अधिकारों की हिफ़ाज़त में संघर्ष

सरकार का एयर इंडिया के मज़दूरों पर बड़ा हमला

14 जुलाई को सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एयर इंडिया के प्रबंधन ने घोषणा की कि उसके कर्मचारियों को बिना-वेतन की छुट्टी पर जाने के लिए कहा जाएगा। इस छुट्टी की अवधि पांच साल तक चल सकती है।

प्रबंधन के एक आदेश के अनुसार, “स्थायी कर्मचारियों के लिए बिना वेतन और भत्ते के छुट्टी पर जाने की योजना (एल.डब्ल्यू.पी.) शुरू की जा रही है जिसके तहत कर्मचारियों को छः महीने की अवधि के लिये (जिसे 5 वर्ष तक का बढ़ाया जा सकता है) या दो साल की अवधि के लिए (जिसे 5 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है)। अवकाश की अवधि प्रबंधन की मर्जी पर तय की जाएगी।” यह आदेश कंपनी के सी.एम.डी. को कंपनी के नाम पर एक आदेश पारित करने का अधिकार देता है जिसके तहत वह “किसी भी कर्मचारी को… बीमार या बेकार हो जाने की वजह से उसकी…. उपयुक्तता, कार्यकुशलता, क़ाबिलियत, काम की गुणवत्ता, उसका स्वास्थ्य, अतीत में कभी ड्यूटी पर न आने की घटना, इत्यादि के आधार पर तय कर सकता है।”

समाचार रिपोर्टों के अनुसार, विभिन्न क्षेत्रों के मुख्यालयों और क्षेत्रों के क्षेत्रीय निदेशकों को इन मापदंडों के आधार पर प्रत्येक कर्मचारी का मूल्यांकन करने के लिए कहा गया है। ऐसे कर्मचारियों की पहचान करने के लिए भी कहा गया है जिन्हें बिना वेतन के छुट्टी पर जाने का आदेश दिया जाना चाहिए।

एयर इंडिया प्रबंधन ने कंपनी में “बेकार मज़दूरों” की पहचान करने के लिए एक समिति का गठन किया है। आदेश में आगे लिखा है कि “ऐसे कर्मचारियों के नामों को जनरल मैनेजर के पास भेजना होगा, ताकि वह एयर इंडिया के सी.एम.डी. से इसकी इजाज़त ले सकें”। जो लोग अपनी “मर्जी” से योजना का इस्तेमाल करना चाहते हैं, उन्हें 15 अगस्त तक अपने विभाग प्रमुखों को सूचित करना होगा।

इस क़दम को “छुट्टी”’ कहना सच्चाई को झुठलाना है। बिना वेतन की छुट्टी में स्वेच्छा का सवाल ही नहीं हो सकता। इसे जबरदस्ती से लागू किया जा रहा है। यह साफ है कि एयर इंडिया का प्रबंधन इस योजना के ज़रिये बहुत बड़े पैमाने पर एयर इंडिया के स्थायी मज़दूरों की छंटनी  की योजना बना रहा है। गौरतलब है कि एयर इंडिया की सहायक कंपनियों सहित इसमें करीब 11,000 स्थायी मज़दूर हैं। इसके अलावा एयर इंडिया में 4,200 से अधिक ठेका मज़दूर काम कर रहे हैं।

वेतन के बिना दी जाने वाली छुट्टी के इस नोटिस में यह भी लिखा है कि: “बिना वेतन की छुट्टी के दौरान, कर्मचारियों को पेंशन, ग्रेच्युटी, भविष्य निधि, वेतन वृद्धि, महंगाई भत्ता या अन्य किसी भी बुनियादी सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा। छुट्टी पर भेजे गए वरिष्ठ कर्मचारी अपने जूनियर कर्मचारी साथियों की तुलना में अपनी वरिष्ठता भी खो देंगे।” जो कर्मचारी स्टॉफ क्वार्टर में रहते हैं उन्हें क्वार्टर खाली करना होगा या मौजूदा बाज़ार के मूल्य के अनुसार एयरलाइन को किराया देना होगा।

इस बिना-वेतन की छुट्टी के दौरान, कोई कर्मचारी एयर इंडिया की इजाज़त के बिना कोई अन्य काम नहीं कर सकता।

एयर इंडिया के कर्मचारी प्रबंधन के इस मज़दूर-विरोधी क़दम से बेहद गुस्से में हैं, जो कि साफ तौर पर केंद्र सरकार के इशारे पर लागू किया जा रहा है।

पायलट और केबिन-क्रू के कर्मचारियों ने आशंका जताई है कि उन्हें निशाना बनाए जाने की संभावना है।

इससे पहले 11 जुलाई को एयर इंडिया ने केबिन-क्रू के 200 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। अप्रैल 2020 तक एयर इंडिया के पास लगभग 4000 केबिन-क्रू और 1800 पायलट थे।

केंद्र सरकार लंबे समय से एयर इंडिया को निजी कंपनियों को बेचने की कोशिश कर रही है। एयर इंडिया के निजीकरण की सरकार की योजनाओं में पायलटों, केबिन-क्रू और कंपनी के अन्य कर्मचारियों का प्रतिरोध सबसे बड़ा कांटा रहा है। सरकार और एयर इंडिया कोरोना वायरस महामारी का फ़ायदा उठाते हुए, मज़दूरों और उनके अधिकारों पर बर्बर हमले करने के लिए कर रहे हैं। एयर इंडिया के कर्मचारी इन हमलों का डटकर विरोध भी कर रहे हैं।

कोविड-19 के बीच टी.एस.एम.टी. के मज़दूरों की छंटनी की गई

टी.एस.एम.टी. टेक्नोलॉजी (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड ने जून के तीसरे सप्ताह में अपने 100 स्थायी मज़दूरों की छंटनी कर दी। छंटनी किए गए मज़दूरों में शॉप फ्लोर लाइन लीडर, सहायक लाइन लीडर, गुणवत्ता नियंत्रक और कुछ ऑपरेटर शामिल हैं।

चेन्नई के पास चेंगलपट्टू में महिंद्रा वल्र्ड सिटी में स्थित यह कंपनी, ताईवान स्थित मल्टी-नेशनल कंपनी टी.एम.एस.टी. टेक्नोलॉजी की सहायक कंपनी है। टी.एम.एस.टी. यह कंपनी मोबाइल फोन, मदर बोर्ड और टच स्क्रीन सहित विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों जैसे उत्पादों का संयोजन करती है। यह कंपनी जीओ, एम.आई. और सैमसंग जैसे विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक ब्रांडों के लिए एक आपूर्तिकर्ता है।

पिछले कई वर्षों से यह कंपनी मनमर्ज़ी से मज़दूरों को नौकरी पर रखने और निकाल देने (हायर एंड फायर) की नीति पर काम कर रही है। शुरुआत में इस कंपनी में 2,500 मज़दूर थे, जो कि घटकर अब केवल 450 ही रह गए हैं, जिनमें अन्य सेवा मज़दूर भी शामिल हैं। मज़दूरों में से लगभग 50 महिलाएं हैं। मज़दूरों की कुशलता की तुलना में उन्हें बेहद कम वेतन दिया जाता है। अधिकांश मज़दूरों का वेतन 12,000 से 14,000 रुपये प्रति माह के बीच है।

कंपनी ने छंटनी किये गए मज़दूरों को अचानक काम से निकाले जाने की एवज़ में कोई भी अतिरिक्त भुगतान नहीं किया है और उन्हें काम से अचानक हटा दिया है। 100 मज़दूरों की छंटनी अचानक किये जाने से हुई इस नाइंसाफी से मज़दूर बेहद गुस्से में हैं।

छंटनी किये गए मज़दूरों को तुरंत काम पर वापस लेने की मांग को लेकर मज़दूरों ने फैक्ट्री के सामने धरना प्रदर्शन आयोजित किया। पुलिस द्वारा आपदा प्रबंधन कानून के तहत मज़दूरों को गिरफ्तार करने की धमकी दिए जाने के बावजूद मज़दूरों ने दोपहर 3 बजे से 9 बजे तक गेट पर अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा। मज़दूरों ने अपना धरना प्रदर्शन तब ख़त्म किया जब कंपनी प्रबंधन ने लॉकडाउन हटने के तुरंत बाद इस मामले पर चर्चा करने का वादा किया।

इस बीच, मज़दूर अपने हितों की रक्षा के लिए अपनी यूनियन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।