अधिकारों की हिफ़ाज़त में संघर्ष

छंटनी के ख़िलाफ़ धरना

9 जून की रात को कर्नाटक के श्रीरंगापट्टनम स्थित यूरो क्लोथिंग कंपनी-2 के प्लांट के बाहर 1200 से ज्यादा श्रमिकों के गैर-कानूनी तरीके से नौकरी से हटाए जाने के विरोध में महिला श्रमिकों ने रात भर धरना दिया। श्रमिकों की मांग है कि निकाले गए सहकर्मियों को काम पर वापस लिया जाए। ये श्रमिक बीते 10 साल से इस प्लांट में काम कर रहे हैं।

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गौरतलब है कि यूरो क्लोथिंग कंपनी-2 के प्लांट का मालिक गोकलदास एक्सपोर्ट समूह है। यह कंपनी दुनिया के सबसे महंगे और प्रसिद्ध विदेशी ब्रांड के परिधानों का अमरीका और यूरोप को एक्सपोर्ट करती है। यह कंपनी देश में परिधान तैयार करने वाली प्रमुख कंपनियों में से एक है। परिधान तैयार करने वाले इस समूह के 20 से ज्यादा प्लांट हैं। इन प्लांटों में 20,000 से ज्यादा महिलाएं काम करती हैं।

कपंनी ने छंटनी की आधिकारिक घोषणा 8 जून को की।

श्रमिकों का कहना है कि लाॅकडाउन में ढील के साथ कंपनी को 5 मई को चालू करने की अनुमति मिली। प्रबंधन ने श्रमिकों को ड्यूटी के लिए बुलाया, बावजूद इसके कि सार्वजनिक परिवहन का संचालन बंद था। केवल 30 प्रतिशत श्रमिकों को काम दिया गया। उन्हें काम करने की अवधि के लिए मज़दूरी के 50 प्रतिशत का ही भुगतान किया गया। जबकि इस प्लांट के किसी भी श्रमिक को लाॅकडाउन के दौरान कोई मज़दूरी नहीं दी गई है।

गारमेंट एसोसियेशन ट्रेड वर्कर यूनियन का कहना है कि यह छंटनी श्रम कानूनों का उल्लंघन करती है। उत्पादन न होने की दशा में श्रमिकों को उनके वेतन का 50 प्रतिशत भुगतान किया जाना चाहिए। श्रम कानून के मुताबिक, 100 से ज्यादा श्रमिकों वाली कंपनी को छंटनी के लिए सरकार की अनुमति की आवश्यकता होती है, लेकिन कंपनी ने इसकी ज़रूरत ही नहीं समझी।

समान वेतन की मांग को लेकर सरकार को पत्र

9 जून को यूनाइटेड नर्सेस एसोसियेशन ने समान वेतन का भुगतान किए जाने की मांग को लेकर सरकार को पत्र लिखा।

गौरतलब है कि 5 जून को महाराष्ट्र सरकार के मेडिकल शिक्षा और शोध विभाग ने ग्रेटर मुंबई के नगर-निगम के कोविड-19 अस्पतालों के लिए नर्स के पद के लिये आवेदन आमंत्रित किये थे। आवश्यक योग्यता सरकारी, अर्ध-सरकारी और नगर-निगम के संस्थानों से जी.एन.एम., बी.एस.सी., एम.एस.सी. बताई गई। इस अस्थायी पद के लिए 30,000 रुपए एकमुश्त वेतन प्रतिमाह तय किया गया है।

इस पत्र के ज़रिए यूनाइटेड नर्सेज एसोसिएशन ने महाराष्ट्र सरकार को याद दिलाया है कि ग्रेटर मुंबई के नगर-निगम के कोविड-19 अस्पतालों में काम करने वाली नर्सों के वेतनमान में हाल ही में संशोधन किया गया है। यह वेतनमान 30,000 रुपए से बढ़ाकर 50,000 रुपए प्रति महीना किया गया है।

यूनाइटेड नर्सेज एसोसिएशन ने मांग की है कि :

  • ग्रेटर मुंबई के नगर-निगम के कोविड-19 अस्पताल में नियुक्त होने वाले नर्सों का वेतनमान 50,000 रुपए प्रति महीना किया जाए।
  • कोविड-19 अस्पतालों में रोगियों की अच्छी सेवा करने के लिए नर्सिंग पर्यवेक्षक, सिस्टर इनचार्ज, फ्लोर सुपरवाइजर, नर्सिंग सुपरिटेंडेंट आदि की भी ज़रूरत होगी। इन पदों के लिए भी भर्ती करनी चाहिये। इन पदों पर अनुभवी बी.एस.सी. और एम.एस.सी. नर्स को नियुक्त करना चाहिए। उनको क्रमशः 65,000 रुपये और 75,000 रुपए प्रतिमाह एकमुश्त वेतनमान तथा दूसरे सारे बेनिफिट देने चाहियें।
  • इन पदों पर प्राइवेट संस्थानों से नर्सिंग पाठ्यक्रम पूरा करने वाले अभ्यार्थियों को आवेदन करने की अनुमति दी जाए। वे भी प्रशिक्षित हैं और नर्सिंग सेवा देने के क़ाबिल हैं।

पत्र के अंत में, उन्होंने कहा है कि राज्य में ऐसे प्रशिक्षित और क़ाबिल नर्सों की संख्या 1000 से ज्यादा है, जिन्होंने कोविड-19 अस्पतालों में काम करने के लिए अपनी स्वीकृति प्रदान की है।

कोयला उद्योग के निजीकरण के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन

10 जून को देश भर में कोयला मजदूरों ने विरोध दिवस मनाया। कोयला उद्योग का निजीकरण करने के इरादे से, केन्द्र सरकार द्वारा निजी कंपनियों को कोयला खनन करने की इजाज़त देने और केन्द्रीय खान नियोजन और डिजाइन संस्थान नवरत्न कंपनी (सी.एम.पी.डी.आई. – सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इन्स्टीच्यूट) को कोल इंडिया से अलग करने के ख़िलाफ़ यह देशव्यापी विरोध दिवस मनाया गया।
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कोयला उद्योग क्षेत्र जैसे कोरबा, कुसमुंडा, दीपका व गेवरा आदि में कोयला मज़दूरों ने काला बिल्ला लगाकर धरना, प्रदर्शन, गेट मीटिंग आदि किए। 11 जून को देशभर में काला दिवस मनाने की योजना है। कोयला खनन का निजीकरण करने की केन्द्र सरकार की मज़दूर-विरोधी, राष्ट्र-विरोधी और लोक-विरोधी नीति के खि़लाफ़ पुतला दहन किया जाएगा।

इस संघर्ष की अगुवाई केंद्रीय श्रमिक संगठन एटक, सीटू, इंटक, एच.एम.एस., यू.टी.यू.सी., टी.यू.सी.सी. और एन.एफ.आई.टी.यू. से जुड़ी कोयला क्षेत्र की ट्रेड यूनियनें संयुक्त रूप से कर रही हैं।

बी.एम.एस. से जुड़ी कोयला क्षेत्र की यूनियन भी इन्हीं मांगों को लेकर कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं।

एटक के राष्ट्रीय सचिव विद्या सागर गिरि ने मज़दूर एकता लहर को बताया कि “कोयला मज़दूरों के आंदोलन का मुख्य उद्देश्य है देश के प्राकृतिक संसाधनों को देशी-विदेशी पूंजीपतियों के मुनाफों के लिए उनके हाथों में सौंपने के सरकार के इन प्रयासों को रोकना। पहले कोयला खनन निजी क्षेत्र में हुआ करता था। तब निजी पूंजीपति मालिकों के मुनाफों के लिए अराजक ढंग से संरक्षित कोयला भंडार को बर्बाद कर दिया गया। … कोयला मज़दूरों ने निजी क्षेत्र के खनन उद्योग में होने वाले उत्पीड़न को देखा है। अब पुनः इस क्षेत्र का निजीकरण करना राष्ट्रहित और मज़दूरों के ख़िलाफ़ है।”
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हिन्द मजदूर सभा से जुड़ी राष्ट्रीय कोयला मज़दूर यूनियन के प्रमुख साथी गजेन्द्र प्रसाद सिंह ने बताया कि आज सैकड़ों श्रमिकों ने हिन्दोस्तान की सरकार के मज़दूर-विरोधी फैसले के ख़िलाफ़ बोकारो स्थित सी.सी.एल. महाप्रबंधक के कार्यालय तक मोर्चा निकाला। प्रधानमंत्री जी के नाम ज्ञापन सौंपा।

ट्रेड यूनियनों ने उपरोक्त मांगों के अलावा, कोयला उद्योग में काम कर रहे सभी ठेका मज़दूरों को हाईपावर कमिटी की सिफारिशों के आधार पर मज़दूरी का भुगतान सुनिश्चित करने, मृतक कर्मचारी के आश्रित को नौकरी देने की स्कीम को बहाल करने, राज्य सरकारों द्वारा श्रम कानूनों को निलंबित करने के कदमों पर रोक लगाने, श्रम कानूनों में पूंजीपतियों के हित में बदलाव करने पर रोक लगाने, आयकर के दायरे से बाहर सभी लोगों के बैंक खातों में अगले 6 महीनों तक 7500 रुपए नगद ट्रांसफर करने और सभी ज़रूरतमंद परिवारों के व्यक्तियों को प्रति व्यक्ति 10 किलो अनाज अगले 6 महीने तक दिए जाने की गारंटी करने की मांगे भी उठाई हैं।

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