निजीकरण के ख़िलाफ़ श्रमिकों का संघर्ष

बिजली क्षेत्र के निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन

पंजाब राज्य बिजली बोर्ड के कर्मचारी 16 जून को विद्युत अधिनियम (संशोधन) विधेयक-2020 के ख़िलाफ़ पूरे राज्य में प्रदर्शन करने जा रहे हैं। इन प्रदर्शनों की अगुवाई पंजाब स्टेट इलेक्ट्रीसिटी बोर्ड इम्पलाइज ज्वाइंट फोरम कर रही है।

ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन (ए.आई.पी.ई.एफ.) ने देशभर के बिजली कर्मचारियों व उनके संगठनों से विद्युत अधिनियम (संशोधन) विधेयक-2020 का पुरजोर विरोध करने का बुलावा दिया है।

Guru_Harsahay Punjab_for web

हाल ही में केन्द्र सरकार विद्युत अधिनियम-2003 में संशोधन करके एक नया विद्युत अधिनियम (संशोधन) विधेयक-2020 लेकर आयी है। यह विधेयक बिजली वितरण व बिजली उत्पादन का निजीकरण करने और कंपनियों को बिजली दरों का निर्धारण अपने स्तर पर करने की छूट देता है। यह उद्योगों पर लगाये जाने वाले सरचार्जों को कम करने की भी बात करता है। विधेयक के अधिनियम बन जाने के बाद लोगों की रोजाना उपयोग की घरेलू बिजली दर आज के स्तर से काफी बढ़ जाएगी। जबकि उद्योगों को चलाने वाले पूंजीपतियों के लिए यह दर कम हो जाएगी। एक अनुमान के अनुसार घरेलू बिजली दर 10 रुपये प्रति यूनिट तक बढ़ सकती है।

किसान संगठनों में इस विधेयक को लेकर काफी गुस्सा है। वे मांग कर रहे हैं कि (संशोधन) विधेयक-2020 को खारिज किया जाए।

पंजाब के बिजली कर्मचारियों ने 9 जून को पूरे पंजाब में इस विधेयक के विरोध में पावरकॉम दफ्तरों पर धरना देकर केन्द्र सरकार का पुतला दहन किया। बिजली कर्मचारियों का कहना है कि बिजली जीवन की मूलभूत ज़रूरत है। बिजली उत्पादन और वितरण एक ज़रूरी सेवा है। सभी लोगों को मुनासिब क़ीमत पर बिजली उपलब्ध कराना राज्य की ज़िम्मेदारी है। बिजली को निजी कंपनियों को ज्यादा से ज्यादा फ़ायदा पहुंचाने का साधन नहीं बनाना चाहिए।

पंजाब स्टेट इलेक्ट्रीसिटी बोर्ड इम्पलाइज ज्चाइंट फोरम केन्द्र सरकार से बिजली अधिनियम-2020 पर पुनर्विचार करने की मांग कर रहा है। उनका कहना है कि यदि केंद्र सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती है तो 16 जून को पटियाला में पंजाब राज्य बिजली बोर्ड के मुख्यालय पर प्रदर्शन किया जाएगा। 19 से 30 जून तक वर्क-टू-रुल लागू किया जाएगा और बोर्ड प्रबंधन से फील्ड में आने वालों को काले झंडे दिखाए जाएंगे। जुलाई के दूसरे सप्ताह में एक दिवसीय हड़ताल की जाएगी। 3 जुलाई को नेशनल स्तर पर बिजली संशोधन विधेयक-2020 के विरोध में रोष रैलियां आयोजित की जाएंगी।

आयुध निर्माण फैक्ट्रियों के निजीकरण के खि़लाफ़ संघर्ष का ऐलान

देश की सभी आयुध निर्माण फैक्ट्रियों का निजीकरण करने के केंद्र सरकार के फ़ैसले का आल इंडिया डिफेंस इंप्लाइज़ फेडरेशन (ए.आई.डी.ई.एफ.), इंडियन नेशनल डिफेंस वर्कर्स फेडरेशन (आई.एन.डी.डब्ल्यू.एफ.) और भारतीय प्रतिरक्षा मज़दूर संघ (बी.पी.एम.एस.) संयुक्त रूप से विरोध कर रहे हैं।

ordinance_for web

आयुध निर्माण फैक्ट्रियों के कर्मचारी इस बात पर जोर देते आ रहे हैं कि रक्षा उत्पादन क्षेत्र देश के लिए रणनैतिक तौर पर महत्वपूर्ण है और इसको निजी कंपनियों के हाथों में नहीं सौंपा जाना चाहिए। सरकार के आयुध निर्माण फैक्ट्रियों के निगमीकरण के ज़रिए निजीकरण करने के ख़िलाफ़ आयुध फैक्ट्री के श्रमिक बीते साल जनवरी व अगस्त महीने में दो बार हड़ताल कर चुके हैं। अब उन्होंने ऐलान किया है कि अगर सरकार ने निगमीकरण के ज़रिए निजीकरण के अपने क़दम पीछे नहीं हटाए तो आयुध फैक्ट्री श्रमिकों की यह तीसरी अनिश्चितकालीन हड़ताल होगी।

9 जून को रक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त रक्षा सचिव ने एक पत्र भेजकर आयुध निर्माणी बोर्ड (ओ.एफ.बी.) के चेयरमैन को ए.आई.डी.ई.एफ., आई.एन.डी.डब्ल्यू.एफ. और बी.पी.एम.एस. के संयुक्त मोर्चे के साथ बैठक करने के निर्देश दिए थे। लेकिन संयुक्त मोर्चे ने 11 जून को पत्र लिखकर इस बैठक में जाने से इनकार कर दिया है।

संयुक्त मोर्चे ने केंद्र के इस फै़सले के विरोध में देश की सभी 41 आयुध निर्माण फैक्टियों में अनिश्चितकालीन हड़ताल का बुलावा दिया है। अनिश्चितकालीन हड़ताल को लेकर सभी यूनियन 8-17 जून के बीच अपने-अपने संस्थानों में मतदान कर रहे हैं।

जबलपुर की गन कैरिज फैक्टरी में 12 जून को हड़ताल को लेकर मतदान होगा।

श्रमिक संगठनों ने हड़ताल के लिए जुलाई माह का दूसरा हफ्ता तय किया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *