अधिकारों की हिफ़ाज़त में संघर्ष

भारतीय रेल के निजीकरण का विरोध में प्रदर्शन

16-17 जुलाई, 2020 को भारतीय रेल के निजीकरण के विरोध में पूरे देश में विरोध प्रदर्शन आयोजित किये गये।

भारतीय रेल के निजीकरण के विरोध में रेल चालकों ने 16 जुलाई को आल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन की अगुवाई में चित्तौड़गढ़, खड़गपुर, संतनगर, रतलाम, आदि रेलवे स्टेशनों पर धरना दिया और निजीकरण के विरोध में नारे लगाए।

धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने बताया कि सरकार ने 109 प्राइवेट रेलगाड़ियों का संचालन शुरू कर दिया है। सरकार भारतीय रेल को निजी हाथों में सौंपने की पूरी तैयारी कर रही है।

अंबिकापुर रेलवे स्टेशन पर प्रदर्शन

17 जुलाई, 2020 को मध्यप्रदेश के अंबिकापुर रेलवे स्टेशन पर रेलवे के निजीकरण के विरोध मेंए एक दिवसीय धरना आयोजित किया गया। इसकी अगुवाई यूनाइटेड फोरम ऑफ ट्रेड यूनियंस ने की। इसमें अलग-अलग सरकारी संस्थानों के कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।

प्रदर्शनकर्ताओं को संबोधित करते हुये वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा किये जा रहे रेलवे के निजीकरण से गरीबों को यात्रा के लिये मिलने वाला सहज, सुविधाजनक और सस्ती दरों का एक बड़ा साधन समाप्त हो जायेगा। रेलवे का निजीकरण जनता के हितों के साथ क्रूर मजाक है।

उन्होंने बताया कि सरकार का यह दावा है कि निजीकरण से 30 हजार करोड़ रुपए का निवेश आयेगा एवं रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध होंगे। यह दावा झूठा है क्योंकि रेल के निजी संचालक पूंजीपति अपने मुनाफ़ों को बढ़ाने के लिये कम से कम कर्मचारियों से काम करायेंगे। रेलवे की संपत्तियां जिसका निर्माण रेल मजदूरों ने किया हैए वह देशी-विदेशी काॅर्पोरेट घरानों को कौड़ियों के दाम पर बेच दिया जाएगा।

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