अधिकारों की हिफ़ाज़त में संघर्ष

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का पंजाब में प्रदर्शन

Anganwari

8 जून को आंगनवाड़ी इंप्लाइज फेडरेशन के आह्वान पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने पंजाब में केंद्र व पंजाब सरकार के खि़लाफ़ ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन किया। उन्होंने बाल विकास परियोजना अधिकारी को प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

आंगनवाड़ी मुलाजिम यूनियन ने मांग की कि केंद्र सरकार द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायकों को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाये। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को प्री-नर्सरी अध्यापक का दर्ज़ा दिया जाये। उन्होंने कहा कि अन्य फ्रंट लाइन के कर्मचारियों के भांति 50 लाख का जीवन बीमा किया जाए। जब तक उन्हें कर्मचारी का दर्ज़ा नहीं दिया जाता है, तब तक न्यूतनम वेतन दिया जाए। सेवा मुक्ति के पश्चात पेंशन का लाभ दिया जाए।

यूनियन ने मांग की कि सुपरवाइज़रों की तुरंत भर्ती की जाए और कार्यकर्ताओं व सहायकों के खाली पड़े पदों को भरा जाए और समय पर वेतन दिया जाए।

मिड-डे-मील रसोइयों और सहायकों का प्रदर्शन

8 जून को मिड-डे-मील वर्कर्स यूनियन पंजाब की बटाला इकाई ने अपनी मांगों को लेकर शिक्षा मंत्री के ख़िलाफ़ ज़ोरदार प्रदर्शन किया। इस तरह के प्रदर्शन कई जिलों में हुए।

प्रदर्शन के बाद यूनियन ने ब्लाक प्राथमिक शिक्षा अधिकारी के माध्यम से शिक्षा मंत्री को एक पत्र भी भेजा।

पत्र में मांग की गई कि शिक्षा मंत्री ने अप्रैल 2020 में माना था कि 3000 रुपए महीना भत्ता मिलेगा, लेकिन आज तक उन्हें मानभत्ता नहीं मिला है। अतः 3000 रुपये मान भत्ता दिया जाए। कोरोना संकट के मद्देनज़र निर्माण श्रमिकों की भांति सभी मिड-डे-मिल योजना के रसोइयों और सहायकों के खातों में 3000 रुपए अलग से डाले जाएं। मिड-डे-मील योजना के तहत काम करने वाले रसोइयों और सहायकों को न्यूनतम वेतन के दायरे में लाया जाए। सरकार की ओर से हर कर्मी के लिये पांच लाख रुपए का बीमा होना चाहिए। बच्चों की गिनती कम होने का बहाना बनाकर कर्मियों की छांटनी न की जाए।

सीमेंट फैक्ट्री के समक्ष प्रदर्शन

8 जून को पंजाब में रोपड़-घनौली स्थित एटक संबंधित अंबुजा सीमेंट वर्कर यूनियन ने फैक्ट्री के मुख्य गेट पर, वेतन में कटौती और तबादले को रोकने की मांग को लेकर, प्रबंधन व केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन को संबोधित करते हुये यूनियन के वक्ता ने कहा कि प्रबंधन कर्मचारियों की छंटनी करने की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पूंजीपतियों के अनुसार श्रम कानूनों में बदलाव कर रही है।

उन्होंने कहा क़ि अन्य यूनियनों के साथ तालमेल करके 17 जून को भूख हड़ताल और 1 जुलाई को अर्थी फूंको प्रदर्शन किये जायेंगे। अगर फिर भी कोई हल नहीं निकला तो 8 जुलाई को मुकम्मल हड़ताल कर संघर्ष की रुपरेखा का ऐलान किया जाएगा।

नीले राशन कार्ड की बहाली को लेकर प्रदर्शन

Neela Card

8 जून को पंजाब के फाजिल्का में वेरीफिकेशन के नाम पर प्रदेश सरकार द्वारा नीले राशन कार्ड हटाए जाने के खि़लाफ़ मज़दूर संगठनों ने ज़ोरदार प्रदर्शन किया।

मज़दूरों ने बताया कि लॉकडाउन के कारण पहले ही रोज़गार पूरी तरह से ख़त्म हो गया है। जो सहूलियतें ग़रीबों को मिल रही थीं वे भी अब ख़त्म हो गई हैं। उन्होंने कहा कि अगर उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे इसी तरह प्रदर्शन जारी रखेंगे।

उन्होंने कहा कि केन्द्र व प्रदेश सरकार की तरफ से लोगों के साथ धोखा किया जा रहा है। ग़रीब लोगों को दी जा रही सहूलियतें किसी न किसी तरह ख़त्म करने की साज़िश हो रही है, जो बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।

रेल कोच फैक्ट्री के समक्ष प्रदर्शन

8 जून को ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन की अगुवाई में मज़दूरों ने केन्द्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़, रेल कोच फैक्ट्री के समक्ष काले झंडों के साथ नारेबाजी की।

इससे पूर्व आल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन की स्टैंडिंग कमेटी के फैसले के अनुसार 1 जून से 6 जून तक देशभर में जन जागरण अभियान चलाया गया। 8 जून को पूरे देश में विरोध दिवस मनाया गया।

ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन की मुख्य मांगें हैं:

  • सरकार डेढ़ साल तक डीए फ्रीज करने के आदेश को वापस ले।
  • सार्वजनिक उद्यमों के निगमीकरण या निजीकरण की नीति बंद करे।
  • मल्टी स्किलिंग और मर्जर आफ केडर को ख़त्म किया जाए।
  • नई पेंशन स्कीम को खत्म करके पुरानी को बहाल किया जाए।
  • सुधार के नाम पर श्रम कानूनों में संशोधन बंद किया जाए।
  • आर्थिक पैकेज में रेल कर्मचारियों के लिए योजना प्रस्तावित किया जाए।
  • कोरोना काल में ड्यूटी कर रहे रेल कर्मचारियों को 50 लाख का जीवन बीमा दिया जाए।
  • गृह मंत्रालय के अंतर्गत दिये गये निर्देश मुताबिक कर्मचारियों को ड्यूटी पर बुलाना सुनिश्चित किया जाए।
हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के श्रमिकों का आंदोलन

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7 जून को हरियाणा स्वास्थ्य विभाग में ठेका पर काम रहे श्रमिकों ने सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित सिविल अस्पतालों के बाहर प्रदर्शन किया।

संघर्ष की अगुवाई स्वास्थ्य ठेका कर्मचारी यूनियन कर रही है।

इस प्रदर्शन में, स्वास्थ्य विभाग के सिक्योरिटी गार्ड, सफाई कर्मचारी, वार्ड सर्वेंट, कम्प्यूटर आपरेटर, क्लर्क, इलेक्ट्रीशियन, धोबी, माली, लिफ्टमैन, प्लंबर, चपरासी आदि सहित सभी ठेके कर्मचारी व अन्य श्रमिक शामिल हुए।

प्रदर्शनकारियों ने सी.एम.ओ. और उपायुक्त के ज़रिए हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन दिया।

गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक द्वारा 30 अप्रैल को प्रदेश के सिविल सर्जन को पत्र लिखकर सिक्योरिटी गार्ड को छोड़ बाकी सहायक स्टाफ यानी ठेके पर लगे कर्मचारियों के स्थान पर नये सिरे से भर्ती करने के लिये 27 फरवरी को भेजी गाइडलाइंस के अनुसार टेंडर प्रक्रिया शुरू करने के आदेश जारी किये हैं। सिविल सर्जन ने इस पर कार्यवाही भी शुरू कर दी है। महानिदेशक ने 13 मई को होमगार्ड के कमांडेंट को पत्र लिखकर विभाग में 3200 सिक्योरिटी गार्ड की जगह होम गार्ड वालिंटियर को लगाने के लिये भी लिखा है।

ज्ञापन में मांग की गई है कि सिक्योरिटी गार्ड की जगह होमगार्ड वालंटियर नियुक्त करने के फैसले पर रोक लगायी जाए। सभी 3200 सिक्योरिटी गार्ड की सेवायें जारी रखी जाएं। स्वास्थ्य विभाग के सभी श्रमिकों की नौकरी सुरक्षित की जाए। ठेका श्रमिकों को स्वास्थ्य विभाग के पे-रोल पर लाकर उनकी नौकरियों को नियमित किया जाये। न्यूनतम वेतन 21 हजार रुपये महीना सुनिश्चित किया जाये।

गन्ने के बकाया भुगतान हेतु किसानों का प्रदर्शन

Kidi Suger

किसान-मज़द़ूर संघर्ष कमेटी पंजाब की अगुवाई में, किसानों ने पंजाब के जिला गुरूदासपुर स्थित कीड़ी अफगाना मिल के समक्ष, 7 जून सुबह से 8 जून शाम 5 बजे तक धरना दिया। यह धरना गन्ने की बकाया राशि का भुगतान पाने के लिये आयोजित किया गया था।

किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी के प्रदेश उपाध्यक्ष सविदर सिंह चुताला ने बताया कि पंजाब के शुगर मिलों पर किसानों का करीब 700 करोड़ रुपए बकाया है। इसमें से 262 करोड़ रुपए सरकारी मिलों पर तो 438 करोड़ रुपए प्राइवेट मिलों पर है। कीड़ी मिल पर पुराना बकाया 55 करोड़ है जबकि 147 करोड़ नया बकाया है।

किसानों को गन्ने की बकाया राशि न मिलने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति काफी दयनीय हो चुकी है। वे आढ़तियों से ब्याज पर पैसा लेकर अपना गुजारा कर रहे हैं। ऊपर से लॉकडॉउन के कारण उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।

अंत में, 8 जून दोपहर को कमेटी के पदाधिकारियों और मिल प्रबंधन के बीच बैठक हुई। इस दौरान सात करोड़ रुपये जारी किए गए। इसके बाद किसानों ने धरना ख़त्म कर दिया।

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