पाकिस्तान के खिलाफ़ नाटो के हमले की निंदा करे!
26 नवम्बर को अमरीका की अगुवाई में अफ़गानिस्तान के नज़दीक पाकिस्तान की भूमि पर मिला-जुला हवाई तथा ज़मीनी हमला हुआ, जिसमें पाकिस्तान के 24 सैनिकों की मौत हुई और उससे ज्यादा घायल हुए। पाकिस्तानी नागरिक तथा सरकार ने एक होकर गुस्से की प्रतिक्रियाएं कीं और देश भर में विरोध प्रदर्शन किये गये। इतने सारे लोगों को मौत की कगार में ढकेलने वाले अमरीका की अगुवाई में किये गये हमले का मज़दूर एकता लहर कड़ा विरोध करती है। पाकिस्तान की सरकार तथा लोगों का पूरा हक़ बनता है कि वे इसका बदला लें तथा अपनी संप्रभुता की हिफ़ाज़त में पर्याप्त कदम उठाएं।
''गलतफ़हमी'' के बहाने से अमरीका इस करतूत का समर्थन करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन पाकिस्तान ने पूरी तरह से इस बहाने को यह कहते हुए कि ऐसा आक्रमण होने वाला है, ऐसी कोई भी चेतावनी उन्हें नहीं दी गयी थी, ख़ारिज किया है। अमरीकी साम्राज्यवादियों की तमन्ना है कि इस कार्यवाही को भी तथाकथित ''साथ-साथ होने वाला नुकसान'' है या फौजी कार्य का अनापेक्षित परिणाम है, ऐसा माना जाए। लेकिन हाल में पाकिस्तान तथा पाकिस्तानी लोगों के ख़िलाफ़ बार-बार किये गये हमलों में एक साफ निरंतरता दिखती है।
इसी साल, अमरीकी बलों ने चुपके-चुपके और जान-बूझकर उसके तथाकथित ''दोस्त'' की संप्रभुता का हनन किया, जब ओसामा बिन लादेन को पकड़कर मारने के नाम पर उसने एबोटाबाद पर हमला किया, जब वहां एक फौजी सम्मेलन चल रहा था। पाकिस्तानी सरकार तथा राष्ट्रीय संसद के बार-बार विरोध प्रकट करने के बावजूद वज़ीरीस्तान के प्रदेश पर अमरीकी चालक रहित विमानों की आक्रमण की श्रृंखला में अनगिनत लोगों की हत्या हुई है। दिन-दहाड़े लाहौर की सड़क पर एक अमरीकी जासूस ने गोलियां चलायी और दो पाकिस्तानियों की हत्या की। और अब पाकिस्तानी फौजी पोस्ट पर सीधा हमला हुआ है।
एक के बाद एक यह घटनाएं होना कोई इत्तिफ़ाक नहीं है। इनके परिणामों के बारे में पूरी जानकारी के साथ ये हमले एक ऐसे समय में किये गये हैं जब अफगानिस्तान तथा अफगानिस्तान-पाकिस्तान के सीमांत इलाकों में अमरीका तथा नाटो की कार्यवाहियों के ख़िलाफ़ पाकिस्तान की आम जनता का विरोध बढ़ रहा है। पाकिस्तान की राजनैतिक तथा सैनिक संस्थानों ने भी अपनी नाराजगी तथा असंतोष व्यक्त किया है। इसलिए इस बात पर विश्वास नहीं रख सकते कि पाकिस्तान पर बार-बार होने वाले हमले सिर्फ़ फौजी कार्य का अनापेक्षित परिणाम हैं। बल्कि पाकिस्तान को अमरीकी आदेशोंका पालन करने को मजबूर करने के ये प्रयास हैं। और वे एक ऐसे समय में हो रहे हैं जब साफ है कि अफगानिस्तान के ख़िलाफ़ अमरीका की अगुआई में जारी अभियान बुरी तरह से फंस गया है।

24 पाकिस्तानी सैनिकों की हत्या के जवाब में पाकिस्तान ने कड़े कदम उठाए हैं। अफगानिस्तान में स्थित नाटो बलों का प्रमुख आपूर्ति मार्ग बंद कर दिया गया है। कई हफ्तों में अगर वह खोला नहीं जाएगा, तो नाटो बलों के सामने घोर समस्याएं खड़ी होंगी। अफगानिस्तान के बारे में जर्मनी के बॉन शहर में जो सम्मेलन होने वाला है, उसमें सहभाग लेने से पाकिस्तान ने इंकार किया है। पाकिस्तानी सैनिकों की हत्या की अफ़गानिस्तान में स्थित नाटो कमान जो तथाकथित ''जांच'' कर रही है, उसमें भी सहभाग लेने से पाकिस्तान ने इंकार किया है। पाकिस्तान के प्रधान सेनापति जनरल कयानी ने अपने बलों को सीधा बताया है कि भविष्य में ऐसे किसी भी हमले के ख़िलाफ़ उनको तुरंत और पर्याप्त जवाब देना चाहिए। उसके लिए उन्हें ऊपर के अधिकारियों के आदेशों के लिए रुकना नहीं चाहिए, ''फिर कुछ भी परिणाम क्यों न हो या कोई भी कीमत चुकानी क्यों न पड़े''। ये उपाय बिल्कुल न्यायोचित तथा आवश्यक हैं। दुनिया में कहीं भी और कुछ भी करने के लिए हमें पूरी छूट है, ऐसे सोचने वाले अमरीकी साम्राज्यवादियों को और उसके दोस्तों को रोकने की सख्त ज़रूरत है। अपने इलाके में साम्राज्यवादी मौजूदगी के खिलाफ़ अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर हिन्दोस्तान सहित यहां के अन्य देशों को लड़ना चाहिये।
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