स्वास्थ्य कर्मी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं

पंजाब में ग्रामीण स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल

पंजाब में 23 जुलाई को राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एन.आर.एच.एम.) के कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर एक दिन की हड़ताल की। पटियाला, फतेहगढ़ साहिब, होशियारपुर, अबोहर, फाजिल्का, गुरदासपुर, कपूरथला सहित अन्य जिलों में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा सिविल अस्पतालों के बाहर धरना देकर उन्होंने पंजाब सरकार के विरुद्ध जमकर नारे लगाये।

यह हड़ताल एन.आर.एच.एम. इंप्लाइज एसोसिएशन पंजाब की अगुवाई में हुई। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी र्गइं तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे।

कर्मचारियों की मांग है कि सभी कर्मियों को स्थायी नियुक्ति देकर पूरी तनख्वाह दी जाए। सरकार ने दिहाड़ी के आधार पर काम करवाने के लिये, जिस नई भर्ती का विज्ञापन जारी किया है उसे तुरंत रद्द किया जाये तथा एसोसियेशन के नेताओं की मुख्यमंत्री के साथ बैठक तय करवाई जाए ताकि कर्मचारी अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकें।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुरक्षा से संबंधित, केंद्र सरकार की एक प्रमुख योजना है। इस योजना का लक्ष्य गांव-गांव में सुगमता से उपलब्ध, जवाबदेही वाली और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवायें मुहैया कराना है। इस योजना के तहत, कई कार्यक्रम जैसे प्रजनन, बाल स्वास्थ्य परियोजना, एकीकृत रोग निगरानी, मलेरिया, कालाजार, तपेदिक तथा कुष्ठ आदि के लिए एक ही स्थान पर सभी सुविधाएं प्रदान किये जाने का प्रावधान है। इस मिशन के तहत स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं जैसे आशा कार्याकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के अलावा, डाक्टर, फार्मासिस्ट, डाटा एंट्री आपरेटर, लैब टेक्नीसियन, स्टाफ नर्स, ए.एन.एम. आदि संविदा/ठेके पर काम करते हैं।

इन योजनाओं में काम कर रहे कर्मचारियों को सरकार ने नियमित कर्मचारी का दर्ज़ा नहीं दिया है। इस योजना के तहत काम करने वाले संविदा कर्मचारी, अभ्यासिक तौर पर स्थायी कर्मचारी के बराबर काम करते हैं। परन्तु इनको मिलने वाला मानदेय न्यूनतम वेतन से कम होता है।

एन.आर.एच.एम. इंप्लाइज एसोसिएशन पंजाब के मुताबिक, पूरे पंजाब में 9 हजार और प्रत्येक जिले में करीब 700 कर्मचारी ठेके पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

बरनाला सरकारी अस्पताल में काम करने वाले एक लैब टैक्नीशियन ने बताया कि हम पिछले 15 सालों से अधिक समय से एन.एच.आर.एम. के अधीन सभी शर्तों को पूरा करते हुए बहुत ही कम तनख्वाह पर सरकारी अस्पतालों में काम कर रहे हैं और कोरोना काल में भी फ्रंट लाइन पर काम कर रहे हैं।

बठिंडा में मेडिकल लैब टेक्नीशियन एसोसिएशन की अगुवाई में कर्मचारियों ने हड़ताल की और ब्लड बैंक के सामने प्रदर्शन किया। बठिंडा जिला एसोसिएशन के प्रधान ने कहा कि मानकों के अनुरूप सिविल अस्पताल व जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में लैब टेक्नीशियनों के कई पद खाली हैं। उन्होंने कहा कि नई भर्ती अधिक वेतन पर हो रही जबकि हमें कम सैलरी मिल रही है। उन्होंने बताया कि संविदा कर्मचारी स्थायी कर्मचारियों के बराबर काम करते हैं। इसके बावजूद उन्हें तनख्वाह, सुविधा आदि से वंचित करके भेदभाव किया जाता है। कोविड-19 के संकट के बीच, स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए वालंटियरों की भर्ती की जा रही है।

बिहार के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल

बिहार में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत काम करने वाले संविदा कर्मचारियों ने अपनी 16 सूत्री मांगों को लेकर 21 जुलाई को हड़ताल की। यह हड़ताल बिहार राज्य स्वास्थ्य संविदा कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर हुई।

इस हड़ताल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत, संविदा पर काम करने वाले ब्लाक स्वास्थ्य प्रबंधक, ब्लाक लेखा प्रबंधक, ब्लाक सामुदायिक उत्प्रेरक, ब्लाक अनुश्रवण एवं मूल्यांकन सहायक, पैरा मेडिकल कार्यकर्ता, लैब टेक्नीशियन, एकाउंटेंट, डाटा ऑपरेटर, एवं ए.एन.एम. आदि हड़ताल में शामिल हुए।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत काम करने वालों के वेतनमान का अंदाजा, हाल ही में बिहार राज्य स्वास्थ्य समिति के उस विज्ञापन से लगाया जा सकता है, जिसमें ब्लाक स्वास्थ्य प्रबंधक का वेतनमान 18,000, ब्लाक लेखा प्रबंधक का वेतनमान 12,500, ब्लाक सामुदायिक उत्प्रेरक (मोबीलाइजर) का वेतन 12,000 और वरिष्ठ टीबी प्रयोगशाला सुपरवाइज का वेतनमान 15,000 घोषित किया है।

बेतिया, बिहारीगंज, घैलाढ़, मधुबनी, सीतामढ़ी, किशनगंज, आरा, औरंगाबाद सहित बिहार के विभिन्न सिविल अस्पतालों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के सामने धरने प्रदर्शन हुए। हड़ताली कर्मचारियों ने सिविल सर्जन और जिला स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष के ज़रिए जिला पदाधिकारी को मांग पत्र भेजा।

इन कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में है, राज्य से लेकर स्वास्थ्य उपकेंद्र तक प्रबंधकीय कैडर कर्मियों को एक माह के समतुल्य प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जाए। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत सभी संविदा कर्मियों को पब्लिक हेल्थ मैनेजमेंट कैडर से समायोजित करते हुए उनकी सेवा को नियमित किया जाए। फिटमेंट कमेटी की अनुशंसा लागू की जाए। एन.एच.एम. के अंतर्गत कार्यरत चयनमुक्त सभी संविदा कर्मियों को बिना शर्त काम पर वापस लिया जाए। एन.एच.एम. कर्मी के सेवाकाल के दौरान मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को 25 लाख की क्षतिपूर्ति सहित परिवार के एक सदस्य को नौकरी दिया जाए, आदि।

बिहार राज्य स्वास्थ्य संविदा कर्मचारी महासंघ की अगुवाई में चल रहे इस संघर्ष के कारण, स्वास्थ्य मंत्रालय ने कुछ मांगों पर सहमति प्रदान करते हुए एक महीना के अंदर उन्हें पूरा करने का आश्वासन दिया है। आन्दोलनकारी नेताओं ने ऐलान किया है कि अगर स्वास्थ्य मंत्रालय के आश्वासनों को लागू नहीं किया जाता है, तो 23 अगस्त से सभी संविदा कर्मी फिर से हड़ताल पर जाएंगे।

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