कृषि क्षेत्र से सम्बंधित अध्यादेश इजारेदार पूंजीपतियों के हित में और किसानों के हितों के खिलाफ हैं

केन्द्र सरकार द्वारा लाये गये कृषि क्षेत्र से संबंधित तीन अध्यादेशों: अनिवार्य वस्तुएं (संशोधन) अध्यादेश-2020, कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश-2020, मूल्य का आश्वासन और कृषि सेवा पर किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता अध्यादेश-2020 पर मज़दूर एकता लहर ने अनेक किसान नेताओं की प्रतिक्रिया ली।

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अधिकारों की हिफ़ज़त में संघर्ष

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हमारे पाठकों से : मजदूर वर्ग की एकता, वक्त की एक अविलंब जरूरत

प्रिय संपादक, मैं 4 जुलाई 2020 को प्रकाशित “मजदूर वर्ग की एकता, वक्त की एक अविलंब जरूरत” शीर्षक वाले सी.सी. स्टेटमेंट के जवाब में यह पत्र लिख रही हूँ। लेख में अपने हकों की लड़ाई लड़ने के लिए मज़दूर वर्ग की एकता के आह्र्वान से में पूरी तरह सहमत हूँ।

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अमरीका हिन्दोस्तान और चीन के बीच में विवाद भड़का रहा है

एशिया की इन दोनों बड़ी ताकतों को कमजोर करके अमरीकी साम्राज्यवाद को फायदा है
आपसी विवाद को बढ़ाने से न तो हिन्दोस्तान को फायदा है और न ही चीन को

15 जून को पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में, हिन्दोस्तानी और चीनी सैनिकों के बीच में सीमा विवाद को लेकर जो मुठभेड़ हुयी थी, उसमें दोनों देशों के कई सैनिक मारे गए थे। जबकि हिन्दोस्तान और चीन की सरकारें यह सुनिश्चित करने के लिए इंतजाम कर रही हैं कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर फिर से इस तरह की खूनी झड़पें न हों, तो अमरीका एशिया के इन दो पड़ोसी देशों के आपसी विवाद को भड़काने की भरसक कोशिश कर रहा है।

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मज़दूर वर्ग की एकता, वक्त की एक अविलंब जरूरत

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान, 4 जुलाई, 2020

हमारे देश में मज़दूर वर्ग की हालत असहनीय हो गई है। बेरोज़गारी, शोषण और ग़रीबी इस हद तक बढ़ गयी है कि इससे पहले कभी नहीं देखी गई।

एक के बाद एक, विभिन्न क्षेत्रों में, लाखों ठेका मज़दूरों, दिहाड़ी मज़दूरों और यहां तक कि नियमित वेतन पाने वाले मज़दूरों को भी उनकी नौकरी से निकाल दिया गया है वह भी बिना किसी नुकसान-भरपाई और मुआवज़ा वेतन के। जो मज़दूर अभी भी काम पर हैं, उनमें से बहुत से मज़दूरों को कई महीनों से वेतन नहीं मिला है।

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हमारे पाठकों से : मेरी तो जेब ही काट ली …

प्रिय संपादक महोदय, जैसे-तैसे महीने के आखिरी दिन बीते और तनख्वाह का आगमन हुआ, लगा कि अतिथि की तरह आयी और चली भी गयी। पता लगाया तो मालूम हुआ कि मेरी क्रयशक्ति कम हो गयी है। मैंने कहा मेरा तो कोई दोष नहीं है, तनख्वाह तो पूरी आयी है। अरे

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अधिकारों की हिफ़ाज़त में संघर्ष

  • दिल्ली सरकार ने अतिथि शिक्षकों को ड्यूटी से वंचित किया
  • पंजाब में फार्मासिस्टों का आंदोलन
  • बिहार के फार्मासिस्टों का अपने अधिकारों के लिये संघर्ष
  • बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारियों का प्रदर्शन
  • पटना के सफाई मज़दूरों की हड़ताल
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