बिजली संयंत्र में विस्फोट से मज़दूरों की मौत

1 जुलाई, 2020 को तमिलनाडु के कडलूर जिले के नेवेली शहर में नेवेली लिग्नाइट कॉरपोरेशन इंडिया लिमिटेड के थर्मल पावर स्टेशन (टी.पी.एस.-2) में एक विस्फोट हुआ। यह भयानक हादसा सुबह 9.55 के करीब टी.पी.एस.-2 की इकाई 5 में हुआ।

छः मज़दूरों की घटना स्थल पर ही मौत हो गई और 17 से अधिक मज़दूर गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल मजदूरों को एन.एल.सी.आई.एल. जनरल अस्पताल में प्राथमिक उपचार दिया गया और बाद में इलाज के लिए चेन्नई के एक निजी अस्पताल में भेजा गया। इसके बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है और कुछ और मजदूरों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

कंपनी के एक बयान के अनुसार, टी.पी.एस.-2 को बंद किया गया था और मेंटेनेंस की गतिविधियाँ जारी थी। बॉयलर में विस्फोट के बाद आग लगी मेंएन.एल.सी. मेंटेनेंस टीम हताहत हुई। इनमें एक प्रबंधक, दो पर्यवेक्षक, तीन नियमित मज़दूर और 17 कॉन्ट्रैक्ट मज़दूर शामिल हैं।

टी.पी.एस.-2 की सात इकाइयाँ हैं। प्रत्येक इकाई की क्षमता 210 मैगावाट की है और कुल बिजली उत्पादन 1470 मैगावाट है। अकेले इस संयंत्र में लगभग 2,000 मज़दूर काम करते हैं, जिनमें प्रशासन और वितरण स्टाफ सदस्य भी शामिल हैं। एन.एल.सी. बहुत बड़ी संख्या में कॉन्ट्रैक्ट और अस्थायी मज़दूरों को भी नियुक्त करता है।

कोयला मंत्रालय ने एन.टी.पी.सी. के एक पूर्व निदेशक की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय जांच समिति गठित करने की सूचना दी है, ताकि दुर्घटना के कारणों की जांच की जा सके।

इसके अलावा, एन.एल.सी.आई.एल. के निदेशक (पावर) की अध्यक्षता वाले वरिष्ठ अधिकारियों की एक आंतरिक जांच समिति भी गठित की गई है। इस बीच, कंपनी ने कहा है कि टी.पी.एस.-2 स्टेज 2 की 210 मैगावाट की चारों इकाइयों को सुरक्षा ऑडिट के लिए तुरंत बंद करने का आदेश दिया गया है।

कुछ ही महीनों के भीतर इस संयंत्र में बॉयलर विस्फोट की यह दूसरी दुर्घटना है। 7 मई को, इसी संयंत्र में बॉयलर में हुए एक विस्फोट में पांच मज़दूरों की आग में झुलस कर मौत हुई थी और आठ अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पिछले 18 महीनों में टी.पी.एस.-2 में कुल पांच दुर्घटनाएं हुई हैं।

इन निर्मम मौतों और खतरनाक हादसों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन संयंत्रों में काम करने वाले मज़दूरों की सुरक्षा और जिन्दगी के प्रति प्रबंधन कितना लापरवाह और बेरहम है। मज़दूरों ने बताया कि प्लांट में सुरक्षा सुविधाओं की सख्त कमी है। यही कारण है कि एन.एल.सी. में मज़दूरों को लगातार भयानक दुर्घटनाओं का शिकार होना पड़ा है। उन्होंने सरकार और प्रबंधन पर संयंत्र में पर्याप्त सुरक्षा सुविधाओं की व्यवस्था और सभी उपायों को सख्ती से लागू करने की प्रक्रिया से समझौता करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि इस समय प्रबंधन का ध्यान पूरी तरह से कंपनी को निजी हाथों में सौंपने और उसके संचालन को आउटसोर्स करने पर केंद्रित है।

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