादी धरने दिए जाएंगे।

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