ब्रिटेन में सरकार द्वारा लॉकडाउन को ढीला करने पर व्यापक विरोध

चार सबसे बड़ी ट्रेड यूनियनों और कई स्थानीय अधिकारियों के बड़े पैमाने पर विरोध के बावजूद, 10 मई को ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कोरोनोवायरस लॉकडाउन को ढीला करने की घोषणा की। स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के सत्तारूढ़ मंत्रियों ने नई नीति को लागू करने से इनकार कर दिया है। सरकार ने अपने नारे को “घर पर रहें, एनएचएस की रक्षा करें और ज़िदगियां बचाएं” से बदलकर “सतर्क रहें, कोरोनावायरस को हरायें और ज़िन्दगियां बचाएं” कर दिया है।

जॉनसन ने लोगों से काम पर लौटने का अनुरोध करते हुए कहा कि अगर लोग घर से काम नहीं कर पा रहे हैं तो उन्हें ”काम पर जाने के लिए सक्रिय रूप से प्रोत्साहित किया जाना चाहिए“। उन्होंने 1 जून से इंग्लैंड में स्कूल खोलने की योजना की पुष्टि की जिसमें रिसेप्शन और एक साल (चार से छह साल की उम्र के बच्चों के लिए) और प्राथमिक स्कूल में छठा साल (उम्र 10-11 के बच्चे) के साथ स्कूल खुलेंगे।

चार सबसे बड़ी ट्रेड यूनियनों – यूनिसन, यूनाइट, जी.एम.बी. और उस्डा के साथ ट्रेड यूनियन परिषद ने चेतावनी दी है कि वे अपने तीस लाख सदस्यों को काम पर लौटने की सिफारिश नहीं कर सकते हैं जब तक कि उनके सदस्यों की सुरक्षा के लिए उपाय लागू नहीं किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि उनके कई सदस्य पहले ही “लोगों और सामान की ढुलाई, जनता की सुरक्षा और कमजोर लोगों की देखभाल करते हुए” अपनी जान गंवा चुके हैं। सरकार ने उन मालिकों को दंडित करने के लिए किसी भी नीति की घोषणा नहीं की है जो मज़दूरों को सुरक्षात्मक उपकरण प्रदान नहीं करते हैं और दूरी बनाए रखने के लिए दिशानिर्देशों का पालन नहीं करते हैं।

शिक्षण यूनियनों ने सरकार से 1 जून की तारीख को फिर से स्थगित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा है कि वे निश्चित रूप से स्कूलों को फिर से खोलना चाहते थे, लेकिन तब जब ऐसा करना सुरक्षित होगा। उन्होंने बताया कि सरकार स्कूलों के भीतर कोरोनोवायरस के प्रसार के ख़तरों की समझ में कमी दिखा रही थी और छात्रों के माता-पिता, भाई-बहनों और रिश्तेदारों के साथ-साथ व्यापक समुदाय में भी। उन्होंने अपने सभी सदस्यों की अत्यधिक चिंता व्यक्त की, कि स्कूल स्टाफ को दूरी रखने से सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी और यह कि कक्षा, विशेष रूप से छोटे बच्चों की बीमारी के संचरण के स्रोत हो सकते हैं।

ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन (बी.एम.ए.) – डॉक्टरों की सबसे बड़ी यूनियन ने कहा है कि जब संक्रमण की दर अभी भी बहुत अधिक है, तो स्कूलों को खोलने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा संघ को लिखे अपने पत्र में, बी.एम.ए. ने उनकी चिंताओं का समर्थन करते हुए कहा है कि 1 जून को स्कूलों को फिर से खोलने से पहले सावधानी बरतने और परीक्षण को प्राथमिकता देने का शिक्षण यूनियनों द्वारा अनुरोध ”बिलकुल सही“ है।

यह साफ दिखाता है कि ब्रिटिश सरकार लॉकडाउन को कम करने और स्कूलों को फिर से खोलने के लिए बड़े पूंजीपतियों के हितों में निर्णय ले रही है, जिनका वह प्रतिनिधित्व करती है। स्कूलों को खोलना आवश्यक है ताकि माता-पिता का काम पर जाना संभव बन सके। सरकार ने मज़दूरों और काम करने वाले लोगों की चिंताओं को दूर करने से इनकार कर दिया है कि परीक्षण और ट्रेसिंग की व्यवस्था किए बिना स्कूलों को खोलना लोगों के जीवन को ख़तरे में डाल सकता है।

एक के बाद एक सरकारों ने विभिन्न ऑपरेशनों का निजीकरण करके, अस्पतालों और दुर्घटना और आपातकालीन इकाइयों को बंद करके एन.एच.एस. को बर्बाद कर दिया है और सरकार अब भी यही कर रही है। एन.एच.एस. के फंड के अरबों पाउंड निजी फायदा प्रदाताओं, शेयरधारकों और बैंकों के लिए बहाए जा रहे हैं। एन.एच.एस. के लिए सेवाएं प्रदान करने वाली कुछ निजी कंपनियां हैं: एलायंस मेडिकल, एटोस हेल्थकेयर, केयर यूके, इनहेल्थ, फ्रेसेनियस, इंटरहेल्थ, नेशंस हेल्थकेयर, नेटकेयर, पार्टनरशिप हेल्थ ग्रुप, रामसे हेल्थ केयर, स्पयेर हेल्थकेयर, यूके स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल्स, वॉक इन हेल्थ, आदि। अस्पतालों में सफाई, रोगी के भोजन की सुविधा और सुरक्षा जैसी कुछ सेवाओं का पहले ही निजीकरण हो चुका है। करोनावाइरस परीक्षण के अनुबंध निजी कंपनियों को दिए गए हैं।

ब्रिटिश सरकार के रवैये से पता चलता है कि वह सार्वजनिक खर्च पर पूंजीवादी एकाधिकार को समृद्ध करने के लिए कोरोनोवायरस महामारी का उपयोग करना चाहती है। ब्रिटेन का मज़दूर वर्ग इस तरह की कार्यवाही पर अपना विरोध व्यक्त कर रहा है।