स्वतंत्रता दिवस 2020 के अवसर पर :

नए नज़रिए से सोचने की ज़रूरत

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 15 अगस्त, 2020

73 वर्ष पहले जब हिन्दोस्तान को राजनीतिक आज़ादी मिली थी, तो तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरु ने ऐलान किया था कि हिन्दोस्तान के लोगों के दुख-दर्द ख़त्म हो गए हैं। उन्होंने ऐलान किया था कि हिन्दोस्तान की सदियों से दबी हुयी आत्मा अब मुक्त हो गयी है। उन्होंने बड़ी भावुकता के साथ लोगों से आह्वान किया था कि ग़रीब, अज्ञानता, बीमारी व असमानता को मिटाने तथा हर आँख से आंसू को पोंछने की परियोजना में सहयोग दें।

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केंद्र सरकार के किसान विरोधी अध्यादेशों पर क्रांतिकारी किसान यूनियन (पंजाब) के अध्यक्ष से साक्षात्कार

हाल में केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि क्षेत्र से संबंधित अध्यादेशों के बारे में मज़दूर एकता लहर ने क्रांतिकारी किसान यूनियन (पंजाब) के अध्यक्ष, डा. दर्शन पाल के साथ बातचीत की। साक्षात्कार की कुछ मुख्य बातें यहां पेश की जा रही हैं। म.ए.ल. : हाल ही में केन्द्र सरकार ने

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केंद्र सरकार के किसान विरोधी अध्यादेशों पर अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति के कार्यकारी अध्यक्ष से साक्षात्कार

हाल में केन्द्र सरकार द्वारा पारित कृषि क्षेत्र से संबंधित अध्यादेशों के बारे में मज़दूर एकता लहर ने अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति के कार्यकारी अध्यक्ष डा. सुनीलम के साथ बातचीत की। साक्षात्कार में की गयी मुख्य बातें यहां पेश की जा रही हैं। म.ए.ल. : जून महीने के आरम्भ में

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केंद्र सरकार के किसान विरोधी अध्यादेशों पर स्वाभिमानी शेतकारी संघटना के अध्यक्ष से साक्षात्कार

हाल में केन्द्र सरकार द्वारा पारित, कृषि क्षेत्र से संबंधी  अध्यादेशों के बारे में मज़दूर एकता लहर ने स्वाभिमानी शेतकारी संघटना के अध्यक्ष, पूर्व सांसद और अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के संस्थापक सदस्य, राजू शेट्टी के साथ बातें की। साक्षात्कार की मुख्य बातें यहां पेश की जा रही

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On the occasion of Independence Day, 2020 :

Time to Think Afresh

Statement of the Central Committee of the Communist Ghadar Party of India, 15th August, 2020

When India gained political independence 73 years ago, Prime Minister Nehru declared from the ramparts of the Red Fort that the pain of the Indian people has ended.  He declared that the long suppressed soul of India has been liberated. He passionately called on the people to support the project of ending poverty, ignorance, disease, inequality and wiping every tear from every eye.

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ਕੋਲੇ ਦਾ ਨਿੱਜੀਕਰਣ ਅਤੇ ਖਾਨ ਮਜ਼ਦੂਰਾਂ ਵਲੋਂ ਇਸਦਾ ਵਿਰੋਧ

ਕੋਲ ਇੰਡੀਆ ਲਿਮਿਟਿਡ (ਸੀ.ਆਈ.ਐਲ.) ਅਤੇ ਸਿੰਗਰੇਨੀ ਕੋਲਰੀਜ਼ ਕੰਪਨੀ ਲਿਮਿਟਿਡ (ਐਸ.ਸੀ.ਸੀ.ਐਲ.) ਦੇ 5 ਲੱਖ ਤੋਂ ਵੱਧ ਮਜ਼ਦੂਰ 18 ਅਗਸਤ ਨੂੰ ਇੱਕ ਦਿਨ ਲਈ ਹੜਤਾਲ਼ ਕਰਨਗੇ। ਯੂਨੀਅਨਾਂ ਨੇ ਪਹਿਲੀ ਅਗਸਤ ਨੂੰ ਹੜਤਾਲ਼ ਦਾ ਨੋਟਿਸ ਦੇ ਦਿੱਤਾ ਹੈ। ਉਸ ਦਿਨ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਮਜ਼ਦੂਰਾਂ ਨੇ ਨਿਯਮ ਅਨੁਸਾਰ ਕੰਮ, ਰੈਲੀਆਂ, ਗੇਟ ਮੀਟਿੰਗਾਂ ਅਤੇ ਖਾਨ

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ਬੈਂਕਾਂ ਦਾ ਰਲੇਵਾਂ ਅਤੇ ਵਧ ਰਿਹਾ ਪ੍ਰਜੀਵੀਪਣ

ਸਾਡੇ ਦੇਸ਼ ਵਿਚ ਸਰਬਜਨਕ ਖੇਤਰ ਦੇ ਬੈਂਕਾਂ ਦੀ ਵਿਲੀਨਤਾ (ਰਲੇਵਾਂ) ਅਤੇ ਨਿੱਜੀਕਰਣ ਦੇ ਰਾਹੀਂ ਬੈਂਕਾਂ ਦੀ ਪੂੰਜੀ ਦਾ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਕੇਂਦਰੀਕਰਣ ਕੀਤਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਇਸਦਾ ਮਕਸਦ ਕੁੱਝ ਮੁੱਠੀ-ਭਰ ਦਿਓਕੱਦ ਅਜਾਰੇਦਾਰ ਬੈਂਕਾਂ ਬਣਾਉਣਾ ਹੈ, ਜੋ ਆਪਸੀ ਮੁਕਾਬਲੇ ਅਤੇ ਸਹਿਯੋਗ ਦੇ ਜ਼ਰੀਏ ਵੱਧ-ਤੋਂ-ਵਧ ਮੁਨਾਫੇ ਬਣਾਉਣਗੀਆਂ। ਇਸਦੇ ਨਤੀਜੇ ਲਾਜ਼ਮੀ ਤੌਰ ਉਤੇ ਹੀ

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देशभर में मज़दूरों और किसानों के जोरदार विरोध प्रदर्शन

9 अगस्त को देश के किसानों ने ‘अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति’ की अगुवाई में, ‘कारपोरेट भगाओ-किसानी बचाओ’ का नारा लगाते हुए अपने-अपने राज्यों के जिलों, तहसीलों और पंचायतों पर जमकर प्रदर्शन किया। साथ ही साथ, ‘देश बचाओ’ के नारे के तहत, केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों की अगुवाई में लाखो-लाखो

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Real aim behind coal privatisation

When profitability of coal mining was low, state monopoly was established
Now when profitability is high, privatisation is being pursued

Coal mining is today an extremely profitable industry in India. It has been estimated that there will be an ever increasing demand for coal by different branches of industry. Metallurgical coal (Coking coal) is necessary to run the steel plants. Non coking coal is used by coal-based power plants and by the aluminum, cement and fertilizer industries.

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