1 जनवरी, 2010
प्यारे साथियो,
मैं आप सभी को 2010 के इस नये वर्ष की शुभकामनायें देता हूँ। यह वर्ष 21वीं सदी के दूसरे दशक की शुरुआत है। साथ ही यह हमारी पार्टी के जीवन का 30वां वर्ष है। हिन्दोस्तानी समाज के इतिहास के लिये यह वर्ष बहुत ही महत्वपूर्ण साबित होने वाला है।
नये साल की शुरुआत से ही शासक वर्ग डींगें मार रहा है कि हिन्दोस्तानी अर्थव्यवस्था में बड़ा सर्वधन हो रहा है। परन्तु अपने देश की अर्थव्यवस्था से सिर्फ कुछ मुट्ठीभर लोग ही धनवान और समृध्द होते हैं। अधिकतर मेहनतकश लोगों को इसमें केवल अत्याधिक असुरक्षा, गरीबी और दुख ही मिलते हैं। पूंजीवादी विकास से हिन्दोस्तान के सबसे उत्पादक संसाधन, यानि कि उसके लोग, बर्बाद हो रहे हैं। करोड़ों मज़दूरों व किसानों को बेरोजगारी, अतिशोषण व बर्बादी का सामना करना पड़ रहा है। पूंजीवाद हमारी प्रकृति और पर्यावरण का विनाश कर रहा है। हिन्दोस्तानी पूंजीपति दूसरे देशों की जमीन व श्रम की लूट और शोषण को भी तेजी से बढ़ा रहे हैं।
जितनी तेजी से पूंजीवाद बढ़ रहा है उतनी ही तेजी से अपने देश के लोगों के बीच असंतोष भी बढ़ रहा है। समय-समय पर किसानों व आदिवासियों के संघर्षों के उभार के साथ-साथ, मज़दूर वर्ग के संघर्षों में भी एक नई लहर की शुरुआत अब दिखने लगी है। इसमें न केवल पारंपरिक क्षेत्रों के युनियनों में संगठित मजदूर शामिल हैं बल्कि, नये क्षेत्रों के मजदूर भी शामिल हैं जो हाल ही में युनियनों में संगठित हुये हैं - जैसे कि एअर लाईन्स के पायलट और आई.टी. कंपनियों के मजदूर आदि। पूंजीपति वर्ग के अंदरूनी अंतर्विरोध तेज़ होते जा रहे हैं। इसी कारण राज्यों की सीमाओं की परिभाषा और पुन:परिभाषा को लेकर तमाम विवाद खड़े हो रहे हैं।
कम्युनिज्म का विज्ञान हमें सिखलाता है कि पूंजीवाद के अंतर्विरोधों को हल करने और समाज को अगले उच्च चरण पर ले जाने का सिर्फ एक ही रास्ता है। मज़दूर वर्ग को क्रांति को अगुवाई दे कर, समाज के सभी मसलों को अपने हाथों में लेना होगा। किसानों व तमाम दबे-कुचले लोगों के साथ गठबंधन बना कर उसे शासक वर्ग बनना होगा। मज़दूर वर्ग को उत्पादन के साधनों का नियंत्रण अपने हाथों में ले कर, उन्हें सामाजिक संपत्ति में तब्दील करना होगा ताकि अर्थव्यवस्था सभी मेहनतकश लोगों की खुशहाली सुनिश्चित कर सके। उसे एक नयी राज्य व्यवस्था स्थापित करनी होगी जो मेहनतकशों के हितों की रक्षा करे।
मज़दूर वर्ग को अपनी क्रांतिकारी भूमिका अदा करने से ऐसी पार्टियां रोक रही हैं जो अपने आप को कहती तो कम्युनिस्ट हैं परन्तु जो सिर्फ चुनावी मशीने हैं। ये पार्टियां ऐसा हानिकारक भ्रम फैला रही हैं कि मज़दूर वर्ग को एक पूंजीपति गुट के खिलाफ, दूसरे पूंजीपति गुट से जुड़ कर कुछ हासिल हो सकता है। वे मज़दूरों को इस या उस पूंजीवादी संसदीय गठबंधन को वोट देने की सलाह देते हैं जो, उनके मुताबिक, मज़दूरों के हित में कुछ काम करेंगा। वे इस सच्चाई को छुपाते हैं कि संसदीय प्रणाली पूंजीपतियों को सत्ता में रखने के लिये ही बनाई गयी है। वे इस तथ्य को छुपाते हैं कि पूंजीपति वर्ग व मज़दूर वर्ग के हितों के बीच कोई समझौता हो ही नहीं सकता है। वे यह भ्रम फैलाते हैं कि अगर पूंजीवाद को ठीक से चलाया जाये तो उससे मेहनतकश लोगों का भला हो सकता है।
मज़दूर वर्ग व कम्युनिस्ट आंदोलन को अपने लक्ष्य से दिशाभूल करने में ऐसी पार्टियां भी काम कर रही हैं जो फौजी मशीनों की तरह काम करती हैं। मज़दूर वर्ग को राजनीतिक तौर पर सचेत किये बिना, शासक वर्ग के किसी निजी सदस्य पर हथियारबंद हमला करने से मज़दूर वर्ग, शासक वर्ग नहीं बन सकता है और न ही इससे क्रांति व समाजवाद की ओर बढ़ने में मदद मिलती है। इससे तो सिर्फ पूंजीपतियों को व्यक्तिगत आतंकवाद को दबाने के बहाने, लोगों पर राजकीय आतंक तेज करने में मदद मिलती है।
पूंजीवाद व पूंजीपतियों के बारे में भ्रम फैलाने वाली अनेक तरह की ढ़ोंगी कम्युनिस्ट पार्टियों की वजह से मज़दूर वर्ग आंदोलन जंज़ीरों में जकड़ा हुआ है। इन पार्टियों ने कम्युनिज्म को संसदीय विरोधी पार्टियों जैसा बेजान बना दिया है या उसे आतंकवाद का ही एक रूप बना कर रख दिया है। इन जंज़ीरों को तोड़े बिना मज़दूर वर्ग अपनी ऐतिहासिक क्रांतिकारी भूमिका अदा नहीं कर सकता है।
हमारे देश के मज़दूर वर्ग को एक अगुवा पार्टी की जरूरत है जो मजदूर वर्ग की आंखों पर बंधी चेतना-विरोधी पट्टी को खोल सके। ऐसी पार्टी न तो चुनावी मशीन हो सकती है और न ही फौजी मशीन। वह तो मज़दूर वर्ग व सभी दबे-कुचले लोगों को सत्ता मे लाने का साधन होगी। पिछले 29 वर्षों से हम ऐसी ही पार्टी, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी, को बनाने व मजबूत करने के काम में लगे हैं।
साथियो,
जैसा आप सभी को मालूम है, अपनी पार्टी की केन्द्रीय समिति, सचेत तौर पर, सभी कार्यकर्ताओं को संगठित करने व वैज्ञानिक कम्युनिज्म के विचारों व अभ्यास में प्रशिक्षित करने के काम में लगी हुई है। दुनिया भर की क्रांतियों के अनुभवों तथा 1857 के महान ग़दर से लेकर हिन्दोस्तानी क्रांतिकारी अनुभवों के बारे में अध्ययन के लिये पार्टी ने अनेक कम्युनिस्ट पाठशाला सत्र आयोजित किये हैं। उदारीकरण व निजीकरण के जरिये वैश्वीकरण के पूंजीपतियों के कार्यक्रम के विरोध में बढ़ती एकता को एक ठोस संगठनात्मक स्वरूप देने के व्यवहारिक कार्य को करते हुये ऐसा किया गया।
पार्टी की वर्षगांठ के तुरंत बाद, 26-27 दिसम्बर 2009 को हुआ सम्मेलन कम्युनिस्ट पाठशाला का सबसे हाल का सत्र है। अपने देश के मज़दूर वर्ग के नेताओं को तैयार करने की दिषा में यह सम्मेलन एक नया मीलपत्थर था, जो सभी हिन्दोस्तानी लोगों के भावी नेता होंगे।
आज जब दुनियाभर में पूंजीवाद एक गहरे संकट में है और हिन्दोस्तानी पूंजीपति वर्ग एक आक्रामक साम्राज्यवादी रास्ते पर आगे बढ़ रहा है, हिन्दोस्तानी मज़दूर वर्ग व कम्युनिस्ट आंदोलन के सामने एक ऐतिहासिक चुनौती है। यह चुनौती है - अपने देश के आक्रामक साम्राज्यवादी पूंजीपति वर्ग का रास्ता रोकना और किसानों व सभी दबे-कुचले लोगों के साथ गठबंधन बना कर मज़दूर वर्ग का राज स्थापित करना। हम जो कुछ भी करते हैं, वह इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में होना चाहिये।
हमारी पार्टी लगातार एक ऐसी राजनीतिक फौज बनाने के कार्य में जुटी हुई है जो परिस्थिति को मजदुर वर्ग के हित में बदल सकती हो। इस कार्य में शामिल है, मज़दूरों, किसानों, महिलाओं व नौजवानों के बीच जन संगठन बनाना। इसमें शामिल है, पूंजीवाद व पूंजीपति वर्ग के खिलाफ़ वर्ग संघर्ष में कम्युनिस्ट नेतृत्व के स्तर को उंचा उठाने का काम करना। 2010 के आने वाले वर्ष में यह काम एक नये शिखर पर पहुंचेगा। देश के अलग-अलग स्थानों पर कम्युनिस्ट पाठशालाओं के जरिये कम्युनिस्ट शिक्षा के कार्य को नये साल में और तेजी से किया जायेगा।
आओ साथियो, हम नये वर्ष का एक क्रांतिकारी आशावाद के साथ स्वागत करें! आओ, पार्टी का निर्माण करने व मजबूत करने की अपनी प्रतिज्ञा दोहरायें और अपने प्रयासों को दुगना करें! आओ, हम मज़दूर वर्ग आंदोलन में पूंजीपतियों की लाईनों को चकनाचूर करें ताकि हिन्दोस्तान में मज़दूर वर्ग का अधिनायकत्व स्थापित करने का रास्ता तैयार किया जाये!
हार्दिक क्रांतिकारी शुभकामनाओं के साथ,
लाल सिंह, महासचिव हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी
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