केंद्र सरकार के किसान विरोधी अध्यादेशों पर क्रांतिकारी किसान यूनियन (पंजाब) के अध्यक्ष से साक्षात्कार

हाल में केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि क्षेत्र से संबंधित अध्यादेशों के बारे में मज़दूर एकता लहर ने क्रांतिकारी किसान यूनियन (पंजाब) के अध्यक्ष, डा. दर्शन पाल के साथ बातचीत की। साक्षात्कार की कुछ मुख्य बातें यहां पेश की जा रही हैं। म.ए.ल. : हाल ही में केन्द्र सरकार ने

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केंद्र सरकार के किसान विरोधी अध्यादेशों पर अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति के कार्यकारी अध्यक्ष से साक्षात्कार

हाल में केन्द्र सरकार द्वारा पारित कृषि क्षेत्र से संबंधित अध्यादेशों के बारे में मज़दूर एकता लहर ने अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति के कार्यकारी अध्यक्ष डा. सुनीलम के साथ बातचीत की। साक्षात्कार में की गयी मुख्य बातें यहां पेश की जा रही हैं। म.ए.ल. : जून महीने के आरम्भ में

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केंद्र सरकार के किसान विरोधी अध्यादेशों पर स्वाभिमानी शेतकारी संघटना के अध्यक्ष से साक्षात्कार

हाल में केन्द्र सरकार द्वारा पारित, कृषि क्षेत्र से संबंधी  अध्यादेशों के बारे में मज़दूर एकता लहर ने स्वाभिमानी शेतकारी संघटना के अध्यक्ष, पूर्व सांसद और अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के संस्थापक सदस्य, राजू शेट्टी के साथ बातें की। साक्षात्कार की मुख्य बातें यहां पेश की जा रही

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देशभर में मज़दूरों और किसानों के जोरदार विरोध प्रदर्शन

9 अगस्त को देश के किसानों ने ‘अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति’ की अगुवाई में, ‘कारपोरेट भगाओ-किसानी बचाओ’ का नारा लगाते हुए अपने-अपने राज्यों के जिलों, तहसीलों और पंचायतों पर जमकर प्रदर्शन किया। साथ ही साथ, ‘देश बचाओ’ के नारे के तहत, केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों की अगुवाई में लाखो-लाखो

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मज़दूरों और किसानों की बढ़ती एकता ज़िंदाबाद!

सबको सुख और सुरक्षा सुनिश्चित कराने के संघर्ष को आगे बढाएं!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान, 8 अगस्त, 2020

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने 9 अगस्त को देशभर में जन-प्रतिरोध कार्यक्रम घोषित किया है। केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों ने इस जन-प्रतिरोध में भाग लेने का फैसला किया है। मज़दूर और किसान अपनी रोज़ी-रोटी और अधिकारों की हिफ़ाज़त के लिए फ़ौरी क़दमों की मांगों को लेकर एकजुट हो रहे हैं।

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हमारे पाठकों से – सार्वजनिक और निजी बैंकों का पुनः पूंजीकरण

1 अगस्त 2020 को प्रकाशित लेख ‘बैंको का कर्ज न चुकाने वाले पूंजीपतियों के गुनाहों की सज़ा लोगों को भुगतनी पड़ रही है‘ में सार्वजनिक और निजी बैंकों का पुनः पूंजीकरण और ’गैर निष्पादित संपत्ती’ के बारे में वर्णन किया गया है। ’गैर-निष्पादित संपत्ति’ बैंकों द्वारा कंपनियों को दिये ऐसे

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बैंकिंग का संकेंद्रण और बढ़ती परजीविता

देश के सार्वजनिक बैंकों के विलयन और निजीकरण के जरिये बैंकिंग पूंजी का तेजी से संकेंद्रण होता जा रहा है। इसका मकसद है देश में कुछ चंद मुट्ठीभर बड़े इजारेदार बैंक तैयार करना, जो अधिकतम मुनाफों के लिए एक-दूसरे से होड़ करेंगे और समझौते करेंगे। बैंक के मज़दूरों और आम

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कोयला का निजीकरण और खदान मजदूरों का विरोध संघर्ष

कोल इंडिया लिमिटेड (सी.आई.एल.) और सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एस.सी.सी.एल.) के पांच लाख से अधिक मजदूर 18 अगस्त को एक दिन की हड़ताल करेंगे। यूनियनों ने 1 अगस्त को हड़ताल की नोटिस दे दी है। उस दिन से, मज़दूर तरह-तरह के विरोध कार्यक्रम कर रहे हैं, जैसे कि वर्क-टू-रूल, रैली,

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डॉक्टरों और नर्सों की भारी कमी

मुनाफ़ा कमाने की दिशा में बढ़ रही है चिकित्सीय शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा

देशभर में पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित डॉक्टरों और नर्सों की कमी की समस्या कोविड से पीड़ित मरीजों का इलाज करने के रास्ते में आज सबसे बड़ा रोड़ा बनकर खड़ी है। इस समस्या की एक मुख्य वजह है, मेडिकल कॉलेजों और नर्सिंग स्कूलों का ज़रूरत से कम संख्या में होना,

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बैंकों का कर्ज़ा न चुकाने वाले पूंजीपतियों के गुनाहों की सज़ा लोगों को भुगतनी पड़ रही है

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को पूंजीवादी कंपनियों के निजी हितों में चलाया जा रहा है।

11 जुलाई को रिज़र्व बैंक के गवर्नर ने बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों के एक सम्मलेन में बताया कि कोरोना महामारी के आर्थिक प्रभाव की वजह से “गैर-निष्पादित संपत्ति (एन.पी.ए.) में भारी बढ़ोतरी और बैंकों की पूंजी में गिरावट हो सकती है। इसलिए सार्वजनिक क्षेत्र और निजी बैंकों का पुनः पूंजीकरण करना बेहद ज़रूरी हो गया है”।

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