कोरिया के खिलाफ़ अमरीकी सैनिक अभ्यासों और मिसाइल रोधक व्यवस्था की स्थापना का व्यापक विरोध

उत्तर और दक्षिण कोरिया के लोग, सारी दुनिया के शांति पसंद लोगों के साथ मिलकर, यह मांग करने के लिये आगे आये कि 22 अगस्त से 2 सितंबर के बीच अमरीका और दक्षिण कोरिया के मिले-जुले उलची फ्रीडम गार्डियन (यू.एफ.जी.) युद्ध अभ्यासों को रोक दिया जाये। यू.एफ.जी. दुनिया में सबसे बड़े सैनिक अभ्यासों में एक है। खबरों के अनुसार, इन अभ्यासों में 50,000 दक्षिण कोरियाई सैनिक तथा 25,000 अमरीकी सैनिक भाग ले रहे हैं। इन अभ्यासों में पहले कोरिया जनवादी लोक गणराज्य (डी.पी.आर.के.) पर एहतियाती तौर पर परमाणु हमले और फिर उस देश पर सैनिक कब्जे़ का अभ्यास किया जायेगा। आस्ट्रेलिया, कोलंबिया, डेनमार्क, फ्रांस, इटली, फिलिपींस, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और कनाडा के अतिरिक्त 2500 सैनिक भी इन अभ्यासों में शामिल हैं।

मरीका यह दावा करता है कि ये अभ्यास “गैर भड़काऊ” स्वभाव के हैं और वे “दोनों राष्ट्रों के बीच दीर्घकालिक सैनिक सांझेदारी, प्रतिबद्धता और स्थाई मित्रता के प्रतीक हैं; कोरियाई प्रायद्वीप पर शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये हैं”। परन्तु शांति पसंद कोरियाई लोग अपने अनुभव से, जंग फरोश अमरीकी साम्राज्यवादियों के असली स्वभाव को अच्छी तरह जानते हैं।

दक्षिण कोरियाई लोगों का टी.एच.ए.ए.डी. मिसाइल रोधक व्यवस्था के खिलाफ़ विरोध

15 अगस्त को दक्षिण कोरिया के छोटे कृषि शहर सियोंगजू में, अमरीका और दक्षिण कोरिया की सरकारों के टी.एच.ए.ए.डी. मिसाइल रोधक व्यवस्था स्थापित करने के फैसले का विरोध दर्शाने के लिये, 908 लोगों ने सिर मुंडवा लिये। जैसे ही सिर मुंडवाने का समारोह समाप्त हुआ, वैसे ही सब लोग उठ खड़े हुये और अपने सिर पर कपड़ा बांधकर प्रदर्शन करने के लिये चल पड़े।

सियोंगजू के लोग, जो मुख्यतः तरबूज उगाने वाले किसान हैं, टी.एच.ए.ए.डी. मिसाइल रोधक व्यवस्था के खिलाफ़, सियोंगजू टास्क फोर्स के झंडे तले संगठित हो गये हैं। वे अपने उद्देश्य के समर्थन में पूरे देश के लोगों को संगठित करने की कोशिश कर रहे हैं। सियोंगजू के निवासियों ने अपनी चिंताओं को प्रकट करते हुये, अमरीका के राष्ट्रपति को एक ऑनलाइन याचिका भेजने की प्रक्रिया शुरू की है। सियोंगजू के नौजवानों और कॉलेज छात्रों की पहल पर शुरू की गई, टी.एच.ए.ए.डी. के खिलाफ़ जनता की आॅनलाइन याचिका पर 10 अगस्त तक एक लाख लोगों ने हस्ताक्षर किये थे, जो कि आयोजकों की उम्मीदों से कहीं ज्यादा था। बीते 40 से अधिक दिनों से, सियोंगजू के निवासी अपना विरोध प्रकट करने के लिये, हर शाम को कैंडल लाइट प्रदर्शन में एकत्रित हो रहे हैं।

18 अगस्त को कोरिया में टी.एच.ए.ए.डी. स्थापित करने के खिलाफ़, नेशनल एक्शन के तहत 145 जन संगठन एकत्रित हुये। उन्होंने पूरे देश में अपने आंदोलन को फैलाने की योजना घोषित की।

17 अगस्त को जब दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री हान मिन कू टी.एच.ए.ए.डी. की स्थापना का विरोध करने वाले सियोंगजू टास्क फोर्स के कार्यकर्ताओं से बातचीत करन के लिये गये, तो उन्हें लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा। टी.एच.ए.ए.डी. के लिये किसी दूसरे स्थान को तलाशने के उनकी सरकार के प्रस्ताव का कार्यकर्ताओें ने जमकर विरोध किया और बार-बार यही मांग उठाते रहे कि “पूरे कोरियाई प्रायद्वीप पर कहीं भी टी.एच.ए.ए.डी. नहीं लगेगा!”

15 अगस्त को सियोंगजू के निवासियों ने यह संकल्प लिया कि अपने देश में विदेशी ताक़तों का सैनिक अड्डा कभी नहीं बनाने देंगे। एक सामूहिक घोषणापत्र में उन्होंने जापानी कब्जे़ के खिलाफ़ अपने पूर्वजों के संघर्ष का स्मरण किया और आने वाली पीढ़ियों के लिये शांतिपूर्ण देश की विरासत छोड़ जाने का प्रण लिया।

टी.एच.ए.ए.डी. के खिलाफ़ संघर्ष की वजह से, दक्षिण कोरिया के लोगों में अमरीका और दक्षिण कोरिया के बीच गठबंधन के बारे में बहुत सारे सवाल उठ रहे हैं। अनेक विद्वानों, विधायकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि म्यूचुअल डिफेंस ट्रीटी - अमरीका और दक्षिण कोरिया के बीच सैनिक गठबंधन - देश के लोगों के हितों के खिलाफ़ है तथा शांति और सुरक्षा के लिये एक खतरा है। उन्होंने रक्षा मंत्री को हटाने की मांग की है और यह भी मांग की है कि इस प्रकार के किसी भी सैनिक फैसले पर नेशनल असेंबली (संसद) में सहमति प्राप्त होनी चाहिये।

कोरियाई लोग एकजुट होकर, दक्षिण कोरिया के छोटे कृषि शहर सियोंगजू में, टर्मिनल हाई आल्टिट्यूड एरिया डिफेंस (टी.एच.ए.ए.डी.) नामक मिसाइल रोधक व्यवस्था स्थापित करने के अमरीकी और दक्षिण कोरियाई सरकार के मिले-जुले फैसले का भी डटकर विरोध कर रहे हैं। जब 13 जुलाई को इसकी घोषणा की गई थी तब से सियोंगजू के लोग इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने वादा किया है कि जब तक यह फैसला वापस नहीं लिया जायेगा और टी.एच.ए.ए.डी. को कोरिया की धरती से प्रतिबंधित नहीं किया जायेगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। इस संघर्ष में दक्षिण कोरिया के अन्य शहरों के निवासी, उत्तरी कोरिया से उनके देशवासी तथा सारी दुनिया के शांति पसंद लोग उनका साथ दे रहे हैं। (देखिये बॉक्स: दक्षिण कोरियाई लोगों का टी.एच.ए.ए.डी. मिसाइल रोधक व्यवस्था के खिलाफ़ विरोध) अमरीकी साम्राज्यवादियों ने कोरिया जनवादी लोक गणराज्य के खिलाफ़ लगातार शत्रुतापूर्ण नीति अपनाई है। कोरिया जनवादी लोक गणराज्य की संप्रभुता को धमकाने वाले हमलावर यू.एफ.जी. सैनिक अभ्यासों के अलावा अमरीका ने कोरियाई युद्ध के औपचारिक अंत को घोषित करने वाली शांति संधि पर हस्ताक्षर करने से इंकार किया है। इस खतरे और दुश्मनी का सामना करते हुये, समाचार सूत्रों के अनुसार, कोरिया जनवादी लोक गणराज्य ने अपने ऊपर होने वाले हमलों के निरोधक बतौर मिसाइलों को दागने का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। इजारेदार पूंजीपतियों के नियंत्रण में मीडिया ने इन मिसाइलों के बारे में बहुत शोर मचाया, उसे “भड़काऊ हरकत” बताया और ऐलान कर दिया कि कोरिया जनवादी लोक गणराज्य इस इलाके में शांति के लिये बहुत बड़ा खतरा है। परन्तु मीडिया अमरीका और उसके मित्र देशों द्वारा किये जा रहे व्यापक युद्ध अभ्यासों और कोरिया जनवादी लोक गणराज्य को दूसरी धमकियों के बारे में खामोश है।

अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी प्रधानता में एक-धु्रवीय दुनिया स्थापित करने की पूरी कोशिश करते हुये, अपनी उच्च सैनिक और परमाणु ताक़त का इस्तेमाल करके, उन सभी देशों व लोगों को धमकाते आये हैं, जो अमरीकी हुक्मशाही से मुक्त होकर, अपने विकास के लिये खुद अपने चुनिंदा रास्ते पर चलना चाहते हैं। अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अनेक देशों की आज़ादी और संप्रभुता का घोर हनन किया है और उन पर सैनिक हमले भी किये हैं, जैसे कि अफगानिस्तान और इराक पर, लिबिया, यमन, सिरिया, इत्यादि पर। उन्होंने अमरीकी साम्राज्यवादियों द्वारा निर्धारित दिशा में चलने से इंकार करने वाले देशों पर कठोर से कठोर प्रतिबंध लगाये हैं। आज अपनी एशिया धुर्री नीति का बढ़ावा देते हुये, अमरीकी साम्राज्यवादी एशिया-प्रशांत महासागर इलाके में अपनी सैनिक उपस्थिति और कार्यवाहियों को खूब तेज़ कर रहे हैं और इस इलाके के अन्य देशों को भी अपनी सैनिक कार्यवाहियों में शामिल कर रहे हैं। उनका इरादा है चीन को घेरना और एशिया पर अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व स्थापित करना, जो कि इस इलाके की शांति और सुरक्षा के लिये भयानक खतरा है।

कोरिया जनवादी लोक गणराज्य ने हमेशा ही अमरीकी साम्राज्यवादी हुक्मशाही के सामने घुटने टेकने से इंकार किया है और कोरियाई राष्ट्र व लोगों के हितों तथा एकता की हिफाज़त करते हुये, अपना स्वतंत्र रास्ता अपनाया है। यह अमरीकी साम्राज्यवादियों के गले में एक बड़ा कांटा है। इसीलिये अमरीकी साम्राज्यवादी कोरिया जनवादी लोक गणराज्य के खिलाफ़ लगातार परमाणु और सैनिक ब्लेकमेल की हरकतें करते रहते हैं। साम्राज्यवादियों और इजारेदार पूंजीपतियों द्वारा नियंत्रित मीडिया उत्तर कोरिया की सरकार और लोगों को “दुष्ट ताक़त” बतौर दर्शाने की अथक कोशिश करती है, जबकि उस देश के खिलाफ़ अमरीका व उसके मित्र देशों द्वारा लगातार धमकियों और ब्लेकमेल के बारे में अपराधपूर्ण खामोशी बनाये रखते हैं।

समाचार सूत्रों से जाना जाता है कि अमरीका व उसके मित्र देशों के दबाव के चलते, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद फिर से विचार-विमर्श कर रही है कि कोरिया जनवादी लोक गणराज्य पर किस प्रकार के नये प्रतिबंध लगाये जायें। इस बीच, कोरिया जनवादी लोक गणराज्य के संयुक्त राष्ट्र संघ में दूत तथा स्थाई प्रतिनिधि, जा सोंग नाम ने सुरक्षा परिषद से अपील करते हुये एक पत्र जारी किया है, जिसमें यह मांग की गई है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यू.एफ.जी. अभ्यासों को रोकने का कदम ले, क्योंकि ये कोरिया जनवादी लोक गणराज्य के खिलाफ़ हमले के समान हैं और इनसे कोरियाई प्रायद्वीप पर अस्थाईपन बढ़ रहा है।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी कोरिया जनवादी लोक गणराज्य के खिलाफ़ अमरीकी साम्राज्यवादियों के युद्ध अभ्यासों और टी.एच.ए.ए.डी. मिसाइल रोधक व्यवस्था स्थापित करने के उनके फैसले की कड़ी निन्दा करती है। हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी देश के मजदूर वर्ग और लोगों तथा सारी दुनिया के साम्राज्यवाद विरोधी व शांति पसंद लोगों को आह्वान करती है कि सैनिक धमकी और ब्लेकमेल की अमरीकी साम्राज्यवादी नीति की कड़ी निन्दा करें और साम्राज्यवादी दबाव व हुक्मशाही से मुक्त, राजनीतिक व आर्थिक विकास के लिये अपना स्वतंत्र रास्ता अपनाने के राष्ट्रों और लोगों के अधिकार की हिफाज़त करें।

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दक्षिण कोरिया    फ्रीडम गार्डियन    सैनिक अभ्यासों    Sep 16-30 2016    World/Geopolitics    War & Peace     2016   

PARTY DOCUMENTS

8 Jan General Strike

Call of the Mazdoor Ekta Committee

The all India general strike has been called to resolutely oppose the course of enriching the capitalist minority by impoverishing the toiling majority. It has been called to assert the rights that belong to workers, peasants and other toiling people who create the wealth of India.

Hum Hain Iske Malik! Hindostan Humara!

Election manifesto of a CGPI supported candidate for Lok SabhaParties of the capitalist class claim that there is no alternative to the program of globalisation,liberalisation and privatisation. The truth is that there IS an alternative.The alternative is to reorient the economy to fulfil people’s needs instead of fulfilling capitalist greed. This is the program for the Navnirman of India.

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5th Congress DocumentThe Report to the Fifth Congress of the Communist Ghadar Party of India, presented by Comrade Lal Singh, General Secretary of the CGPI, on behalf of its Central Committee, was discussed and adopted by the Fifth Congress of the CGPI, held in November 2016. By decision of the Fifth Congress, this report has been edited for publication.

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Click to Download PDFThe first part of this pamphlet is an analysis of facts and phenomena to identify and expose the real aims behind the Note Ban. The second part is devoted to a critical appraisal of the government’s claims that it will reduce inequality, corruption and terrorism. The third part is what Communist Ghadar Party believes is the real solution to these problems and the immediate program of action towards that solution.

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These Elections are a FarceInterview with Comrade Lal Singh, General Secretary of Communist Ghadar Party of India by Comrade Chandra Bhan, Editor of Mazdoor Ekta Lehar

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Manifesto 2014Unite around the program to reconstitute the Indian Republic and reorient the economy to ensure prosperity and protection for all!

There is growing realisation among workers, peasants and other self-employed people that the program of liberalisation and privatisation only serves to enrich an exploiting minority at their expense. Mass resistance is growing to this anti-worker, anti-peasant and anti-national program.

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