मुंबई में डॉक्टरों ने नए कोविड-19 टेस्टिंग आदेशों का विरोध किया

मुंबई में डॉक्टरों ने 10 मई को ग्रेटर मुंबई नगर निगम (एम.सी.जी.एम.) द्वारा जारी किए गए नियमों का कड़ा विरोध किया है। इन नियमों के अनुसार उन्हें टेस्ट लेने की सलाह देने से पहले, कोविड-19 लक्षणों के लिए मरीज की शारीरिक जांच करने की आवश्यकता होगी, अन्यथा उनके लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे। डॉक्टरों को यह कहते हुए एक प्रपत्र भरना होगा कि उन्होंने कोविड-19 टेस्ट की सलाह देने से पहले मरीज की शारीरिक जांच की है। यदि वे ऐसा नहीं कर पाते हैं, तो वे दिशा-निर्देशों के अनुसार उनके ‘एम.सी.आई. (मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया) पंजीकरण‘ रद्द करने सहित कार्रवाई के लिए उत्तरदायी होंगे।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आ.सी.एम.आर.) के दिशानिर्देशों में कहा गया है कि निजी प्रयोगशालाओं में कोविड-19 के टेस्ट केवल योग्य चिकित्सक द्वारा निर्धारित किए जाने पर ही होने चाहिए। हालांकि, आई.सी.एम.आर. के दिशानिर्देशों में शारीरिक परीक्षा का कोई उल्लेख नहीं है।

इसके अलावा, एम.सी.जी.एम. ने 17 मई को एक नोटिस जारी किया, जिसमें कहा गया कि जो डॉक्टर मरीजों की शारीरिक रूप से जांच किए बिना ही टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं उनके खि़लाफ़ एफ.आई.आर. दर्ज़ की जानी चाहिए। नोटिस में कहा गया है कि “यदि कोई एम.ओ.एच. (स्वास्थ्य चिकित्सा अधिकारी) पाता है कि स्थानीय निजी चिकित्सक शारीरिक परीक्षण के बिना ही बाहरी क्षेत्र के व्यक्तियों को स्वाब टेस्टिंग के लिए सिफारिश पत्र दे रहे हैं, तो ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस देकर पंजीकरण रद्द करने की चेतावनी दी जा सकती है, उनके खि़लाफ़ सख्त कार्रवाई की जा सकती है, और स्थानीय पुलिस स्टेशन में एफ.आई.आर. दर्ज किया जा सकता है”। महाराष्ट्र इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा है कि एम.सी.जी.एम. के नियमों का “उल्लंघन” करने पर डॉक्टरों को पहले ही 20 नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जिन्हें बाद में आई.एम.ए. के हस्तक्षेप पर वापस ले लिया गया था। ये नोटिस वार्ड अधिकारियों द्वारा या तो इस आधार पर जारी किए गए थे कि शारीरिक परीक्षा आयोजित नहीं की गई थी या उन लोगों के लिए टेस्ट निर्धारित किए गए थे जो स्पर्शोन्मुख थे।

डॉक्टरों ने बताया है कि यह उन मरीजों के उत्पीड़न को भी बढ़ा रहा है जिन्हें कोविड-19 टेस्टिंग की आवश्यकता है। उन्हें अब इधर-उधर दौड़ना पड़ता है, पहले शारीरिक परीक्षण के लिए डॉक्टर का प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए, और फिर ऐसा प्रयोगशाला ढूंढ़ने के लिए जो टेस्टिंग कर सकती है।

दिल्ली और पश्चिम बंगाल जैसे कई अन्य राज्यों में, डॉक्टरों ने कहा है कि कोविड टेस्टिंग के लिए एक सामान्य परचा पर्याप्त है।

प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने आरोप लगाया है कि एम.सी.जी.एम. द्वारा यह कदम जो डॉक्टरों को इस तरह के घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर करता है, यह अवैध है और डॉक्टरों का क्रूर उत्पीड़न करता है, जो पहले से ही शहर में कोरोवावायरस मामलों की बढ़ती संख्या से निपटने के लिए बहुत तनाव में हैं। उन्होंने

दृढ़ता से मांग की है कि डॉक्टरों का इस तरह का अपराधीकरण खत्म कर देना चाहिए और डॉक्टरों का सम्मान किया जाना चाहिए। डॉक्टरों ने अपनी चिंता व्यक्त की है कि (एम.सी.जी.एम.) ने टेस्टिंग को और कड़े बनाने के लिए सख्त टेस्टिंग दिशानिर्देश जारी किए हैं, ताकि कम टेस्ट्स से बहुत कम मामले सामने आये और मुंबई में कोविड मामलों की संख्या वास्तव से बहुत कम दिखाई जा सके। यह दर्शाता है की निगम अधिकारी असलियत को छुपाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। वे डॉक्टरों को भी इसके लिए अपराधी दिखाकर दंडित कर रहे हैं!

एम.सी.जी.एम. के अनुसार, 2 जून तक, मुंबई में कोविड-19 के कारण 41,986 मामले और 1,368 मौतें हुईं। गुजरात सरकार ने भी कड़े प्रतिबंध लागू किए, जिसके आधार पर कोविड टेस्टिंग के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों से अनुमोदन की आवश्यकता है। 3 जून तक, गुजरात स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार कुल 17,617 कोविड मामलों की सूचना दी गई थी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *