अधिकारों की हिफ़ाज़त में संघर्ष

दिल्ली सरकार ने अतिथि शिक्षकों को ड्यूटी से वंचित किया

दिल्ली सरकार के अतिथि शिक्षक गर्मी की छुट्टियों के बाद वापस ड्यूटी पर न लिए जाने के कारण काफी गुस्से में हैं।

शिक्षा विभाग द्वारा कोविड-19 के चलते विद्यालयों को 31 जुलाई तक बंद रखने के आदेश दिए गये हैं जबकि स्थाई शिक्षकों को ऑन ड्यूटी मानते हुए घर से ऑन लाइन कक्षाएं संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।

अतिथि शिक्षक प्रतिनिधि डॉ रचना का कहना है कि शिक्षा विभाग द्वारा जारी परिपत्र में गेस्ट टीचर्स की ड्यूटी के बारे में कुछ स्पष्ट निर्देश न होने के कारण विद्यालय प्रमुख द्वारा गेस्ट टीचर्स को ऑन ड्यूटी न मानते हुए ऑन लाइन शिक्षण कार्य से वंचित किया गया है जबकि प्रत्येक वर्ष 1 जुलाई को गेस्ट टीचर्स को स्वतः रिन्यूअल देकर विद्यालय में ड्यूटी ज्वाइन कराया जाता रहा है।

अतिथि शिक्षकों का कहना है कि उनके साथ यह भेदभाव न्यायोचित नहीं है। वे पूरे साल एक स्थाई शिक्षक के समान प्रत्येक ज़िम्मेदारी और कर्तव्य को पूरा करते हैं। नये सत्र में 1 अप्रैल, 2020 को कोरोना संकट के चलते जब विद्यालयों को बंद रखा गया था तब भी 8 मई तक अतिथि शिक्षक अपनी सेवाएं देते रहे हैं।

कोविड-19 महामारी कानून के अनुसार केंद्र और राज्य सरकारों के ये स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी स्थाई या अस्थाई कर्मचारी को न तो नौकरी से हटाया जाए और न ही किसी का वेतन रोका जाए। दिल्ली के अतिथि शिक्षकों को 9 मई, 2020 के बाद कोई भुगतान नही दिया गया है। अब शिक्षकों को 1 जुलाई से काम न देकर सेवाओं से वंचित किया जा रहा है।

अतिथि शिक्षकों की मांग है कि उन्हें 9 मई से 30 जून तक के वेतन का भुगतान किया जाये तथा 1 जुलाई से विधिवत ड्यूटी ज्वाइन कराने और ऑनलाइन शिक्षण कार्य में सेवाएं देने हेतु आदेश पारित किए जाएं ताकि अतिथि शिक्षक बिना किसी मानसिक तनाव के पूरे साल शिक्षण कार्य को उत्कृष्टता के साथ पूरा कर सकें।

pharmacist_Pnjabi_1पंजाब में फार्मासिस्टों का आंदोलन

पंजाब के ग्राम विकास और पंचायत विभाग में ठेके पर काम करने वाले फार्मासिस्ट और अन्य कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर, 19 जून से लगातार जिला परिषदों पर पंजाब सरकार के ख़िलाफ़ धरना व प्रदर्शन कर रहे हैं। वे मांग कर रहे हैं कि उनकी नौकरी स्थाई की जाए। ग्रामीण स्वास्थ्य फार्मासिस्ट एसोसियेशन की अगुवाई में फार्मासिस्टों और कर्मचारियों के इस संघर्ष के चलते, कर्मचारी ड्यूटी का बहिष्कार कर रहे हैं।

एसोसियेशन के कार्यकर्ताओं ने बताया कि फार्मासिस्टों को मात्र 10,000 रुपए महीना तनख्वाह दी जा रही है। वे जिला परिषद के तहत आने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में काम करते हैं। कोविड-19 महामारी में वे भी अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों की भांति फ्रंट लाइन में खड़े होकर कोरोना महामारी के ख़िलाफ़ जंग लड़ रहे हैं। सबसे अधिक संवेदनशील वार्ड, आइसोलेशन वार्ड व क्वारंटाइन सेंटरों में ड्यूटी दे रहे हैं। लेकिन उनकी मांगें नहीं मानी जा रही हैं।

रूरल फार्मेसी अफ़सर एसोसिएशन पंजाब के अध्यक्ष ने कहा कि हमने लाखों रुपये खर्च करके डिग्रियां हासिल की हैं, लेकिन ऐसी डिग्री का क्या फ़ायदा है जबकि सरकार हमें पक्की नौकरी तक नहीं दे पा रही है।

ज्ञात रहे कि साल 2006 में पंजाब सरकार ने 1186 ग्रामीण डिस्पेंसरियों को पंचायत विभाग के अधीन ठेके पर दे दिया था। तब से लेकर आज तक लगभग 14 साल बीत जाने के बावजूद फार्मासिस्ट और अन्य कर्मचारियों को पक्का नहीं किया गया है।

बिहार के फार्मासिस्टों का अपने अधिकारों के लिये संघर्ष

9 जून से बिहार के फार्मासिस्ट और ए.एन.एम. (सहायक नर्स मिडवाईफ) अपने वेतनमान को बढ़ाए जाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इस हड़ताल की अगुवाई बिहार राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य स्कीम कार्यक्रम संघ कर रहा है।

ज्ञात रहे कि बिहार में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के बेहतर संचालन के लिये सरकार ने 2015 में 2136 आयुष चिकित्सकों, 1068 फार्मासिस्टों और 1068 ए.एन.एम. की नियुक्ति की थी। हाल ही में, स्वास्थ्य विभाग ने एक आदेश जारी करके संविदा फार्मासिस्टों की तनख्वाह को 37 हजार कर दिया, लेकिन राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आने वाले फार्मासिस्टों और ए.एन.एम. की तनख्वाह को नहीं बढ़ाया।

यूनियन ने बताया कि 2015 में नियुक्ति के वक्त आयुष विभाग ने डाक्टर की तनख्वाह 20,000 रुपये, फार्मासिस्टों की 12,000 रुपये एवं ए.एन.एम. की 11,500 रुपये निर्धारित की थी। जबकि स्वास्थ्य विभाग के तहत ठेके पर कार्यरत फार्मासिस्टों एवं ए.एन.एम. दोनों का मानदेय 30 हजार निर्धारित किया गया है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में नियुक्त आयुष डाक्टरों की तनख्वाह को बढ़ाकर, सामान्य चिकित्सकों के बराबर करने का आदेश जारी किया गया है। लेकिन राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में नियुक्त फार्मासिस्टों एवं ए.एन.एम. को छोड़ दिया गया है। यूनियन का कहना है कि जब तक वेतन की हमारी मांग पूरी नहीं होती तब तक फार्मासिस्ट व ए.एन.एम. हड़ताल पर रहेंगे।

Multipurpose_health_workers_Punjabबहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

पंजाब के बठिंडा में 2 जुलाई को मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर यूनियन की अगुवाई में कर्मचारियों ने सरकार से स्थायी नौकर की मांग करते हुए, सिविल अस्पताल परिसर में ज़ोरदार प्रदर्शन किया।

ये कर्मचारी बहुत ही कम वेतन पर बीते 10 सालों से स्वास्थ्य विभाग में काम कर रहे हैं। इससे पूर्व भी उन्होंने स्थायी किए जाने की मांग को लेकर सरकार को अनेक मांगपत्र दे चुके हैं। सरकार ने हर बार उन्हें अनदेखा किया है।

यूनियन की मांग रही है कि सरकार विभाग में नये पदों पर भर्ती करने से पहले लंबे समय से विभाग में काम कर रहे कर्मचारियों को वरिष्ठता के आधार पर स्थाई किया जाए। इस समय कर्मचारी, कोरोना वायरस के संक्रमण के ख़तरे का सामना करते हुए काम कर रहे हैं, इसलिए उन्होंने स्वास्थ्य बीमा की भी मांग उठाई है।

पटना के सफाई मज़दूरों की हड़ताल

बिहार के लखीसराय नगर परिषद के सफाई मज़दूर पटना नगर-निगम के सफाई कर्मचारियों के समान दैनिक मज़दूरी की मांग को लेकर 1 जुलाई से हड़ताल पर हैं।

हाल ही में, नगर परिषद ने मास्टर रोल एवं एन.जी.ओ. में काम करने वाले 170 सफाई कर्मचारियों की दैनिक मज़दूरी में 20 रुपये की वृद्धि की है। यह वृद्धि, कोरोना महामारी में बेहतर काम करने वाले मज़दूरों को कोरोना योद्धा का सम्मान बतौर की गई है। नगर परिषद के अनुसार मास्टर रोल एवं एन.जी.ओ. में काम करने वाले 170 सफाई कर्मचारियों की  दिहाड़ी पहले 340 रुपये थी और अब 360 रुपए है।

राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष ने कहा कि पटना नगर निगम सफाई कर्मियों को प्रतिदिन 427 रुपए की दर से मज़दूरी का भुगतान कर रहा है।

दैनिक मज़दूरी में वृद्धि को लेकर बीते छह महीने में सफाई कर्मियों की यह दूसरी हड़ताल है।

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